अध्यात्म

नवरात्रि साधना क्या है? सद्गुरु से जानें इन 9 दिनों में कैसे करें आध्यात्मिक अभ्यास

Navratri Sadhana: सद्गुरु बताते हैं कि नवरात्रि साधना एक सरल लेकिन असरदार आध्यात्मिक प्रक्रिया है। यह साधना मुख्य रूप से लिंग भैरवी और देवी शक्ति से जुड़ने के लिए बनाई गई है।

Image

क्या होती है नवरात्रि साधना, नौ दिनों तक करने से क्या मिलता है लाभ (Photo: Wikipedia)

नवरात्रि केवल पारंपरिक उत्सव या उपवास का समय नहीं है। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के अनुसार, यह 9 दिनों की अवधि आत्म-रूपांतरण और देवी की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शक्तिशाली अवसर है। सद्गुरु बताते हैं कि नवरात्रि की 9 रातें स्त्री शक्ति के तीन मूलभूत गुणों- तमस (दुर्गा), रजस (लक्ष्मी) और सत्व (सरस्वती) से जुड़ी होती हैं। इस दौरान की जाने वाली विशेष 'नवरात्रि साधना' व्यक्ति के भीतर और आसपास एक ऊर्जावान व समृद्ध वातावरण निर्मित करने में मदद करती है। आइए समझते हैं कि सद्गुरु के अनुसार नवरात्रि साधना क्या है और इन 9 दिनों में इसे कैसे करना चाहिए।

क्या है नवरात्रि साधना?

सद्गुरु बताते हैं कि नवरात्रि साधना एक सरल लेकिन असरदार आध्यात्मिक प्रक्रिया है। यह साधना मुख्य रूप से लिंग भैरवी और देवी शक्ति से जुड़ने के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के साथ ही जीवन में खुशहाली, आंतरिक स्पष्टता और ऊर्जा का विस्तार करना है।

नवरात्रि के 9 दिनों में कैसे करें साधना?

यदि आप नवरात्रि के दौरान इस साधना को अपने घर में करना चाहते हैं, तो सद्गुरु निम्नलिखित मुख्य अभ्यास अपनाने का सुझाव देते हैं:

1. देवी की स्तुति का जाप

घर में देवी लिंग भैरवी के चित्र, गुडी या यंत्र के सामने बैठें। 'जय भैरवी देवी' या 'लिंग भैरवी स्तुति', जिसमें देवी के 33 मंगलकारी नाम शामिल हैं, का जाप करें। इसे नवरात्रि में प्रतिदिन कम से कम 3, 6, 9 या 11 चक्र दोहराने की सलाह दी जाती है। 11 बार जाप करना सबसे उत्तम माना गया है।

2. अर्पण या भोग लगाएं

साधना के दौरान देवी को कुछ न कुछ अर्पित करें। इसमें कोई कड़े नियम नहीं हैं। आप फल, फूल, या घर का बना सात्विक नैवेद्य भी अर्पित कर सकते हैं।

3. लिंग भैरवी आरती

प्रतिदिन कम से कम एक बार पूरे भाव और भक्ति के साथ देवी आरती करें। यह आपके आसपास के माहौल में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाती है।

4. सात्विक आहार और सजगता

हालांकि इस साधना के लिए कोई कठोर भोजन प्रतिबंध नहीं हैं, लेकिन सात्विक भोजन ग्रहण करना मन को शांत और ध्यान केंद्रित रखने में मदद करता है। साधना का समय दिन या रात में अपनी सुविधानुसार चुना जा सकता है।

तीन गुणों के माध्यम से आध्यात्मिक विकास

सद्गुरु के अनुसार, नवरात्रि साधना का असली मकसद हमारे भीतर के तीन गुणों को संतुलित करना है:

प्रथम 3 दिन (दुर्गा / तमस): यह पृथ्वी और जड़ता से जुड़े हैं। यह चरण जीवन में स्थिरता और मजबूती लाता है।

मध्य के 3 दिन (लक्ष्मी / रजस): यह क्रियाशीलता और ऊर्जा से जुड़े हैं। यह चरण जीवन में कर्म और समृद्धि लाता है।

अंतिम 3 दिन (सरस्वती / सत्व): यह ज्ञान और निर्मलता से जुड़े हैं। यह चरण व्यक्ति को सीमाओं से परे जाने और आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूने में मदद करता है।

सद्गुरु कहते हैं कि नवरात्रि के अगले दिन पड़ने वाली विजयादशमी अपनी सीमाओं पर आंतरिक विजय पाने का दिन है। अगर इन 9 रास्तों पर थोड़ी सी साधना और सजगता लाई जाए, तो नवरात्रि की 9 रातें जीवन में एक नया रूपांतरण ला सकती हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article