Chardham Yatra 2024: इस साल चारधाम की यात्रा की शुरुआत 10 मई को होगी। इसी दिन अक्षय तृतीया का पर्व भी मनाया जाएगा। 10 मई को गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारानाथ के कपाट खुलेंगे। वहीं 12 मई को बद्रीनाथ के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। चारधाम में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारानाथ और बद्रीनाथ आते हैं। ये चारधान यात्रा करीब 1200 वर्षों से चली आ रही है। चारधाम की यात्रा के लिए 15 अप्रैल से 3 मई तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हुए हैं। चारधाम की यात्रा की हर साल लाखों श्रद्धालु जाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं चारधाम यात्रा का महत्व।
साल 2024 में कब से शुरू है चारधाम यात्रा
इस साल चारधाम की यात्रा की शुरुआत 10 मई से हो रही है। 10 मई को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री,यमुनोत्री पर केदारनाथ के द्वार खुलेंगे। वहीं 12 मई को बद्रीनाथ के पट खुल जाएंगे। चारधाम की यात्रा करने से व्यक्ति का मन प्रफुल्लित हो जाता है और उसकी इच्छाओं की पूर्ति होती है।चारधाम यात्रा के नाम और महत्व
गंगोत्री धाम
चारधाम का पहला स्थान गंगोत्री है। यहां मां गंगा की पूजा की जाती है। गंगोत्री को गोमुख के नाम से भी जाना जाता है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी के गढ़वाल में क्षेत्र में स्थित है। ये पवित्र नदी गंगा का मुख्य स्रोत माना जाता है।
यमुनोत्री
यमुनोत्री पवित्र नदी यमुना का मुख्य स्त्रोत माना जाता है। यह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गढ़वाल में है। यमुना की पवित्र नदी में स्नान करके लोग अपने तन और मन को शुद्ध करते हैं।
केदारनाथ
चार धाम यात्रा का तीसरा स्थान केदारानाथ है। यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। ये 12 ज्योर्तिलिंग में से एक है। वहां भगवान शिव शिवलिंग रूप में विराजमान हैं। केदारनाथ मंदिर के दर्शन के लिए लोगों को 16 किलोमीटर यात्रा करनी पड़ती है।
बद्रीनाथ धाम
चारधाम यात्रा का चौथा पड़ाव बद्रीनाथ है। इसी पड़ाव पर चारधाम यात्रा का समापन होता है। बद्रीनाथ उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यहां पर भगवान विष्णु का मंदिर विराजमान हैं।
