अध्यात्म

Chhath Puja Kosi Geet: कोसी भरे चलाली गौरा देवी.. छठ पूजा कोसी गीत लिरिक्स, देखें बिहार के कोसी भराई गीत यहां

Chhath Puja Kosi Geet (छठ पूजा कोसी गीत): छठ पूजा का आज आखिरी दिन है और आज उषा अर्घ्य दिया जा रहा है। आज घाट पर कोसी भरी जाती है। इस समय छठ के गीत जरूर गाए जाते हैं। छठ गीत- कोसी भरे चलाली गौरा देवी.. के लिरिक्स आप यहां से देख सकते हैं।

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छठ पूजा कोसी भराई गीत (pic credit: canva)

Chhath Puja Kosi Geet (छठ पूजा कोसी गीत): इन दिनों पूरा उत्तर भारत में छठ के गीत सुनाई दे रहे हैं। ये गीत मन को शांत करते हैं और व्रती महिलाओं को शक्ति देते हैं। छठ के गीत में छठ माता की महिमा का वर्णन होता है। आज छठ का चौथा यानी आखिरी दिन है और आज उषा अर्घ्य के बाद घाट पर कोसी भरने की परंपरा है। कोसी भरते हुए भी छठ के गीत गुनगुनाए जाते हैं। यहां से आप छठ पूजा कोसी गीत के लिरिक्स देख सकते हैं। इन लिरिक्स को देखकर आप गीत गा भी सकते हैं।

कोसी भरे के गीत (Koshi Geet Lyrics)-

चननि ताने चलले महादेव

घुटी भर धोती भीजे

घुटी भर धोती भीजे

भीजता त धोती मोरा भीजे देहु

चननि मोर नहीं भीजे

चननि मोर नहीं भीजे

चननि मोर नहीं भीजे

कोसी भरे चलली गौरा देइ

सवा लाख के साडी भीजे

सवा लाख के साडी भीजे

भीजता ता साडी मोरा भीजे देहु

कोसी मोर नाही भीजे

कोसी मोर नाही भीजे

कोसी मोर नाही भीजे

गरजी गरजी देव रिमझिम बरसे

पनिया के बूँद टपके पगिया ऊपर से

गरजी गरजी देव रिमझिम बरसे

पनिया के बूँद टपके पगिया ऊपर से

चङनि तान चलले धर्मेन्दर सेवका

घुटी भर धोती भीजे

घुटी भर धोती भीजे

भीजता त धोती मोर् भीजे देहु

चङनि मोरा नाही भीजे

चङनि मोरा नाही भीजे

चङनि मोरा नाही भीजे

धन धन बाटे मोरा अँगना के भाग हो

दुलारी छठी मैय्या आइल बाड़ी आज हो

धन धन बाटे मोरा अँगना के भाग हो

दुलारी छठी मैय्या आइल बाड़ी आज हो

ता कोसी भरे चलली अमिता देइ

नौलखा हार भीजे

नौलखा हार भीजे

अ भीजता ता हार मोरा भीजे देहु

कोसी मोरा नहीं भीजे

कोसी मोरा नहीं भीजे

कोसी मोरा नहीं भीजे

छोटकी बलकावा के माई रक्षा करिहैं

बरती केवईयां के अन्धन से भरिहैं

नन्हका बलकावा के माई रक्षा करीहें

बरती केवईयां के अन्धन से भरिहैं

ता चङनि तान चलले पंकज सेवका

घुटी भर धोती भीजे

घुटी भर धोती भीजे

के भीजता त धोती मोर् भीजे देहु

चननी मोर नहीं भीजे

चननी मोर नहीं भीजे

चननी मोर नहीं भीजे

कोसी भरे चलली अंजानो देइ

सवा लाख के साडी भीजे

सवा लाख के साडी भीजे

के भीजता ता साडी मोरा भीजे देहु

कोसी मोरा नहीं भीजे

कोसी मोरा नहीं भीजे

कोसी मोरा नहीं भीजे

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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