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24 या 25 फरवरी, ब्रज में कब खेली जाएगी लड्डूमार होली, जानिए क्या है सही तारीख और क्यों है ये खास?

Braj Mei Laddumar Holi Kab Hai: भारत में ब्रज क्षेत्र अपनी अनोखी होली के लिए जाना जाता है। यहां लड्डूमार होली बेहद ही खास मानी जाती है। ब्रज में वैसे तो 40 दिन होली महोत्सव होता है, लेकिन होलिका दहन से पहले के 8 दिन ज्यादा खास होते हैं। इन दिनों में ही होली का सुरूर अपने चरम पर होता है। इन 8 दिनों के होली महोत्सव में सबसे पहली होली लड्डूमार होली है। आइए जानते हैं कि ब्रज में लड्डूमार होली कब खेली जाएगी?

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लड्डूमार होली कब खेली जाएगी

Braj Mei Laddumar Holi Kab Hai: ब्रज में होली केवल एक दिन का पर्व नहीं होता, बल्कि यह लगभग 40 दिनों तक चलने वाला उत्सव होता है। यहां होली महोत्सव की शुरुआत बसंत पंचमी से हो जाती है, जिसे रंग पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। ब्रज क्षेत्र की इसी श्रृंखला की एक खास परंपरा है लड्डू मार होली है। साल 2026 में ब्रज क्षेत्र में लड्डू मार होली 24 फरवरी को मनाई जाएगी। ब्रज के पारंपरिक फागोत्सव कैलेंडर के अनुसार यह उत्सव 24 फरवरी को ही बरसाना में आयोजित होगा। यह होली लट्ठमार होली से ठीक एक दिन पहले खेली जाती है और उसी दिन नंदगांव को फाग खेलने का औपचारिक निमंत्रण भी भेजा जाता है।

क्यों खास है लड्डू मार होली? (Laddumar Holi Kyu Khas Hai)

ब्रज की होली पूरे देश में अलग पहचान रखती है। यहां रंगों के साथ भक्ति, परंपरा और लीलाओं का अनोखा संगम देखने को मिलता है। लड्डू मार होली भी उसी विरासत का ही एक हिस्सा है। इस दिन बरसाना स्थित राधा रानी मंदिर परिसर में रंगों की जगह लड्डुओं की बरसात होती है। भक्तों पर प्रसाद के रूप में लड्डू फेंके जाते हैं। इसे केवल उत्सव नहीं, बल्कि आशीर्वाद माना जाता है। जो भी श्रद्धालु यह लड्डू प्राप्त करता है, वह खुद को भाग्यशाली समझता है।

क्यों खेली जाती है लड्डू मार होली (Laddu Mar Holi Kyu Kheli Jati Hai)

लड्डू मार होली की परंपरा द्वापर युग की एक कथा से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, सबसे पहले बरसाना से नंदगांव को होली खेलने का निमंत्रण भेजा गया था। उस समय पुरोहितों के माध्यम से संदेश पहुंचाया जाता था। कथा के अनुसार जब नंदगांव से आए पुरोहित बरसाना पहुंचे तो गोपियों ने उनका स्वागत मिठाइयों और लड्डुओं से किया। उसी दौरान हंसी-ठिठोली में जब गोपियों ने उन पर गुलाल डाला तो पुरोहितों ने मजाक में अपने पास रखे लड्डू उछालकर जवाब दिया। धीरे-धीरे यही परंपरा उत्सव का रूप लेती गई और लड्डू मार होली की शुरुआत मानी गई। इसी के चलते भक्तों पर लड्डू बरसाए जाते हैं।

कैसे खेली जाती है लड्डू मार होली? (Laddu Mar Holi Kaise Kheli Jati Hai)

इस दिन सुबह से ही बरसाना में खास तैयारियां शुरू हो जाती हैं। राधारानी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं। सबसे पहले विधिवत पूजा और फाग गायन होता है। इसके बाद पुजारी और सेवायत मंदिर की छत या ऊंचे स्थान से भक्तों पर लड्डू फेंकते हैं। ये लड्डू प्रसाद के रूप में होते हैं। लोग इन्हें पकड़ने की कोशिश करते हैं और इसे अपने लिए शुभ मानते हैं। पूरे माहौल में ढोल, नगाड़े और फाग गीत गूंजते रहते हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।

नंदगांव भेजा जाता है निमंत्रण

यह उत्सव लट्ठमार होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। इसी दिन बरसाना से नंदगांव को फाग खेलने का निमंत्रण जाता है। मंदिर से भक्तों पर कई किलो लड्डू बरसाए जाते हैं। लड्डू को प्रसाद मानकर ग्रहण किया जाता है। इस दिन से ब्रज में रंगोत्सव और भी तेज हो जाता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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