Chandra Grahan 2026 Bhajan : साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च, मंगलवार को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लग रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ग्रहण के समय भगवान का नाम लेने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। आइए जानते हैं वे 5 प्रसिद्ध भजन, जिन्हें चंद्र ग्रहण के दौरान सुनने और गाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
1.मैंने सारे सहारे छोड़ दिए
मैंने सारे सहारे छोड़ दिए
बस तेरा सहारा काफी है
मुझे चाह नहीं दुनिया भर की
बस तेरा नजारा काफी है
मैंने सारे सहारे छोड़ दिए
बस तेरा सहारा काफी है।।
तेरी चाहत में जग छूट गया
पर तू मुझसे क्यों रूठ गया
मैं डूब रहा भव सागर में
मैं डूब रहा भव सागर में
बस आना तुम्हारा बाकी है
मैंने सारे सहारे छोड़ दिए
बस तेरा सहारा काफी है।।
मैंने जबसे तुम्हारा नाम लिया
इस जग ने बहुत इल्जाम दिया
जब तूने मुझे यूँ थाम लिया
जब तूने मुझे यूँ थाम लिया
बस मेरा गुजारा काफी है
मैंने सारे सहारे छोड़ दिए
बस तेरा सहारा काफी है।।
मैंने तेरे लिए ही जोग लिया
और छोड़ जगत का भोग दिया
रो रो के बुलाना काम मेरा
रो रो के बुलाना काम मेरा
बस आना तुम्हारा बाकी है
मैंने सारे सहारे छोड़ दिए
बस तेरा सहारा काफी है।।
मैंने सारे सहारे छोड़ दिए
बस तेरा सहारा काफी है
मुझे चाह नहीं दुनिया भर की
बस तेरा नजारा काफी है
मैंने सारे सहारे छोड़ दिए
बस तेरा सहारा काफी है।
2.मांगने की आदत जाती नहीं
जैसा चाहो मुझको समझना,
बस इतना ही तुमसे कहना..
मांगने की आदत जाती नहीं,
तेरे आगे लाज मुझे आती नहीं..
बड़े बड़े पैसेवाले भी तेरे द्वारे आते हैं,
मुझको हैं मालुम की वो भी
तुझसे मांग के खाते हैं..
देने में तु घबराता नहीं,
तेरे आगे लाज मुझे आती नहीं..
तुमसे दादा शरम करू तो
और कहां मैं जाऊंगा,
अपने इस परिवार का खर्चा
बोल कहां से लाऊंगा..
दुनिया तो बिगड़ी बनाती नहीं,
तेरे आगे लाज मुझे आती नहीं..
तु ही कर्ता मेरी चिंता,
खुब गुजारा चलता हैं,
कहे 'पवन' की तुझसे ज्यादा
कोई नहीं कर सकता हैं..
झोली हर कही फैलाई जाती नहीं,
झोली हर कही फैलाई जाती नहीं..
तेरे आगे लाज मुझे आती नहीं..
जैसा चाहो, मुझको समझना,
बस इतना ही तुमसे कहना..
मांगने की आदत जाती नहीं,
तेरे आगे लाज मुझे आती नहीं..
3.रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने,
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है,
जो पेड़ हमने लगाया पहले,
उसी का फल हम अब पा रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
इसी धरा से शरीर पाए,
इसी धरा में फिर सब समाए,
है सत्य नियम यही धरा का,
है सत्य नियम यही धरा का,
एक आ रहे है एक जा रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
जिन्होने भेजा जगत में जाना,
तय कर दिया लौट के फिर से आना,
जो भेजने वाले है यहाँ पे,
जो भेजने वाले है यहाँ पे,
वही तो वापस बुला रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
बैठे है जो धान की बालियो में,
समाए मेहंदी की लालियो में,
हर डाल हर पत्ते में समाकर,
हर डाल हर पत्ते में समाकर,
गुल रंग बिरंगे खिला रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है,
जो पेड़ हमने लगाया पहले,
उसी का फल हम अब पा रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।
4.इतनी कृपा सांवरे बनाए रखना
इतनी किरपा सांवरे बनाये रखना
मरते दम तक सेवा में लगाये रखना
मैं तेरा तू मेरा कान्हा, तू राजी मैं राजी,
तेरे नाम पे लिख दी मैंने, इस जीवन की बाजी
लाज तुम्हारे हाथ है बचाए रखना,
मरते दम तक सेवा में लगाये रखना
इतनी किरपा सांवरे बनाये रखना
हाथ जोड़ मैं करूं प्रार्थना, भूल कभी ना जाना,
तेरे दर पे बना रहे बस, मेरा आना जाना
दिन पे दिन ये सिलसिला बढ़ाये रखना,
मरते दम तक सेवा में लगाये रखना
इतनी किरपा सांवरे बनाये रखना
तेरे प्रेमियों में मन लगता,और कही ना लागे,
फीका फीका ये जग सारा, भजन भाव के आगे
भजनों की इस भूख को जगाए रखना,
मरते दम तक सेवा में लगाये रखना
इतनी किरपा सांवरे बनाये रखना
जनम जनम तक तेरा मेरा, साथ कभी ना छूटे,
टूट जाए सांसों की लड़िया, तार कभी ना टूटे
गोदी में इस दास को बिठाए रखना,
मरते दम तक सेवा में लगाये रखना
इतनी किरपा सांवरे बनाये रखना
इतनी किरपा सांवरे बनाये रखना
मरते दम तक सेवा में लगाये रखना
5.पता नहीं किस रूप मे आकर नारायण मिल जाएगा
पता नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
पता नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
पता नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
सांस रुकी तेरे दर्शन को, न दुनिया में मेरा लगता है
शबरी बांके बैठा हूं मेरा श्री राम में अटका मन
बेकार मेरे दिल को मैं कितना भी समझा लूं
राम दरस के बाद दिल चोरेगा ये धड़कन
काले युग प्राणि हूं पर जीता हूं मैं त्रेता युग
कर्ता हूं महसुस पलों को माना न वो देखा युग
देगा युग कलि का ये पापोन के उपहार का
चांद मेरा पर गाने का हर प्राण को देगा सुख
हरि कथा का वक्त हूं मैं, राम भजन की आदत
राम आभारी शायर, मिल जो राही है दावत
हरि कथा सुना के मैं चोर तुम्हें कल जाउंगा
बाद मेरे न गिरने न देना हरि कथा विरासतत
पाने को दीदार प्रभु के नैन बड़े ये तरस है
जान सके ना कोई वेदना रातों को ये बरसे है
किसे पता किस मौके पे, किस भूमि पे, किस कोने में
मेले में या वीराने में श्री हरि हमें दर्शन दे
पता नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
पता नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
पता नहीं किस रूप में आकार
इंतजार में बैठा हूं कब बीतेगा ये काला युग
बीतेगी ये पीडा और भारी दिल के सारे दुख
मिलने को हूं बेकार पर पाप का मैं भागी भी
नाज़रीन मेरी आगे तेरे श्री हरि जाएगी झुक
राम नाम से जुड़े हैं ऐसे खुद से भी ना मिल पाए
कोई ना जाने किस चेहरे में राम हमें कल मिल जाए
वैसे तो मेरे दिल में हो पर आंखें प्यासी दर्शन की
शाम, सवेरे सारे मौसम राम गीत ही दिल गए
रघुवीर ये वींटी है तुम दूर करो अंधेरों को
दूर करो परेशानी के सारे भुखे शेरों को
शबरी बांके बैठा पर काले युग का प्राण हूं
मैं जूता भी ना कर दूंगा पापी मुह से बेरो को
बन चुका बैरागी दिल, नाम तेरा ही लेता है
शायर अपनी सांसें ये राम सिया को देता है
और नहीं इच्छा है अब जीने की मेरी राम यहां
बाद मुझे मेरी मौत के बस ले जाना तुम त्रेता में
शायद तुम्हे यह भी अच्छा लगे
written by- Gaurangi yadav
