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Shattila Ekadashi Date Live: आज की एकादशी की कहानी क्या है, आज के एकादशी व्रत का पारण कब है, एकादशी को चावल खाने से क्या होता है

Aaj Ki Ekadashi ka Paran Kab Karein, Aaj ki Ekadashi ki Katha, Kya Aaj Chawal Kha Sakte hain, Shattila Akadashi Vrat katha Puja Vidhi, Aarti Live Updates: जनवरी महीने में एकादशी के दो व्रत आएंगे। 14 जनवरी 2026 को साल की पहली एकादशी कब है। वहीं दूसरी एकादशी का व्रत महीने के अंत में रखा जाएगा। यहां आप जनवरी के एकादशी व्रत की जानकारी विस्तार से ले सकते हैं। देखें कि आज कौन सी एकादशी है। आज 14 जनवरी को कौन सी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। देखें आज षटतिला एकादशी है क्या। आज की एकादशी के व्रत नियम और लाभ। साथ ही जानें कि एकादशी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए। क्या एकादशी व्रत में चावल खा सकते हैं। क्या एकादशी व्रत में बाल धो सकते हैं। साथ ही पढ़ें आज की एकादशी की व्रत कथा। जानें आज की एकादशी का पारण कब करना है। , आज का पंचांग 14 January 2026:आज षटतिला एकादशी पर दो शुभ योगों का संयोग

Shattila Ekadashi Date Live: आज की एकादशी की कहानी क्या है, आज के एकादशी व्रत का पारण कब है, एकादशी को चावल खाने से क्या होता है

Ekadashi Date Time (13 या 14 January 2026) Magh Month Ki Ekadashi kab hai 2026 Mein, shattila Akadashi Vrat katha (षटतिला एकादशी व्रत कथा) Puja Vidhi, Aarti Live Updates

Aaj Ki Ekadashi ka Paran Kab Karein, Aaj ki Ekadashi ki Katha, Kya Aaj Chawal Kha Sakte hain, Shattila Akadashi Vrat katha Puja Vidhi, Aarti Live Updates: पंचांग के अनुसार, हर मास में दो प्रमुख एकादशी पड़ती हैं, जिन्हें भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के रूप में माना जाता है। एकादशी का व्रत और पूजा भगवान विष्णु को समर्पित होती है। यह व्रत आत्म-शुद्धि, मन की शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए माना जाता है। जनवरी 2026 के महीने में षटतिला एकादशी और जया एकादशी के व्रत आएंगे। षटतिला एकादशी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार शुरू हुए साल की पहली एकादाशी मानी जाती है। यहां आप जानें कि एकादशी का व्रत जनवरी 2026 में किस दिन रखा जाएगा के साथ ही एकादशी व्रत 2026 की बारे में भी विस्तार से जानकारी। आज या कल - क्या है साल की पहली एकादशी की सही डेट। साथ ही तिथि के बारे में भी सटीक जानकारी ले सकते हैं। ये भी जानें कि एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं और क्या नहीं। एकादशी व्रत के नियम भी आप यहां जान सकते हैं। जानें क्या एकादशी व्रत में बाल धोना सही रहेगा या नहीं। आगे आप आज की एकादशी की व्रत कथा पढ़ सकते हैंं। साथ ही जानें कि आज की एकादशी का पारण टाइम क्या है।

जनवरी 2026 की दूसरी एकादशी कब है, देखें अगली एकादशी कब पड़ेगी

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षटतिला एकादशी की व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी जो भगवान विष्णु की बहुत बड़ी भक्त थी। वह जीवनभर भगवान विष्णु के सभी व्रत पूरे नियम और श्रद्धा से करती थी।

ब्राह्मणी ने कौन-सा कठिन व्रत किया था?
एक बार उस ब्राह्मणी ने भगवान विष्णु की आराधना करते हुए पूरे एक महीने तक उपवास रखा। इस लंबे उपवास से उसका शरीर कमजोर हो गया, लेकिन उसका तन पूरी तरह शुद्ध हो गया।

भगवान विष्णु को क्या चिंता हुई?
भगवान विष्णु ने अपने भक्त की सच्ची भक्ति देखकर सोचा कि तन की शुद्धि से तो इसे बैकुंठ की प्राप्ति हो जाएगी, लेकिन इसका मन तृप्त नहीं हो पाएगा।
क्योंकि उस ब्राह्मणी ने व्रत तो किया, लेकिन कभी अन्न या धन का दान नहीं किया था। शास्त्रों के अनुसार बिना दान के व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता।

भगवान विष्णु ब्राह्मणी के घर क्यों गए?
अपने भक्त को सही मार्ग दिखाने के लिए भगवान विष्णु स्वयं भिक्षा मांगने ब्राह्मणी के घर पहुंचे। लेकिन ब्राह्मणी ने दान में उन्हें केवल मिट्टी का एक पिंड दे दिया। भगवान विष्णु उसे स्वीकार कर वहां से लौट गए।

ब्राह्मणी को विष्णुलोक में क्या मिला?
कुछ समय बाद ब्राह्मणी का देहांत हो गया और वह विष्णुलोक पहुंची। वहां उसे रहने के लिए सिर्फ एक छोटी सी कुटिया मिली, जिसमें केवल एक आम का पेड़ था।
यह देखकर ब्राह्मणी ने प्रश्न किया कि इतने व्रत करने के बाद भी उसे यह साधारण स्थान क्यों मिला?

भगवान विष्णु ने क्या उत्तर दिया?
भगवान विष्णु ने कहा कि तुमने मनुष्य जीवन में कभी अन्न या धन का दान नहीं किया, इसलिए तुम्हें व्रत का पूरा फल नहीं मिला। यह सुनकर ब्राह्मणी को गहरा पश्चाताप हुआ।

षटतिला एकादशी व्रत का उपाय क्या बताया गया?
ब्राह्मणी ने भगवान से उपाय पूछा। तब भगवान विष्णु ने कहा कि जब देव कन्याएं तुमसे मिलने आएं, तो उनसे षटतिला एकादशी व्रत की पूरी विधि पूछना। जब तक वे विधि न बता दें, तब तक कुटिया का द्वार मत खोलना।

षटतिला एकादशी व्रत का फल क्या मिला?
ब्राह्मणी ने ऐसा ही किया और विधि जानकर षटतिला एकादशी का व्रत किया।
इस व्रत के प्रभाव से उसकी कुटिया धन-धान्य, सुख-सुविधाओं से भर गई और उसका जीवन आनंदमय हो गया।

षटतिला एकादशी का महत्व क्या है?
इस कथा के माध्यम से बताया गया है कि षटतिला एकादशी के दिन तिल का दान करने से सौभाग्य बढ़ता है, दरिद्रता दूर होती है और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते

धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन चावल में जल तत्व अधिक होता है और उसमें नकारात्मक ऊर्जा मानी जाती है, इसलिए इसका सेवन वर्जित है। आयुर्वेदिक दृष्टि से एकादशी पर पाचन शक्ति कमजोर रहती है, और चावल भारी होने के कारण व्रत में नहीं खाए जाते।

आज की एकादशी का पारण कब करें

एकादशी व्रत का पारण व्रत से अगले दिन किया जाता है। पारण समय अगले दिन सूर्योदय के बाद एक से दो घंटे के बीच का होता है। साथ ही एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में ही हो जाना चाहिए। षटतिला एकादशी 2026 का पारण समय 15 जनवरी को सुबह 7:15 के बाद रहेगा जब सूर्य देव दर्शन देंगे। व्रत का पारण विष्णु जी की पूजा, दान की सामग्री निकालने और प्रसाद ग्रहण करने से करें।

एकादशी व्रत कथा हिंदी में: यहाँ से पढ़े | एकादशी की आरती लिखित में| आज कितने बजे होगी एकादशी की पूजा, षटतिला एकादशी पूजा मुहूर्त 2026

Jan 14, 2026 | 06:40 PM IST

Shattila Ekadashi Date Live: एकादशी को चावल खाने से क्या होता है?

एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से व्रत का पुण्य कम हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार, चावल तामसिक और भारी भोजन माना जाता है, जो व्रत की शुद्धता और लाभ को कम कर देता है।
Jan 14, 2026 | 06:00 PM IST

Shattila Ekadashi Date Live: जनवरी 2026 में कितनी एकादशी हैं

जनवरी 2026 में दो एकादशी हैं।

1. षटतिला एकादशी – 15 जनवरी 2026

2. दूसरी एकादशी – 30 जनवरी 2026
Jan 14, 2026 | 05:27 PM IST

Shattila Ekadashi Date Live: क्या एकादशी व्रत में गाजर का हलवा खा सकते हैं

हां, एकादशी व्रत में गाजर का हलवा खा सकते हैं। बस ध्यान रखें कि हलवा व्रत के नियमों से बना हो। इसमें आटा, सूजी, मैदा, चावल या सामान्य चीनी न हो। गाजर का हलवा अगर दूध, घी और मिश्री से बनाया गया है, तो वह व्रत में ठीक माना जाता है।
Jan 14, 2026 | 05:00 PM IST

Shattila Ekadashi Date Live: षटतिला एकादशी व्रत में जल कब पिएं?

व्रत में दिनभर आवश्यकता अनुसार जल पी सकते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, लेकिन सामान्य व्रती सुबह स्नान के बाद और दिन में कभी भी जल ग्रहण कर सकते हैं।
Jan 14, 2026 | 04:56 PM IST

Shattila Ekadashi Date Live: क्या एकादशी व्रत में तिल खा सकते हैं

षटतिला एकादशी में तो तिल का विशेष महत्व होता है। इस दिन तिल से बनी चीजें जैसे तिल की चिक्की, तिल के लड्डू (बिना गुड़/शक्कर की जगह व्रत योग्य सामग्री के साथ), तिल का उपयोग फलाहार में किया जा सकता है। तिल को पवित्र और पाप नाशक माना गया है, इसलिए व्रत में इसका सेवन और दान दोनों शुभ होते हैं।
Jan 14, 2026 | 04:21 PM IST

Shattila Ekadashi Date Live: षटतिला एकादशी व्रत में फलाहार सूची

व्रत में फल, केला, सेब, पपीता, अनार, नारियल पानी, मूंगफली, मखाना, साबूदाना, शकरकंद और दूध से बनी चीजें खा सकते हैं।
Jan 14, 2026 | 03:43 PM IST

Shattila Ekadashi Date Live: षटतिला एकादशी व्रत तोड़ने का सही समय

एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद और पारण काल के भीतर व्रत खोलना चाहिए। समय से पहले या देर से पारण नहीं करना चाहिए।
Jan 14, 2026 | 02:47 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: क्या एकादशी पर प्याज लहसुन खा सकते हैं

एकादशी के दिन प्याज-लहसुन नहीं खाना चाहिए। अगर व्रत न भी रखा हो तो भी प्याज लहसुन का सेवन इस तिथि पर न करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार ये तामसिक भोजन हैं, जो एकादशी की पवित्रता के विरुद्ध माने जाते हैं। इसलिए सामान्य भोजन करने वाले लोग भी इससे परहेज करते हैं।
Jan 14, 2026 | 01:59 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: क्या एकादशी व्रत में चाय कॉफी पी सकते हैं

एकादशी व्रत में चाय-कॉफी पीना वर्जित माना जाता है, क्योंकि इनमें उत्तेजक तत्व होते हैं और यह व्रत की सात्त्विकता को भंग करते हैं। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से आवश्यकता हो तो दूध या फलाहार लेना अधिक उचित माना जाता है।
Jan 14, 2026 | 01:46 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: एकादशी की पूजा कब होती है

एकादशी की पूजा ऐसे तो एकादशी तिथि के दिन सुबह स्नान के बाद की जाती है। इसके अलावा शाम के समय दीपक जलाकर विष्णु पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
Jan 14, 2026 | 01:02 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: एकादशी व्रत में क्या-क्या खा सकते हैं

एकादशी व्रत में सात्त्विक और फलाहार भोजन किया जाता है। एकादशी व्रत में फल और सूखे मेवे, दूध और इससे बनी चीजें, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, साबूदाना खा सकते हैं। सब्जियों में आलू, लौकी, कद्दू और मसालों में सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हरी मिर्च, शहद, गुड़ आदि ले सकते हैं।
Jan 14, 2026 | 11:53 AM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: एकादशी पर विष्णु मंत्र कैसे जपें

षटतिला एकादशी पर श्रद्धा से विष्णु मंत्रों का जाप करने और तिल अर्पित करने से व्रत पूर्ण फल देता है और जीवन में सुख-शांति आती है।
मंत्र जप तुलसी दल और दीपक के साथ करें। काले तिल का प्रयोग अधिक शुभ माना जाता है।
Jan 14, 2026 | 11:17 AM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: एकादशी के लिए विष्णु जी का मंत्र

एकादशी व्रत में इस विष्णु ध्यान मंत्र का जाप करें -

ॐ शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥
Jan 14, 2026 | 11:10 AM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: एकादशी व्रत में बाल धोने चाहिए या नहीं

एकादशी व्रत में बाल धोने का शास्त्रीय निषेध नहीं है, लेकिन परंपरा अनुसार इससे परहेज़ किया जाता है। यदि आवश्यक हो तो सादे जल से बिना तेल-शैम्पू के स्नान के साथ पूजा करना उचित माना जाता है।
Jan 14, 2026 | 09:56 AM IST

Shattila Ekadashi Date Live: शनि दोष मे मुक्ति दिलाएगा षटलिता एकादशी का ये उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दान के बिना एकादशी का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता। षटतिला एकादशी के दिन तिल, तिल से बने लड्डू या तिल से जुड़े अन्य पदार्थों का दान करना विशेष फलदायी होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे शनि से जुड़े दोषों में कमी आती है और जीवन में चल रहे कष्ट धीरे-धीरे दूर होते हैं। जरूरतमंद लोगों को तिल का दान करने से पुण्य बढ़ता है और व्यक्ति के पाप कर्मों का क्षय होता है।
Jan 14, 2026 | 09:28 AM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: सोने के दान के बराबर है आज दिन तिल का दान

षटतिला एकादशी के दिन तिल से जुड़े उपायों का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन जल में तिल मिलाकर स्नान करने से तन और मन दोनों की शुद्धि होती है। स्नान के बाद शरीर पर तिल का उबटन लगाने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और सकारात्मकता बनी रहती है। पूजा के समय हवन सामग्री में तिल मिलाकर आहुति देने से वातावरण में शुभ ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा जल में तिल डालकर तर्पण करने से पितरों को शांति प्राप्त होती है। इस दिन भोजन में भी तिल का सेवन करना शुभ माना जाता है। साथ ही अपनी सामर्थ्य के अनुसार तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, जिसे स्वर्ण दान के समान फलदायी माना गया है।
Jan 14, 2026 | 11:29 AM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी व्रत से मिलेगी पितृदोष से मुक्ति

षटतिला एकादशी को पितृ शांति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन जल में तिल मिलाकर पितरों के लिए तर्पण करने से उन्हें तृप्ति मिलती है और उनकी आत्मा को शांति प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे पितर प्रसन्न होकर अपने वंशजों पर आशीर्वाद देते हैं, जिससे परिवार में सुख, समृद्धि और भाग्य में वृद्धि होती है।
Jan 14, 2026 | 08:58 AM IST

क्या है धर्मराज की कहानी, जिसे सुनने से खुलते हैं स्वर्ग के द्वार

पौराणिक कथा अनुसार एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी, वह खूब व्रत-पूजन करती थी। जब उसकी उम्र पूरी हो गई तो उसे एक दिन यमदूत उसे लेने आए और वह उनके साथ चल दी। रास्ते में चलते-चलते एक गहरी नदी आई तो यमदूत ने उससे पूछा कि माई तुमने गोदान किया है या नहीं? बुढ़िया ने तुरंत पूरी श्रद्धा से गाय का ध्यान किया तो गाय उसके समक्ष आ गई। फिर बुढ़िया उस गाय की पूंछ पकड़कर नदी आसानी से पार कर गई। कुछ देर बार उसके रास्ते में काले कुत्ते आ गए। तब यमदूत ने कहा कि कुत्तों को खाना दिया था या नहीं? बुढ़िया ने फिर कुत्तों का ध्यान किया तो वे रास्ते से चले गए।

भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की कहानी

बुढ़िया फिर से आगे बढ़ने लगी तब उसके रास्ते में कौए आ गए और उन्होंने उसके सिर में चोंच मारनी शुरु कर दी तो यमदूत बोले कि किसी ब्राह्मण की बेटी के सिर में तेल लगाया था या नहीं? बुढ़िया ने फिर ब्राह्मण की बेटी का ध्यान किया तो कौए वापस चले गए। कुछ आगे बढ़ने पर बुढ़िया के पैर में कांटे चुभने शुरू हो गए यमदूत बोले कि खड़ाऊ का दान किया है या नहीं? बुढ़िया ने उनका ध्यान किया तो खड़ाऊ उसके पैरों में आ गई। बुढ़िया फिर आगे बढ़ी तो फिर चित्रगुप्त जी ने यमराज से कहा कि आप यहां किसे लेकर आए हो?


तब यमराज जी बोले कि बुढ़िया ने दान-पुण्य तो बहुत किए हैं लेकिन उन्होंने अपने जीवन में धर्मराज जी के लिए कुछ नहीं किया इसलिए आगे के द्वार इसके लिए बंद हैं। धर्मराज की सारी बात सुनने के बाद बुढ़िया बोली कि आप मुझे सिर्फ सात दिन के लिए धरती पर वापस भेज दें। मैं पूरी श्रद्धा से धर्मराज जी का व्रत और उद्यापन करके वापस यहां लौट आऊंगी। यमराज ने उन्हें धरती पर वापस भेज दिया।

बुढ़िया अपने गांव आ गई और गांव वालों ने उसे भूतनी समझकर अपने घर के दरवाजे बंद कर दिए। वह जब अपने घर गई तो उसके बहू-बेटे ने भी डर के मारे दरवाजे बंद कर दिये। बुढ़िया ने कहा कि मैं भूतनी नहीं हूं, मैं तो धर्मराज जी की आज्ञा से सिर्फ 7 दिन के लिए धरती पर वापस आई हूं। इन सातों दिनों में मैं धर्मराज जी का व्रत और उद्यापन करुंगी जिससे मेरे लिए परलोक के रास्ते खुल जाएंगे।

बुढ़िया की बातें सुनकर बहू-बेटे उसके लिए पूजा की सामग्री ले आए। लेकिन जब बुढ़िया कहानी कहती है तब वह हुंकारा नहीं भरत। जिससे बुढ़िया बाद में अपनी पड़ोसन को कहानी सुनाती है और वह हुंकारा भरती है। इस तरह से सात दिन धर्मराज की विधि विधान व्रत पूजा और उद्यापन करने के बाद धर्मराज जी बुढ़िया को लेने के लिए विमान भेजते हैं।

स्वर्ग से आए विमान को देख उसके बहू-बेटों के साथ सारे गांववाले भी स्वर्ग जाने को तैयार हो गए। बुढ़िया ने कहा कि तुम कहां तैयार हो रहे हो? मेरी कहानी तो सिर्फ मेरी पड़ोसन ने सुनी है इसलिए वही मेरे साथ जाएगी। तब सारे गांववाले बुढ़िया से धर्मराज जी की कहानी सुनाने का आग्रह करने लगे तब बुढ़िया उन्हें भी कहानी सुना देती है। कहानी सुनने के बाद गांव के सभी लोग विमान में बैठकर स्वर्ग जाते हैं तो धर्मराज जी कहते हैं मैने तो विमान केवल बुढ़िया को लाने के लिए भेजा था। तब बुढ़िया माई ने कहा कि हे धर्मराज जी! मैने अपने जीवन में जो भी पुण्य किए हैं उसमें से आधा भाग मैं आप गांववालों को देना चाहती हूं इस तरह से धर्मराज ने ग्रामवासियों को भी स्वर्ग में जाने दिया।

हे धर्मराज महाराज! जैसे आपने बुढ़िया और उसके गांव के सभी लोगों को स्वर्ग में जगह दी उसी तरह से हमें भी देना। साथ ही कहानी सुनकर हुंकारा भरने वालों को भी और कहानी कहने वाले को भी परलोक में जगह देना। धर्मराज महाराज जी की जय! यमराज महाराज जी की जय!
धर्मराज की कहानी पढ़ने के नियम (Dharmraj Ki Kahani Ke Niyam)

पौराणिक कथाओं अनुसार कोई एक साल, कोई 6 महीने, कोई सात दिन ही सुने पर धर्मराज जी की कहानी जरूर सुननी चाहिए। इसके बाद उसका उद्यापन कर देना चाहिए। उद्यापन में काठी, छतरी, टोकरी, टोर्च, साड़ी ब्लाउज का बेस, चप्पल, बाल्टी रस्सी, छ: मोती, छ: मूंगा, यमराज जी की लोहे की मूर्ति, लोटे में शक्कर भरकर, पांच बर्तन, धर्मराज जी की सोने की मूर्ति, चांदी का चांद, सोने का सूरज, चांदी का साठिया ब्राह्मण को दान में देना चाहिए। ध्यान रखें कि प्रतिदिन चावल का साठिया बनाकर ही ये कहानी सुनी जाती है।
Jan 14, 2026 | 07:38 AM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: आज एकादशी कब तक है

षटतिला एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी 2026 दिन मंगलवार दोपहर लगभग 3:17 बजे से हुई है। इस तिथि का समापन 14 जनवरी 2026 बुधवार शाम लगभग 5:52 बजे तक होगा। इस तरह एकादशी आज शाम को करीब 6 बजे तक रहेगी।
Jan 13, 2026 | 11:52 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी के बारे में बताएं

षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन तिल से जुड़े छह प्रकार के पुण्य कर्म (स्नान, उबटन, हवन, दान, सेवन और तर्पण) करने का विधान है, इसलिए इसे षटतिला कहा जाता है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और तिल दान करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
Jan 13, 2026 | 11:14 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: एकादशी में क्या नहीं खाना चाहिए

एकादशी के दिन अन्न (चावल, गेहूं, दालें), मांस-मदिरा और प्याज-लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। तामसिक भोजन और बासी या ज्यादा मसालेदार चीजों से भी परहेज किया जाता है।
Jan 13, 2026 | 10:00 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी व्रत कथा

एक समय काशी नगरी में एक आदमी बहुत ही गरीबी में जीवन जिया करता था। वह जंगल से लकड़ी काटकर अपना गुजारा किया था, लेकिन जब कभी भी उसकी लकड़ी न बिकने के कारण कमाई नहीं होती तो वह अपने बच्चों के साथ भूखा ही सो जाया करता था। एक दिन जब वह लकड़ी काटकर शहर की ओर जा रहा था तो एक सेठ ने उसकी सारी लक​ड़ियों को खरीद लिया। जब वह उन लकड़ियों को उस सेठ घर पहुंचाने के लिए पहुंचा तो उसने पाया कि वहां किसी चीज की तैयारी चल रही है। सेठ जी से पूंछने पर उसे पता चला कि वह अगले दिन षटतिला एकादशी व्रत की तैयारी कर रहे हैं। तब लकड़हारे ने सेठ जी से पूछा कि इसे करने से क्या फायदा है। तब सेठ ने बताया कि इसके पुण्यफल से धन-दौलत बढ़ती है और व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी हो जाती है। उस सेठ से व्रत की विधि जानने के बाद उस लकड़हारे ने अपनी पत्नी के साथ षटतिला एकादशी का व्रत विधि-विधान से किया और तिल का दान किया। उस गरीब लकड़हारे ने एकादशी व्रत का एक साल तक व्रत किया। जिसके पुण्यफल से वह काशी नगरी का सबसे धनी सेठ बन गया। हे एकादशी माता, जिस प्रकार तुमने उस लकड़हारे की कामना पूरा करते हुए उसे धन दौलत आदि दिया, वैसे ही सभी को देना।
Jan 13, 2026 | 09:30 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी व्रत नियम

षटतिला एकादशी व्रत में तिल का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। व्रती अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं और अन्न का सेवन नहीं करते। पूजा में तिल का उपयोग, विष्णु मंत्रों का जाप और तुलसी अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन तिल, गुड़, कंबल या अन्न का दान करना पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Jan 13, 2026 | 09:00 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी का महत्व

पद्म पुराण और अन्य वैष्णव ग्रंथों के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से पूर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, दरिद्रता, रोग और मानसिक कष्ट दूर होते हैं और भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Jan 13, 2026 | 08:30 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: कल कौन सी एकादशी है ?

कल षटतिला एकादशी का व्रत पड़ रहा है, जो हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र व्रत माना जाता है।
Jan 13, 2026 | 08:00 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी का व्रत किसे करना चाहिए

षटतिला एकादशी का व्रत सभी वर्गों के लिए शुभ माना गया है। यह विशेष रूप से आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों, पितृ दोष या ग्रह दोष से मुक्ति चाहने वालों, आध्यात्मिक उन्नति की कामना रखने वाले भक्तों के लिए फलदायी हो।
Jan 13, 2026 | 07:51 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी के दिन चावल खा सकते हैं?

नहीं, षटतिला एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए। हिंदू मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि पर चावल का सेवन वर्जित माना गया है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि चावल में पाप का अंश होता है और इससे व्रत का फल नष्ट हो जाता है। इस दिन फलाहार, दूध, फल, कंद-मूल, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, तिल से बने पदार्थ आदि का सेवन किया जा सकता है। जो लोग निर्जला व्रत न कर सकें, वे फलाहार या एक समय सात्विक भोजन कर सकते हैं, लेकिन चावल और उनसे बने पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
Jan 13, 2026 | 07:34 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी की पूजा कैसे करें

षटतिला एकादशी की पूजा के लिए इस दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित कर उन्हें तिल मिश्रित जल से स्नान कराएं, फिर पीले वस्त्र, चंदन, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और तिल से बने भोग जैसे तिल के लड्डू या तिलकुट अर्पित करें। इस दिन तिल का दान, तिल से हवन, तिल का सेवन और तिल का उबटन करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है। अंत में भगवान विष्णु से व्रत की सफलता और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें तथा शाम को आरती करके व्रत का पारण करें।
Jan 13, 2026 | 06:15 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी व्रत तोड़ने का सही समय

एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद और पारण काल के भीतर व्रत खोलना चाहिए। समय से पहले या देर से पारण नहीं करना चाहिए।
Jan 13, 2026 | 05:45 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी व्रत में जल कब पिएं?


व्रत में दिनभर आवश्यकता अनुसार जल पी सकते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, लेकिन सामान्य व्रती सुबह स्नान के बाद और दिन में कभी भी जल ग्रहण कर सकते हैं।
Jan 13, 2026 | 05:15 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी व्रत में फलाहार सूची


व्रत में फल, केला, सेब, पपीता, अनार, नारियल पानी, मूंगफली, मखाना, साबूदाना, शकरकंद और दूध से बनी चीजें खा सकते हैं।
Jan 13, 2026 | 04:47 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी व्रत में तिल का दान कैसे करें?


एकादशी के दिन स्नान के बाद काले तिल, तिल का तेल या तिल से बनी चीजें साफ कपड़े में बांधकर किसी जरूरतमंद, ब्राह्मण या गरीब को दान करें। दान करते समय भगवान विष्णु का नाम जरूर लें।
Jan 13, 2026 | 04:25 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी पर गरीबों को दान क्यों किया जाता है?

इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। माना जाता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
Jan 13, 2026 | 03:45 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी पर तुलसी पूजा क्यों जरूरी मानी जाती है?

तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। इस दिन तुलसी पूजन करने से व्रत का फल और अधिक बढ़ जाता है।
Jan 13, 2026 | 03:15 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

यह एकादशी आत्मशुद्धि, त्याग और दान का संदेश देती है। इंसान को लोभ छोड़कर धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
Jan 13, 2026 | 02:39 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी पर तिल का स्नान क्यों किया जाता है?

तिल मिले जल से स्नान करने से शरीर और मन की शुद्धि मानी जाती है। मान्यता है कि इससे पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट होते हैं।
Jan 13, 2026 | 02:18 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी का व्रत कौन रख सकता है?

यह व्रत पुरुष, महिलाएं, वृद्ध और युवा सभी रख सकते हैं। खासतौर पर जिन लोगों पर पितृ दोष या आर्थिक संकट हो, उनके लिए यह व्रत शुभ माना जाता है।
Jan 13, 2026 | 01:27 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी पर किसकी पूजा करें

षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसके साथ ही श्रीकृष्ण (विष्णु के अवतार) की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है, जिसमें तुलसी दल और तिल अर्पित करना विशेष फलदायी होता है।
Jan 13, 2026 | 01:16 PM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी जनवरी 2026 में कब है

षटतिला एकादशी तिथि 13 जनवरी 2026 दोपहर 3:17 बजे से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 शाम 5:52 बजे तक रहेगी। इस तरह षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा।
Jan 13, 2026 | 11:01 AM IST

Shattila Ekadashi 2026 Date Live: षटतिला एकादशी पर क्या बाल धो सकते हैं

षटतिला एकादशी पर बाल धोने का शास्त्रीय निषेध नहीं है, लेकिन परंपरा अनुसार इससे परहेज किया जाता है। यदि आवश्यक हो तो सादे जल या तिल मिले जल से बिना तेल-शैम्पू के स्नान करना उचित माना जाता है।

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