Budh Vakri: ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत ग्रहों के राजकुमान बुध ग्रह को बुद्धि , वाणी, व्यापार का कारक माना जाता है। जिस जातक की कुंडली में बुध की स्थिति मजबूत होती है। वो लोग व्यापार और संचार के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ते हैं। बुध के मजबूत होने से जातक को लाभ की प्राप्ति होती है। ज्योतिष गणना के अनुसार किसी भी ग्रह का वक्री होना हर राशि के जातक पर अलग- अलग असर डालता है। बुध का वक्री होना भी पर राशि के जातक पर अलग- अलग प्रभाव डालता है। बुध व्रकी होने का मतलब होता है कि बुध ग्रह उल्टी चाल चलने लगते हैं। आइए जानें बुध ग्रह का वक्री होना शुभ होता है या अशुभ।
बुध का व्रकी होना शुभ या अशुभ
बुध के व्रकी का असर हर राशि के जातक पर अलग असर होता है। कुछ जातक की कुंडली में बुध की वक्री दशा शुभता लेकर आती है। वहीं कुछ लोगों के लिए बुध का वक्री होना अशुभ माना जाता है। बुध ग्रह के वक्री होने से व्यवहार में परिवर्तन होने लगता है। वक्री बुध का असर व्यक्ति के वाणी पर अधिक पड़ता है। इस समय में यदि आप कुछ बोलना चाहते हैं तो आप ठीक से अपनी बात नहीं रख पाते हैं। बुध व्रकी के समय में लोगों के विचार में भिन्नता देखी जा सकती है।
बुध ग्रह के वक्री अवस्था का प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह के व्रकी अवस्था के समय में बहुत सारे अप्रत्याशित परिवर्तन देखने को मिलता है। बुध ग्रह को वाणी और बुद्धि का कारक माना जाता है। इसकी वक्री चाल से लोगों के विचार और व्यवाहर में परिवर्तन होता है। इस दौरान जातक की मौलिक चेतन और सृजनात्मक क्षमता बढ़ जाती है। बुध के वक्री प्रभाव के कारण व्यक्ति अंत समय तक अपने निर्णय को बदल देता है। बुध ग्रह वक्री होकर आमतौर पर बुद्धि, अभिव्यक्ति, शिक्षा और साहित्य के प्रति लोगों की रुचि को बढ़ावा देता है। बुध ग्रह वाणी को प्रभावित करता है, इसलिए बुध व्रकी के समय में व्यक्ति बोलना तो बहुत कुछ चाहता है, लेकिन बहुत कुछ नहीं बोल पाता है।
इन राशि के स्वामी ग्रह हैं बुध
बुद्धि और वाणी के कारक बुध ग्रह कन्या और मिथुन राशि के स्वामी ग्रह माने जाते हैं। बुध ग्रह कन्या राशि में उच्च भाव में और मिथुन राशि में नीच भाव में रहते हैं, इसलिए बुध व्रकी से कन्या राशि के जातक पर शुभ फल प्राप्त होता है और मिथुन राशि के जातक पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बुध गोचर के समय इन राशि पर अलग प्रभाव पड़ता है।
