Buddha Purnima 2023 Date, Time, Puja Muhurat: बुद्ध पूर्णिमा का पर्व बौद्ध अनुयायियों के लिए बेहद खास होता है। वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि पर भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस बार गौतम बुद्ध की 2585वीं जयंती है। बौद्ध धर्म में यह पावन पर्व काफी महत्व रखता है। बुद्ध भगवान के जन्मोत्सव पर उनके अनुयायी शोभा यात्रा, दान, भजन, उपाय, पूजा आदि करते हैं। ऐसा करने से जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इसी के साथ यहां जानिए बुद्ध पूर्णिमा की डेट, मुहूर्त, महत्व और इतिहास इन हिंदी।
बुद्ध पूर्णिमा 2023 कब है? (Buddha Purnima 2023 Date)
वैशाख माह में आने वाली पूर्णिमा को गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं। इस बार बुद्ध पूर्णिमा 5 मई 2023, शुक्रवार को पड़ी है। इस बार बुद्ध पूर्णिमा पर कई शुभ योग बन रहे हैं। जानिए इसकी मुहूर्त...
Buddha Purnima Time In India (बुद्ध पूर्णिमा 2023 की मुहूर्त)
बुद्ध पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 04 मई 2023, गुरुवार, रात 11:59 बजे।
बुद्ध पूर्णिमा तिथि समापन: 05 मई 2023, शुक्रवार, रात 11:18 बजे।
सिद्ध योग - 04 मई सुबह 10:37 बजे से 05 मई सुबह 09:17 बजे तक।
क्यों मनाया जाता है बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima 2023 History)
बौद्ध अनुयायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन गौतम बुद्ध का जन्म तो हुआ ही था। इसके अलावा इसी तिथि को वर्षों वन में भटकने और कठोर तप करने के बाद बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे बुद्ध को सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसके बाद महात्मा बुद्ध ने पूरी दुनिया में अपने ज्ञान के प्रकाश से एक नई रोशनी पैदा की। फिर, वैशाख माह वाली पूर्णिमा पर ही कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। इस तरह, गौतम बुद्ध का जन्म, सत्य का ज्ञान और महापरिनिर्वाण एक ही दिन यानी वैशाख माह की पूर्णिमा के दिन ही हुआ। इसलिए यह बौद्ध धर्म के लिए बेहद खास दिन माना जाता है और इस दिन बड़े उत्साह के साथ बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।
Buddha Purnima 2023 significance (बुद्ध पूर्णिमा के महत्व)
वैशाख पूर्णिमा के दिन महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई प्रमुख घटनाएं हुई हैं। इसलिए हर साल वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। दरअसल, भगवान बुद्ध ने जब अपने जीवन में पाप, हिंसा और मृत्यु के विषय में जाना तभी से उन्होंने मोह-माया का त्याग कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार को छोड़कर सारी जिम्मेदारियों से मुक्ति ले ली। वो स्वयं सत्य की खोज में निकल पड़े। उन्हें अंततः सत्य का ज्ञान भी प्राप्त हुआ। इस लिए यह दिन बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष होता है। इस दिन गौतम बुद्ध के स्मरण से जीवन में सुख, वैभव और खुशहाली आती है।
