अध्यात्म

छठ मैया की आरती, Chhath Mata ki Aarti 2025: छठ मैया की आरती, ॐ जय छठी माता आरती लिरिक्स हिंदी में

Chhath Mata ki Aarti Lyrics in Hindi (छठ मैया की आरती) 2025: आज छठ पूजा के आखिरी दिन जब उषा अर्घ्य दिया जाएगा तो छठ माता की आरती भी की जाएगी। घाट की कोसी से समय भी आरती करने का विधान है। यहां से आप छठ माता की आरती के लिरिक्स देख सकते हैं।

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छठ माता की आरती (pic credit: canva)

Chhath Mata ki Aarti Lyrics in Hindi (छठ मैया की आरती) 2025: छठ महापर्व में छठी मैया और सूर्य देव की उपासना की जाती है। चार दिन के इस व्रत में छठ माता की पूरे विधि-विधान से साथ पूजा होती है। आरती के बिना ये पूजा अधूरी मानी जाती है। छठ माता की पूजा के बाद आरती जरूर करनी चाहिए। यहां से आप छठी मैया की आरती के लिरिक्स देख सकते हैं। ऊं जय छठी माता आरती... लिखित रूप से यहां मौजूद है।

छठ मईया की आरती (Chhathi Maiya Ki Aarti)-

ॐ जय छठी माता,

मैया जय छठी माता, तुम संतन हितकारी, टूटे न ये नाता।।

ॐ जय छठी माता कार्तिक षष्ठी को मैया,

व्रत तेरा आता, निर्जला व्रत जो रखता, फल उत्तम पाता।।

ॐ जय छठी माता चतुर्थी के दिन पावन, नहाय खाय आता,

बाद दिवस जो आये, खरना कहलाता।।

ॐ जय छठी माता ठेकुआ, नारियल, फल से सूप भरा जाता,

डलिया माथे सजाके, घाट पे जग जाता।।

ॐ जय छठी माता संध्या को जल में खड़े हो,

अर्घ्य दिया जाता, प्रात अर्घ्य से छठ व्रत, संपन्न हो जाता।।

ॐ जय छठी माता छठी मैया की आरती जो कोई नर गाता,

मैया जो कोई जन गाता, दुःख दारिद्रय हैं मिटते, संकट टल जाता।।

ॐ जय छठी माता ॐ जय छठी माता, जय जय छठी माता,

तुम संतन हितकारी, टूटे न ये नाता।।

बोलिये छठी मैया की जय

जे केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए आरती लिरिक्स

जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

ऊ जे नारियर जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

अमरुदवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

शरीफवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

सभे फलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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