Dat Kali Mandir Dehradun History : देवभूमि उत्तराखंड अपने प्राचीन और चमत्कारी मंदिरों के लिए जानी जाती है। इन्हीं में से एक है डाट काली मंदिर (dat kali mandir), जो इन दिनों खास चर्चा में है। इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करना है। दरअसल, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लोकार्पण से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मां डाट काली के दरबार में मत्था टेका और करीब 10 मिनट तक विधि-विधान से पूजा की। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था और मान्यता का प्रमाण है। माना जाता है कि लोग नया वाहन लेने के बाद इस मंदिर से चुनरी जरूर बंधवाते हैं। ऐसा करने से मां खुद वाहनों की रक्षा करती हैं।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित है ये अनोखा मंदिर
डाट काली मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह मंदिर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित है। यानी इसका एक हिस्सा यूपी में आता है तो दूसरा उत्तराखंड में आता है। शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसा यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि एक अलग ही शांति और सुकून का अनुभव करते हैं।
220 साल से जल रही है अखंड ज्योति
इस मंदिर का इतिहास करीब 220 साल पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि साल 1804 में यहां मंदिर निर्माण के दौरान अखंड ज्योति और हवन कुंड प्रज्वलित किया गया था, जो आज तक लगातार जल रहा है। मंदिर के महंतों के अनुसार, इसका प्राचीन नाम ‘मां घाटे वाली देवी’ था, लेकिन जब यहां सुरंग (डाट) का निर्माण हुआ, तब से इसका नाम डाट काली मंदिर पड़ गया।
चमत्कारिक है यह सिद्धपीठ
डाट काली मंदिर एक सिद्धपीठ है। मान्यता है कि जब अंग्रेज टनल का निर्माण करा रहे थे तब काम में बार-बार बाधा आ रही थी। एक रात निर्माण कार्य में लगे इंजीनियर को सपने में मां काली आईं। उनके कहने पर ही साल 1804 में पिंडी को स्थापित किया गया था। कुछ लोगों का ऐसा मानना भी है कि मान्यता है कि यहां मां सती के शरीर का एक हिस्सा गिरा था, जिसके कारण यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है। यही वजह है कि रोजाना हजारों लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि नवरात्र जैसे खास अवसरों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
नए काम और नए वाहन की यहीं से होती है शुरुआत
इस मंदिर से जुड़ी एक खास परंपरा यह भी है कि लोग किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले यहां आशीर्वाद लेने जरूर आते हैं। खासकर देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में नए वाहन खरीदने के बाद डाट काली मंदिर में पूजा करवाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा नवविवाहित जोड़े भी अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत मां के आशीर्वाद से करते हैं, ताकि उनका जीवन सुख-समृद्धि से भरा रहे।
पीएम मोदी ने किया पूजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लोकार्पण से पहले मां डाट काली का आशीर्वाद लिया।यह कॉरिडोर करीब 11,963 करोड़ रुपये की लागत से बना है और 210 किलोमीटर लंबा है, जो दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा को और आसान बनाएगा।
जानिए मई में पूर्णिमा कब है 2026। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|
