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Chaiti Chhath Puja Samagri: चैती छठ पूजा में क्या-क्या सामान लगेगा, नोट कर लें पूजा सामग्री लिस्ट

Chaiti Chhath Puja Samagri (चैती छठ पूजा सामग्री): इस साल चैती छठ का महापर्व 1 से 4 अप्रैल तक मनाया जाएगा। इस दौरान महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। चलिए आपको बताते हैं चैती छठ पूजा में क्या-क्या सामान लगेगा।

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Chaiti Chhath Puja Samagri

Chaiti Chhath Puja Samagri (चैती छठ पूजा सामग्री): चैती छठ का महापर्व नवरात्रि के चौथे दिन से शुरू होता है और इसकी समाप्ति सातवें नवरात्र के दिन होती है। इस पर्व के रीति-रिवाज कार्तिक महीने में आने वाली छठ की तरह ही होते हैं। इस दौरान महिलाएं डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं और 36 घंटो का निर्जला व्रत रखती हैं। चलिए आपको बताते हैं चैती छठ पूजा में किन-किन सामग्रियों की जरूरत होती है।

चैती छठ पूजा सामग्री (Chaiti Chhath Puja Samagri)

  • थाली
  • दीपक
  • खाजा
  • गुजिया
  • गुड़
  • अदरक का पौधा
  • चावल
  • आटा
  • जल
  • शहद
  • गंगाजल
  • चंदन
  • चावल
  • सिंदूर
  • धुपबत्ती
  • कुमकुम
  • कपूर
  • मिट्टी के दीए
  • बांस या पीतल का सूप
  • दूध और जल के लिए गिलास
  • चम्मच
  • लड्डू
  • हल्दी
  • नाशपाती
  • पत्ते लगे हुए ईख
  • दूध
  • तेल और बाती
  • नारियल
  • ऋतुफल
  • कलावा
  • सुपारी
  • फूल और माला
  • शरीफा
  • दूध से बनी मिठाइयां
  • बड़ा वाला नींबू
  • सिंघाड़ा
  • सुथनी
  • शकरकंदी
  • मूली
  • बैंगन
  • केले
  • गेहूं
  • सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे का कलश
  • बड़ी टोकरी

चैती छठ पर्व कैसे मनाया जाता है (Chaiti Chhath Kaise Manaya Jata Hai)

छठ पूजा के दौरान व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं। ये उपवास संतान की लंबी आयु की कामना और घर की खुशहाली के लिए रखा जाता है।इस दौरान व्रती भगवान सूर्यदेव की आराधना करती हैं। संध्या अर्घ्य के दिन भगवान सूर्य को अस्त होते हुए अर्घ्य दिया जाता है तो वहीं इसके अगले दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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