अध्यात्म

छठ में कोसी कैसे भरी जाती है? बिहार में कोसी कैसे भरते हैं, जानें कोसी भरने की पूरी विधि

Kosi Kaise Bhara Jata Hai (कोसी कैसे भरी जाती है): छठ पूजा का आज तीसरा दिन है और आज के दिन शाम के समय में अर्घ्य के बाद कोसी भरी जाती है। कोसी भरने की पूरी विधि होती है, जिसका पालन करना जरूरी है। यहां से आप कोसी भरने का तरीका जान सकते हैं।

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कोसी कैसे भरी जाती है (pic credit: canva)

Kosi Kaise Bhara Jata Hai (कोसी कैसे भरी जाती है): कोई भी मनोकामना पूरी होने के बाद छठी मइया को आभार व्यक्त करने के लिए छठ पूजा में कोसी भरा जाता है। ये सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु के लिए भी भरा जाता है। कोसी में जब दीयों की लौ टिमटिमाती है तब घर और भी खूबसूरत नजर आता है। यहां हम आपको कोसी भरने का तरीका बता रहे हैं। यहां छठ में कोसी भरने की पूरी विधि के बारे में विस्तार से बताया गया है। साथ ही कोसी में लगने वाले सामान की लिस्ट भी दी गई है।

कोसी भरने का सामान-

  • मिट्टी के बर्तन (कोसी)
  • ढकनी
  • दीपक
  • गन्ना
  • गमछा
  • ठेकुआ
  • खजूर
  • पूरी
  • फल (सेव, नारंगी, अमरूद, केला आदि)
  • सिंदूर
  • हल्दी
  • अक्षत
  • अन्न (गेंहू, चावल, दाल)
  • मूली

छठ पूजा में कोसी कैसे भरते हैं?

छठ पूजा में कोसी भरना एक पवित्र अनुष्ठान है, जिसे मुख्य रूप से महिलाएं करती हैं। सबसे पहले बांस या लकड़ी के सुप को साफ करके नीचे कपड़ा या पत्ते बिछाए जाते हैं। इसके बाद गेहूं या चावल डालकर समृद्धि का प्रतीक बनाया जाता है। जहां कोसी भरना है वहां चौकी पुरते हैं फिर गन्ने को बांधकर चौकी पर घेरते हैं। अब मिट्टी के बर्तन में गेहूं या चावल रखें। फिर इसमें फल और ठेकुआ रखें। फिर इसपर सिंदूर लगाएँ। इसके बाद ढकनी लगाकर ऊपर दीपक जलाकर रखें। अब मिट्टी के बर्तन वाली कोसी को गन्ने के घेरे में रखें। फिर टोकरी में फल (केला, नारियल, अमरूद, गन्ना आदि), ठेकुआ, दीपक, और सिंदूर या हल्दी सजाए जाते हैं। कभी-कभी इसमें साड़ी या छोटी वस्तुएं भी रखी जाती हैं। कोसी भरते समय महिलाएं छठ के गीत गाती हैं। कोसी के आगे हमेशा किसी का रहना जरूरी होता है और कोसी वाले दिन सोया नहीं जाता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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