Durga Stuti Paath: नवरात्रि के समय में साधक मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा- अर्चना करते हैं। नवरात्रि के समय में दुर्गा स्तुति का पाठ करने से साधक की सारी इच्छाओं की पूर्ति होती है। इसके साथ ही मां दुर्गा का आशीर्वाद भी बना रहता है। दुर्गा स्तुति का रचना महर्षि वेदव्यास ने अपनी दिव्य दृष्टि से की थी। नवरात्रि की नवमी पर पूरे विधि-विधान से सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें रूप की पूजा करने से और कन्या पूजन कराने से साधक को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। यहां पढ़ें मां दुर्गा की स्तुति।
Durga Stuti Paath Lyrics (दुर्गा स्तुति पाठ लिरिक्स)
सर्व मंगल मांगल्ए शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ए त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
जय जग जननी आदि भवानी
जय महिषासुर मारिणी मां
उमा रमा गौरी ब्रह्माणी
जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां
हे महालक्ष्मी हे महामाया
तुम में सारा जगत समाया
तीन रूप तीनों गुण धारिणी
तीन काल त्रैलोक बिहारिणी
हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक के
सारे काज संवारिणी माँ
जय जग जननी आदि भवानी
जय महिषासुर मारिणी मां
शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी
चंद्रघंटा कूष्मांडा माँ
स्कंदमाता कात्यायनी माता
शरण तुम्हारी सारा जहां।।
कालरात्रि महागौरी तुम हो
सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां
जय जग जननी आदि भवानी
जय महिषासुर मारिणी माँ
अजा अनादि अनेका एका
आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या
नाम रूप गुण कीर्ति अनंता
गावहिं सदा देव मुनि संता।
अपने साधक सेवक जन पर
सुख यश वैभव वारिणी मां
जय जगजननी आदि भवानी
जय महिषासुर मारिणी मां।।
दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां
भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां
पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी माँ
जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी माँ।
