धनतेरस पर कुबेर देवता, माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे होती है, यहां जानिए स्टेप बाय स्टेप पूरी विधि
धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। कहते हैं इस दिन आयुर्वेद के देव धन्वंतरि जी समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की विशेष परंपरा होती है।
धनतेरस पर कुबेर देवता, माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे होती है, यहां जानिए स्टेप बाय स्टेप पूरी विधि
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धनतेरस पूजा मुहूर्त 2024 (Dhanteras 2024 Puja Muhurat)
धनतेरस का त्योहार इस साल 29 अक्टूबर 2024, मंगलवार को मनाया जा रहा है। धनतेरस पूजा का प्रदोष काल मुहूर्त शाम 05:38 से रात 08:13 बजे तक रहेगा। वहीं वृषभ काल मुहूर्त शाम 06:31 से रात 08:27 बजे तक रहेगा।
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धनतेरस पूजा सामग्री (Dhanteras Puja Samagri List)
भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की तस्वीर, गंगा जल, 13 दिए, दिए में जलाने के लिए एक पैकेट रूई, पूजा के लिए एक थाली, लकड़ी की चौकी, चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पीले रंग के कपड़े, पानी से भरा कलश, घी, माचिस, शक्कर या गुढ़, मौलवी, हल्दी, अक्षत, कपूर, धूप, अगरबत्ती।
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धनतेरस पूजा विधि (Dhanteras Puja Vidhi In Hindi)
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धनतेरस के दिन यम-दीपदान की पूजन विधि (Yama Deepam Pujan Vidhi In Hindi)
यमदीपदान प्रदोष काल में करना चाहिए।
इसके लिए आपको आटे का एक बड़ा सा दीपक लेना है। इसके बाद स्वच्छ रुई लेकर दो लंबी बत्तियां बना लें। ये बत्तियां इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियों के चार मुंह दिखाई दें।
फिर दीपक में तिल का तेल भरें और साथ ही उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें।
प्रदोष काल में दीपक का रोली, अक्षत और पुष्प से पूजन करें। इसके बाद दीपक को घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी -सी खील और गेहूं से ढेरी बनाकर उसके ऊपर दक्षिण दिशा की तरफ रख दें।
इसके बाद ‘ॐ यमदेवाय नमः ’ कहते हुए दक्षिण दिशा में नमस्कार करें ।
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धनतेरस के दिन क्या खरीदें और क्या न खरीदें (Dhanteras Ke Din Kya Kharide Aur Kya Na Kharide)
धनतेरस पूजा विधि मंत्र
धनतेरस पूजा विधि मंत्र
-ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये अमृत कलश हस्ताय सर्व आमय
विनाशनाय त्रिलोक नाथाय श्री महाविष्णुवे नम:||
-ऊँ रं रूद्र रोगनाशाय धन्वन्तर्ये फट्।।”
-ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||
धनतेरस की पूजा का समय
धनतेरस पूजा सामग्री
कौड़ी: धनतेरस के दिन 5 कौड़ी पूजा में रखने के बाद उन्हें घर के 5 स्थानों पर रखा जाता है। ...
मिठाई: भगवान धनवंतरी और कुबेर देव के भोग के लिए मिठाइयां भी घर लेकर आएं।
धनतेरस क्यों मनाया जाता है
dhanteras ke puja kaise karen: धनतेरस की पूजा कैसे करें
धनतेरस पर दिया जलाने की विधि
Dhanteras Mantra: धनतेरस मंत्र
धनतेरस के दिन कितने दीपक जलाने चाहिए
yam deepam time: यम दीपम कब जलाया जाएगा
Dhanteras Par Diya Kha Jalaye: धनतेरस पर दीया कहां जलाएं
धनतेरस पर 13 दीपक जलाने चाहिए। जानिए घर में कहां-कहां रखें ये दीपक...
पहला दीया – घर में पहला दीया दक्षिण कोने में जलाएं जो कि यमराज की दिशा होती है।
दूसरा दीया – घी का दीया जलाकर पूजा घर में ईशान दिशा की ओर देवताओं के सामने रखें, जिसमें आप एक केसर का धागा भी डाल सकते हैं।
तीसरा दीया – अपने परिवार को बुरी नज़र से बचाने के लिए घर के मुख्य द्वार पर दीया जरूर रखें।
चौथा दीया – घर में चौथा दीया तुलसी जी के पास जलाएं
पांचवा दीया – घर की छत को साफ-सुथरा कर वहां पर पांचवा दीया रखने से घर सुरक्षित रहता है।
छठा दीया – सरसों के तेल में जलाये हुए दीये को पीपल के पेड़ के नीचे रखें।
सातवां दीया – धनतेरस के दिन सातवां दीया पड़ोस के किसी भी मंदिर में जला दें।
आठवां दीया – घर में आठवां दीया कूड़े के पास जलाना चाहिए।
नौवां दीया – घर के वॉशरूम के बाहर में दीप जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
दसवां दीया – धनतेरस के दिन दसवां दीया खिड़कियों पर जलाएं।
ग्यारवां दीया – दीये को घर की रसोई में रखने से अन्न और भुखमरी की समस्या नही होती है।
बारहवां दीया – धनतेरस की रात को बेल के वृक्ष के नीचे दीप रखने से घर की संपत्ति में वृद्धि होती हैं।
तेरहवां दीया – अंतिम दीये को अपने घर की तरफ आने वाले चौराहे पर जलाएं।
धनतेरस पूजन का समय
धनतेरस पूजा का मुहूर्त: Dhanteras Puja Muhurat 2024
धनतेरस उपाय: Dhanteras Upay
अगर आप आय और सौभाग्य में वृद्धि पाना चाहते हैं, तो धनतेरस के दिन धनिया की खरीदारी अवश्य ही करें। वहीं, पूजा के समय धन की देवी मां लक्ष्मी को धनिया अर्पित करें। इस उपाय को करने से धन में बढ़ोतरी होती है।
अगर आप आर्थिक तंगी से निजात पाना चाहते हैं, तो धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी को श्रीफल अर्पित करें। पूजा के बाद लाल रंग के वस्त्र में श्रीफल रख घर के मुख्य द्वार पर बांध दें। इस उपाय को करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
अगर आप पैसे की तंगी से निजात पाना चाहते हैं, तो धनतेरस के दिन पूजा के समय मां लक्ष्मी को सफेद कौड़ी अर्पित करें। इस उपाय को करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। उनकी कृपा साधक पर बरसती है। मां लक्ष्मी की कृपा से धन संबंधी परेशानी दूर हो जाती है।
अगर आप सुखों में वृद्धि पाना चाहते हैं, तो धनतेरस के दिन पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को अखंडित चावल से निर्मित खीर अवश्य ही अर्पित करें। इस उपाय को करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
धनतेरस पर कितने दीपक जलाने चाहिए
Maa Laxmi Puja Vidhi: मां लक्ष्मी पूजा विधि
Dhanteras ke puja kaise karen: धनतेरस की पूजा कैसे करें
धन्वंतरि पूजा मंत्र : Dhanvantari Puja Mantra
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥
धनतेरस की पूजा कैसे करते हैं
Dhanvantri Chalisa Lyrics: धन्वंतरि चालीसा लिरिक्स
तुम्हारी महिमा सब जन गावें। सकल साधुजन हिय हरषावे ॥
शाश्वत है आयुर्वेद विज्ञाना। तुम्हरी कृपा से सब जग जाना ॥
कथा अनोखी सुनी प्रकाशा। वेदों में ज्यूँ लिखी ऋषि व्यासा ॥
कुपित भयऊ तब ऋषि दुर्वासा। दीन्हा सब देवन को श्रापा ॥
श्री हीन भये सब तबहि। दर दर भटके हुए दरिद्र हि ॥
सकल मिलत गए ब्रह्मा लोका। ब्रह्म विलोकत भये हुँ अशोका ॥
परम पिता ने युक्ति विचारी। सकल समीप गए त्रिपुरारी ॥
उमापति संग सकल पधारे। रमा पति के चरण पखारे ॥
आपकी माया आप ही जाने। सकल बद्धकर खड़े पयाने ॥
इक उपाय है आप हि बोले। सकल औषध सिंधु में घोंले ॥
क्षीर सिंधु में औषध डारी। तनिक हंसे प्रभु लीला धारी ॥
मंदराचल की मथानी बनाई। दानवो से अगुवाई कराई ॥
देव जनो को पीछे लगाया। तल पृष्ठ को स्वयं हाथ लगाया ॥
मंथन हुआ भयंकर भारी। तब जन्मे प्रभु लीलाधारी ॥
अंश अवतार तब आप ही लीन्हा। धनवंतरि तेहि नामहि दीन्हा ॥
सौम्य चतुर्भुज रूप बनाया। स्तवन सब देवों ने गाया ॥
अमृत कलश लिए एक भुजा। आयुर्वेद औषध कर दूजा ॥
जन्म कथा है बड़ी निराली। सिंधु में उपजे घृत ज्यों मथानी ॥
सकल देवन को दीन्ही कान्ति। अमर वैभव से मिटी अशांति ॥
कल्पवृक्ष के आप है सहोदर। जीव जंतु के आप है सहचर ॥
तुम्हरी कृपा से आरोग्य पावा। सुदृढ़ वपु अरु ज्ञान बढ़ावा ॥
देव भिषक अश्विनी कुमारा। स्तुति करत सब भिषक परिवारा ॥
धर्म अर्थ काम अरु मोक्षा। आरोग्य है सर्वोत्तम शिक्षा ॥
तुम्हरी कृपा से धन्व राजा। बना तपस्वी नर भू राजा ॥
तनय बन धन्व घर आये। अब्ज रूप धन्वंतरि कहलाये ॥
सकल ज्ञान कौशिक ऋषि पाये। कौशिक पौत्र सुश्रुत कहलाये ॥
आठ अंग में किया विभाजन। विविध रूप में गावें सज्जन ॥
अथर्व वेद से विग्रह कीन्हा। आयुर्वेद नाम तेहि दीन्हा ॥
काय ,बाल, ग्रह, उर्ध्वांग चिकित्सा। शल्य, जरा, दृष्ट्र, वाजी सा ॥
माधव निदान, चरक चिकित्सा। कश्यप बाल , शल्य सुश्रुता ॥
जय अष्टांग जय चरक संहिता। जय माधव जय सुश्रुत संहिता ॥
आप है सब रोगों के शत्रु। उदर नेत्र मष्तिक अरु जत्रु ॥
सकल औषध में है व्यापी। भिषक मित्र आतुर के साथी ॥
विश्वामित्र ब्रह्म ऋषि ज्ञान। सकल औषध ज्ञान बखानि ॥
भारद्वाज ऋषि ने भी गाया। सकल ज्ञान शिष्यों को सुनाया ॥
काय चिकित्सा बनी एक शाखा। जग में फहरी शल्य पताका ॥
कौशिक कुल में जन्मा दासा। भिषकवर नाम वेद प्रकाशा ॥
धन्वंतरि का लिखा चालीसा। नित्य गावे होवे वाजी सा ॥
जो कोई इसको नित्य ध्यावे। बल वैभव सम्पन्न तन पावें ॥
॥ दोहा ॥
रोग शोक सन्ताप हरण, अमृत कलश लिए हाथ।
जरा व्याधि मद लोभ मोह, हरण करो भिषक नाथ ॥
