Difference between Shivratri and Mahashivratri: वैसे तो हर महीने में शिवरात्रि आती है। लेकिन फाल्गुन कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत उपवास रखकर शिव जी की विधि विधान पूजा करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फाल्गुन महीने की शिवरात्रि का ही इतना ज्यादा महत्व क्यों माना जाता है। बता दें इस साल महाशिवरात्रि 8 मार्च को पड़ रही है। इस शुभ अवसर पर जानिए शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर हैं।
शिवरात्रि क्या है (Shivratri Kya Hai)
शिवरात्रि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है। इसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। इस तरह से एक साल में कुल 12 शिवरात्रि पड़ती हैं। कई श्रद्धालु हर महीने की शिवरात्रि को व्रत रखते हैं। शिवरात्रि पर शिवजी की पूजा की जाती है।
महाशिवरात्रि क्या है (Maha Shivratri Kya Hai)
महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुदर्शी को पड़ती है। इस शिवरात्रि को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लग जाता है। इस शिवरात्रि पर शिव-पार्वती पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस शिवरात्रि पर भगवान शिव ने वैराग्य जीवन को त्याग कर माता पार्वती से विवाह किया था। इसलिए ही इस शिवरात्रि पर शिवजी के साथ-साथ माता पार्वती की भी पूजा होती है।
शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर (Difference between Shivratri and Mahashivratri)
जहां मासिक शिवरात्रि में सिर्फ महादेव की पूजा होती है तो वहीं महाशिवरात्रि में महादेव के साथ-साथ माता पार्वती की भी पूजा का विधान है। मासिक शिवरात्रि की पूजा का अर्थ है कि भगवान शिव को अपने मन में बसाकर स्वंय को उनका अंश समझते हुए उनके प्रति अपने को समर्पण करना। तो वहीं महाशिवरात्रि पूजा का अर्थ है अग्नि तत्व को अपने मन में जागृत करना क्योंकि ऐसा माना जाता कि इस दिन महादेव पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। जहां शिवरात्रि के दिन पूजा करने से भगवान शिव की कृपा बरसती है तो वहीं महाशिवरात्रि पर की पूजा से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और हर दुख दूर हो जाता है।
