Chaitra Navratri Katha, Maa Durga Birth Story: चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि की विधि विधान पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार चैत्र नवरात्रि में ही दैत्यराज महिषासुर का वध करने के लिए मां दुर्गा का अवतरण हुआ था। इसलिए ही साल में आने वाली सभी नवरात्रि में इस नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। अब जानते हैं चैत्र नवरात्रि की पावन व्रत कथा।
चैत्र नवरात्रि व्रत कथा (Chaitra Navratri Vrat Katha)
नवरात्रि का व्रत रखने वाले लोगों को मां दुर्गा के अवतरण की ये पावन कथा जरूर पढ़नी चाहिए। मान्यता है इस कथा को पढ़ने से नवरात्रि व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाता है।
माता रानी की कथा (Mata Rani Ki Katha)
चैत्र नवरात्रि की पौराणिक कथा अनुसार ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर दैत्यराज महिषासुर ने नरक का विस्तार स्वर्ग तक कर लिया था। दानवों के बढ़ते दुराचार की वजह से देवी-देवता भी परेशान हो गए थे। एक समय ऐसा भी आया जब महिषासुर और उसकी सेना ने देवताओं के राजा इंद्र की सेना पर भी विजय प्राप्त कर ली थी और देवराज इंद्र के सिंहासन पर अपना हक जमा लिया था।
महिषासुर के इस दुस्साहस के कारण भगवान शंकर और भगवान विष्णु को क्रोध आ गया और तब महिषासुर का अंत करने के लिए देवी शक्ति के जन्म पर विचार किया गया। सभी सभी देवी-देवताओं ने महिषासुर का वध करने के लिए अपने तेज से एक अत्यंत ही ताकतवर देवी को उत्पन्न किया।
सभी देवी-देवताओं ने अपने शस्त्र देवी को समर्पित किए और देवी महिषासुर का वध करने के लिए चल दीं। देवी के भव्य स्वरूप को देखकर महिषासुर भयभीत हो गया था। महिषासुर ने देवी को परास्त करने के लिए अपनी सेना भेजी लेकिन देवी ने महिषासुर द्वारा भेजे गए सभी असुरों का अंत कर दिया। इसके बाद महिषासुर खुद युद्ध भूमि में आया। देवी और महिषासुर की लड़ाई नौ दिन तक चली और आखिर में महिषासुर मारा गया। माता ने महिषासुर का वध नवरात्रि के नौवें दिन किया। कहते हैं इसलिए ही चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।
