Durva Ganpati Chaturthi 2026 Vrat Katha In Hindi: भगवान गणेश को हिन्दू धर्म में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता का स्थान प्राप्त है, जिनकी कृपा से बड़े से बड़े संकट को दूर किया जा सकता है। वैसे तो रोजाना गणेश जी की पूजा करना शुभ रहता है, लेकिन उन्हें समर्पित व्रत-त्योहार पर बप्पा की पूजा से विशेष लाभ होता है। खासकर, दूर्वा गणपति चतुर्थी पर गणपति बप्पा की उपासना करने से जीवन में आ रही तमाम परेशानियां खत्म होती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को दूर्वा गणपति चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जो कि साल 2026 में आज 16 अगस्त को रखा जा रहा है।
इस दिन गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करने का भी विधान है, जिसके बिना दूर्वा गणपति चतुर्थी की पूजा पूरी नहीं होती है। चलिए अब जानें गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करने से जुड़ी दूर्वा गणपति चतुर्थी व्रत की कथा के बारे में।
दूर्वा गणपति चतुर्थी व्रत की कथा
लोगों को जिंदा जला देता था अनलासुर राक्षस
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नामक एक खूंखार राक्षस था, जिसकी आंखों से आग की लपटें निकलती थीं। अनलासुर को जो व्यक्ति पसंद नहीं था, वो उसे अपनी आंखों से जिंदा जला देता था। आम जनों के अलावा अनलासुर देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों पर भी प्रहार करने लगा था, जिससे परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव के पास जा पहुंचे।
गणेश जी ने निगल लिया अनलासुर को
शिव जी ने बताया कि इस परेशानी से गणेश जी ही आपको बाहर निकाल सकते हैं। इसके बाद सभी देवतागण गणेश जी के पास गए और उन्हें अपनी परेशानी बताई। गणेश जी ने बिना देर किए अनलासुर से युद्ध करने की घोषणा कर दी। जब अनलासुर ने गणेश जी के ऊपर आग बरसाई तो उन्होंने उसे निगल लिया। इससे उसी समय अनलासुर का वध हो गया, लेकिन राक्षस को जिंदा निगलने के कारण गणेश जी के पेट में दिक्कत होने लगी। उन्हें पेट में जलन हो रही थी। साथ ही शरीर गर्म पड़ रहा था।
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बिगड़ती जा रही थी गणेश जी की तबीयत
गणेश जी को परेशान देख इंद्र देव ने उनके शरीर पर चंद्रमा की ठंडी किरणें डालीं, जबकि शिव जी ने अपने गले से नागराज वासुकी को निकालकर उनके पेट पर लपेट दिया। तमाम प्रयास करने के बाद भी गणेश जी के पेट की जलन कम नहीं हो रही थी, बल्कि उनकी तबीयत ओर ज्यादा बिगड़ती जा रही थी।
महर्षि कश्यप ने बताया उपाय
इसके बाद सभी देवतागण महर्षि कश्यप के पास गए और उनसे कोई सुझाव मांगा। महर्षि कश्यप ने अपने हाथों से दूर्वा यानी दूब घास की 21 गांठें बनाईं और उन्हें गणेश जी को खाने को कहा। दूर्वा को खाते ही गणेश जी के पेट की जलन खत्म हो गई और उनकी तबीयत ठीक हो गई।
गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने के लाभ
जिस दिन गणेश जी ने दूर्वा खाई थी, उस दिन श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि थी। इसी के बाद से हर साल इस तिथि पर गणेश जी की पूजा और उन्हें दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करने की परंपरा शुरू हो गई। माना जाता है कि दूर्वा गणपति चतुर्थी के दिन जो भक्त सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करता है और उन्हें दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करता है, उसे अपनी तमाम परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
