अध्यात्म

क्या है चातुर्मास? देवशयनी एकादशी पर क्यों सो जाते हैं श्री हरि? जानिए कथा और 2026 की सही तिथि

Chaturmas And ​Devshayani Ekadashi 2026:​ चातुर्मास क्या होता है? चातुर्मास और देवशयनी एकादशी का क्या संबंध है? चातुर्मास में श्रीहरि क्यों विश्राम करते हैं? क्या आपके मन में भी ऐसे ही सवाल हैं? यदि हां, तो आइए ज्योतिष एवं वास्तु विज्ञान विशेषज्ञ सुजीत जी महाराज से जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब।

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देवशयनी एकादशी 2026 में कब है?

Devshayani Ekadashi 2026: भगवान विष्णु के भक्तों के लिए वैसे तो साल में आने वाली प्रत्येक एकादशी का खास महत्व है, लेकिन देवशयनी एकादशी को अति महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और 4 महीने बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इन 4 महीनों को ही चातुर्मास कहा जाता है, जिस समय किसी भी तरह के शुभ कार्य को करने से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही कीमती चीजों की खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता है।

चलिए ज्योतिष और वास्तु विज्ञान एक्सपर्ट सुजीत जी महाराज से जानें देवशयनी एकादशी के महत्व और 2026 की सही तिथि व शुभ मुहूर्त के बारे में।

देवशयनी एकादशी पर क्यों सो जाते हैं श्री हरि?

चातुर्मास के पहले दिन यानी देवशयनी एकादशी पर श्री हरि विष्णु के विश्राम करने से जुड़ी कई कथाएं हैं।
  • पहली कथा-
पद्म पुराण के अनुसार, त्रेतायुग में असुर नामक राजा बलि था, जिसकी दानशीलता से विष्णु जी बहुत खुश हुए थे। उन्होंने वामन रूप धारण किया और राजा बलि से दान मांगा, जिसके बदले में उनसे भी कुछ मांगने को कहा। राजा बलि ने विष्णु जी से अपने साथ पाताल लोक में रहने का वचन मांगा था, जिसे वो मना नहीं कर पाए। करीब 4 महीने तक विष्णु जी त्रेतायुग में पाताल लोक में राजा बलि के साथ रहे, लेकिन दूसरी तरफ मां लक्ष्मी विष्णु जी के लिए परेशान हो रही थीं।

ऐसे में उन्होंने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा और विष्णु जी को पाताल लोक से मुक्त कराने का वचन ले लिया। देवउठनी एकादशी के दिन विष्णु जी अपने वचन से मुक्त हो गए और विष्णु लोक वापस चले गए, लेकिन उन्होंने राजा बलि को वचन दिया कि वो हर साल आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तक उनके साथ पाताल लोक में ही निवास करेंगे। बता दें कि विष्णु जी के पाताल लोक जाने के समय को ही चातुर्मास कहा जाता है।

  • दूसरी कथा-
सतयुग में भगवान विष्णु का शंखचूड़ नामक असुर से युद्ध हुआ था, जिसके बाद वो काफी थक गए थे। कहा जाता है कि देवताओं ने खुद विष्णु जी से इस युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद विश्राम करने का निवेदन किया था, जिसके बाद वो चार प्रहर की अवधि के लिए शयन काल में चले गए थे। बता दें कि ये चार प्रहर पृथ्वी लोक के चार महीने के बराबर थे।

देवशयनी एकादशी 2026 में कब है?

हर साल आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार 24 जुलाई 2026 की सुबह 09 बजकर 12 मिनट से आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ हो रहा है, जो कि अगले दिन 25 जुलाई की सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026, शनिवार को मनाई जाएगी, जिस दिन से चातुर्मास भी शुरू होगा।

देवशयनी एकादशी के दिन के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:16 से सुबह 04:57 तक
  • प्रातः संध्या: सुबह 04:36 से सुबह 05:38 तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 से दोपहर 12:55 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:44 से दोपहर 03:38 तक
  • अमृत काल: रात 09:41 से रात 11:29 तक
  • सायाह्न संध्या: शाम 07:17 से रात 08:19 तक
  • निशिता मुहूर्त: रात 12:07 से रात 12:49 (26 जुलाई) तक
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डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।

Nidhi Jain
निधि जैनauthor

निधि जैन Times Now नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के तौर पर जुड़ी हैं। इन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 साल से ज्यादा का अनुभव है। पढ़ने और लिखने के प्रति इनकी रुचि ही इन्हें जर्नलिज्म की ओर लेकर आई। निधि अब तक हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर 4,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुकी हैं।

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