अध्यात्म

Explained: एक श्राप के बाद भगवान विष्णु ने लिया था पीपल का अवतार, हिंदू धर्म में क्यों है पीपल का इतना महत्व, कैसे करें पीपल की पूजा, जानिए सबकुछ

Importance And Significance of Peepal Tree (पीपल के पेड़ का इतिहास और महत्व): सनातन धर्म में पीपल के पेड़ का खास महत्व है। पद्मपुराण में पीपल के पेड़ को विष्णु भगवान का ही रुप माना गया है। इस पेड़ की पूजा अनेक रूप में की जाती है। पीपल के पेड़ की पूजा करने से बहुत सारी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानें इस पेड़ की उत्पति कैसे हुई और इसका महत्व।

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Peepal Tree

Importance And Significance of Peepal Tree (पीपल के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है): पीपल के पेड़ का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि मैं वृक्षों में पीपल हूं। पीपल ब्रम्ह वृक्ष हैं। पीपल पर कई सिद्ध देव आत्माएं विचरण और विश्राम करती हैं। आदि काल से पीपल की पूजा होती रही है। पीपल को जल देने से शनि प्रकोप शांत होता है। अनुकूल फल प्राप्ति व प्रतिकूलता मिटाने के लिए सूर्योदय के पहले पीपल को जल देने से समस्त कष्टों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। पंडित सुजीत जी महाराज के अनुसार पीपल की पत्तियों को पीपल से विनय पूर्वक मांग कर एक पत्ता सेवन करने से आरोग्यता प्राप्त होती है। इसके नीचे किसी भी मंत्र को आप सिद्ध कर सकते हैं। पीपल को जल देकर उसके जड़ के पास मिट्टी का तिलक करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता भी है। आइए जानते हैं इस पेड़ की उत्पति कब हुई और इसका इतिहास क्या है।

पीपल के पेड़ की उत्पति कैसे हुई

पद्म पुराण के अनुसार माता पार्वती के श्राप से भगवान शंकर को बरगद और ब्रह्मा को पाकड़ के रूप में अवतार लेना पड़ा था। वहीं भगवान विष्णु ने पीपल के पेड़ के रूप में अवतार लिया। इसी कारण पपील के पेड़ को भगवान विष्णु का रुप माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी साक्षात आकर पीपल के पेड़ में निवास करते हैं। उपनिषदों में भी पीपल के पेड़ के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है। उपनिषदों में कहा गया है कि जो भी पीपल के पेड़ के काटता है। वो नरक का भागीदारी बनता है। स्कंद पुराण में पीपल के पेड़ के जड़ों में विष्णु और तने में केशव, पत्तों में भगवान श्री हरि और शाखाओं में नारायण वास करते हैं। इस वृक्ष को पापों का नाश करने वाला माना गया है। इसकी पूजा करने से और जल अर्पित करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
Peepal Tree utpati

Peepal Tree utpati

पीपल का वैज्ञानिक महत्व

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही पीपल के पेड़ का खास महत्व है। ये वृक्ष कीटाणु को नष्ट करता है और वातावरण को शुद्ध करता है। इस कारण इसे शास्त्रों में देवता तुल्य माना गया है। पीपल रात-दिन निरंतर 24 घंटे ऑक्सीज़न प्रदान करने वाला एकमात्र वृक्ष माना जाता है। इस पेड़ की छाया गर्मियों में शीतलता प्रदान करती है और सर्दियों में गमाहट देती है।
Peepal Tree History

Peepal Tree History

पीपल के पेड़ का इतिहास

पीपल के पेड़ का पता मोहनजोदड़ो शहर में सिंधु घाटी सभ्यता (3000 ईसा पूर्व - 1700 ईसा पूर्व) के आसपास लगाया जा सकता है। उस समय की खुदाई से भी यही पता चलता है कि उस समय भी पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। वैदिक काल में भी पीपल के पेड़ की लकड़ी का प्रयोग बहुत सारे काम के लिए किया जाता था। स्कंद पुराण में वर्णित है कि जिसकी कोई संतान नहीं है। वो पीपल के पेड़ को अपनी संतान की तरह मान सकता है। जब तक पीपल का पेड़ फलता- फूलता है। तब तक घर परिवार में बरकत और समृद्धि आती है।

पीपल के पेड़ को काटना शुभ या अशुभ

हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बहुत पवित्र माना जाता है। इस पेड़ को बोधि वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है,क्योंकि इसी पेड़ के नीचे बैठकर भगवान बौद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस पेड़ का बौद्ध धर्म में भी खास महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस पेड़ को काटना अशुभ होता है। इस पेड़ को काटने से पाप का भागी बनना पड़ता है।

रात में पीपल के पेड़ के पास क्यों नहीं जाना चाहिए

विज्ञान के अनुसार रात के समय में पीपल के पेड़ से कार्बन डाय ऑक्साइड भारी मात्रा में निकलती है। पीपल के पेड़ के पत्ते घने होते हैं। इस कारण इसमे से अधिक मात्रा में कार्बन डाय ऑक्साइड निकलती है। जिसके कारण इस पेड़ के नीचे रात को जानें मना किया जाता है। ज्योतिष विज्ञान की माने तो पीपल का पेड़ बहुत ही पूजनीय माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि रात के समय पीपल के पेड़ में लक्ष्मी जी की बहन अलक्ष्मी का वास होता है। इस कारण रात के समय इसके आसपास नहीं जाना चाहिए।
worship peepal tree

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शनिवार के दिन क्यों की जाती है पीपल के पेड़ की पूजा

शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा को समर्पित है। शनिदेव के वरदान से शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से और जल अर्पित करने से साधक को शनि की साढ़ें साती और दैय्या से छुटकारा मिल सकता है। शनिवार के दिन पीपल का वृक्ष लगाने से भी शनि देव की कृपा हमेशा बनी रहती है। शनि को शांत करने के लिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ में घी का दीपक जलाएं और जल चढ़ाएं। ऐसा करने से शनि के प्रकोप से बच सकते हैं।

पीपल में होता है पितरों का वास

पुराणों के अनुसार पीपल के पेड़ में केवल देवताओं का ही वास नहीं होता है, बल्कि पितरों का भी वास माना जाता है। घर के आसपास पीपल का पेड़ लगाना या होना बहुत ही शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष के समय में हर रोज पीपल के पेड़ में जल अर्पित करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं।
peepal puja vidhi

peepal puja vidhi

पीपल पेड़ की पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद मंदिर जाएं।

उसके बाद भगवान गणेश, शिव और विष्णु के बाद पीपल की पूजा करें।

पीपल के पेड़ में गाय का दूध मिला हुआ जल अर्पित करें।

उसके बाद पीपल को पूजन सामग्री चढ़ाएं।

फिर दीपक जलाएं और मंत्रों का जाप करें।

peepal upay

peepal upay

पीपल के पेड़ का उपाय

पंडित सुजीत जी महाराज के अनुसार पीपल के पत्ते पर सिंदूर लगाकर उसे रात को सोते समय अपने तकिये के नीचे रख दें। ऐसा करने से कर्ज की समस्या तुरंत छुटकारा मिल जाएगा।

पीपल के पेड़ के नीचे शिवलिंग को स्थापित कर रोज उस शिवलिंग की पूजा करें। ऐसा करने से हर प्रकार के कष्ट से मु्क्ति मिल जाएगी और जीवन में सुख, शांति आएगी।

पीपल के पत्ते को गंगाजल से साफ करके। उस पर हल्दी और दही से ॐ हं हनुमते नमः लिख दो। उसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से आर्थिक तंगी से छुटकारा मिल जाता है।

Significance of Peepal Tree

Significance of Peepal Tree

पीपल के पेड़ का महत्व

शास्त्रों में पीपल के पेड़ को बहुत ही शुभ और पूजनीय माना जाता है। पीपल का वृक्ष भगवान विष्णु का ही स्वरूप है। बौद्ध धर्म में भी पीपल का पेड़ का खास महत्व है। इस पेड़ को बोधि वृक्ष और अश्वत्थ वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इस वृक्ष की पूजा करने से तमाम पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही पितरों का आशीर्वाद मिलता है। पीपल की पूजा से हर प्रकार के दोष से भी साधक को छुटकारा मिल जाता है और लक्ष्मी जी की कृपा हमेशा बनी रहती है।
Jayanti Jha
जयंती झाauthor

बिहार के मधुबनी जिले से की रहने वाली हूं, लेकिन शिक्षा की शुरुआत उत्तर प्रदेश की गजियाबाद जिले से हुई। दिल्ली विश्वविद्यायलय से हिंदी ऑनर्स से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से हिंदी में मास्टर्स की डिग्री ली और इसके साथ ही दिल्ली के विवेकानंद कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता में डिपलोमा किया। डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत 2022 में रफ्तार से हुई। अगस्त 2023 से Times Network में timesnowhindi.com के फीचर टीम के साथ जुड़ी हूं। इससे पहले vianet media pvt. ltd में बतौरा हिंदी टाइपिस्ट 1 साल काम किया। रफ्तार में रहकर आध्यात्म पर लिखना शुरू किया । आध्यात्म के बारे में जानना और उसके बारे में चर्चा करना पसंद है। ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों के बारे में जानना बहुत पसंद है। लोगों तक सही जानकारी देना ही मेरी प्राथमिकता रहती है।

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