Mahashivratri 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: अमवस्या में न करें महाशिवरात्रि व्रत का पारण, करें शिव चालिसा का पाठ
Mahashivratri 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की चतुर्दशी को मनाया जाता है। ये शिव भक्तों के लिए उल्लास और आस्था का पर्व होता है। इस वर्ष यह त्योहार 01 मार्च को यानि आज मनाया जा रहा है। इस दिन भोलेनाथ के भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, बेर, धतूर, भांग चढ़ाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहां जानें महाशिवरात्रि की तिथि, पूजा विधि, मुहूर्त, महत्व, उपाय और मंत्र।
Mahashivratri 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। आदि देव महादेव के भक्त साल भर इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं। इस वर्ष यह त्योहार 01 मार्च को यानि आज मनाया जा रहा है। इस पर्व को लेकर मान्यता है कि महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, बेर, धतूर, भांग चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन पर महादेव की विशेष कृपा बना रहती है। भोलेनाथ के भक्त इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। जानें इस साल कब मनाई जा रही है शिवरात्रि। जानें इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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चतुर्दशी तिथि का अंत होने से पहले पारण करें
धर्मसिंधु के अनुसार अगर तीनों प्रहारों के बाद चतुर्दशी तिथि समाप्त हो रही है तो पारण चतुर्दशी तिथि के अंत में करना चाहिए। दूसरी ओर यदि चतुर्दशी तिथि सारे प्रहारों के बाद समाप्त हो रही है तो अगली सुबह सूर्योदय के समय पारण करें। यदि चतुर्दशी तिथि के बाद अमावस्या लग रहा है तो चतुर्दशी तिथि का अंत होने से पहले पारण कर लेना चाहिए। महाशिवरात्रि का पारण अमावस्या में नहीं करना चाहिए। इसलिए 1 मार्च की रात्रि में चतुर्दशी तिथि का अंत होने से पहले 12 बजकर 17 मिनट पर व्रत का पारण करें।
भोलेनाथ को पंचामृत का भोग लगाएं
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार महाशिवरात्रि व्रत का पारण नियमानुसार करना चाहिए। पारण करने के लिए स्नान आदि कर महाशिवरात्रि व्रत की कथा सुनें फिर शिव चालीसा का पाठ करें। इसके बाद भोलेनाथ को पंचामृत का भोग लगाएं और प्रसाद ग्रहण कर पारण कर लें।
पारण का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पावन पर्व फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, चतुर्दशी तिथि आज सुबह 03 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर रात्रि 01 बजे समाप्त होगी। पारण का समय: 1 मार्च, रात्रि 12 बजकर 17 मिनट पर है।
त्रिशूल भगवान शिव का प्रिय अस्त्र
त्रिशूल भगवान शिव का प्रिय अस्त्र है। हिंदू धर्म में इसे काम, क्रोध और लोभ का प्रतीक माना जाता हैं। यदि शिवरात्रि में स्वप्न में त्रिशूल दिखाई देने से नकारात्मक विकारों का नाश होता है और भगवान शिव शंकर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सपने में नदी आने का मतलब
भोलेनाथ को नदी बहुत ही प्रिय है। शिवरात्रि के रात में यदि आपको स्वप्न में नदी दिखाई दे, तो धर्म के अनुसार भगवान शिव की कृपा बहुत जल्दी प्राप्त होती है। नदी को स्वप्न में देखने से किसी भी कार्य जल्दी पूरा होती है।
महाशिवरात्रि पर पांच प्रकार के स्वप्न
महाशिवरात्रि के रात में आपको पांच प्रकार के स्वप्न दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये हैं, नदी का स्वप्न, त्रिशूल का स्वप्न, डमरू का स्वप्न, नाग का स्वप्न और तीसरी आंख का स्वप्न।
27 दानों से कम की नहीं पहने रुद्राक्ष
रुद्राक्ष की माला 27 दानों से कम की नहीं पहननी चाहिए और उसमें दानों की संख्या विषम ही होनी चाहिए। रुद्राक्ष की माला, पीले या लाल धागे में पहनें या फिर सोने या चांदी की माला बनवाकर पहनें।
ऊं नमः शिवाय मंत्र का करें जाप
रुद्राक्ष को बहुत पवित्र माना गया है इसे स्नान करके, साफ कपड़े पहनकर ही धारण करना चाहिए। इसे धारण करते समय ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए।
भगवान शिव के रुद्राक्ष की कहानी
मान्यताओं के अनुसार माता सती के देह त्यागने के बाद भगवान शिव के रुदन से निकले आंसू पृथ्वी पर कई जगह गिरे और उनसे प्रकृति को रुद्राक्ष के रूप में एक चमत्कारिक तत्व की प्राप्ति हुई थी। यह भगवान शिव का साक्षात रूप है।
शिव रुद्राष्टक का करें जाप
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजे हं॥1॥
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतो हं॥2॥
तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥3॥
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥4॥
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्।
त्रय: शूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजे हं भवानीपतिं भावगम्यं॥5॥
कलातीत कल्याण कल्पांतकारी। सदासज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥6॥
न यावद् उमानाथ पादारविंदं। भजंतीह लोके परे वा नराणां।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥7॥
न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतो हं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जराजन्म दु:खौघ तातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्न्मामीश शंभो॥8॥
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्तया तेषां शम्भु: प्रसीदति॥
महाशिवरात्रि पर कब करें पूजा?
महाशिवरात्रि पर दिन भर पूजा का मुहूर्त रहता है। लेकिन प्रहर के अनुसार भगवान शिव की पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त 1 मार्च को मध्य रात्रि 12:08 से मध्य रात्रि 12:58 तक है।
क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्रि का पर्व?
आज पूरे भारत में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह भी कहा जाता है कि आज के दिन भगवान शिव करोड़ों सूर्य के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
घर के सामने लगाएं भोलेनाथ की तस्वीर
शास्त्रों के अनुसार घर के उत्तर दिशा में यानी सामने ही भोलेनाथ की तस्वीर होनी चाहिए, जहां घर में आने जाने वाले सभी लोग भगवान शिव के दर्शन कर सकें।
शिवलिंग पर जल अर्पित करने के नियम
महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यह जरूर ध्यान रखें कि उन्हें कौन से फूल पसंद हैं। यहां जानें-
1. हिंदू शास्त्र के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते वक्त हमेशा अपना मुंह उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए।
2. शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए सबसे सही पात्र तांबे होता है। लेकिन तांबे के पात्र में भोलेनाथ को दूध कभी में नहीं चढ़ाना चाहिए। तांबे में दूध विष के समान बन जाता है।
3. शिवलिंग पर तेज धार में भूलकर भी जल ना चढ़ाएं, पतली धार से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
4. शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय खड़े नहीं रहना चाहिए, बैठकर जल अर्पित करें
5. शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नहीं अर्पित करना चाहिए।
6. जल में कुछ ना मिलाएं
किस दिशा में स्थापित करें भोलेनाथ की मूर्ति
भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत पर है, जो कि उत्तर दिशा में है। इसलिए ध्यान रखें कि भोलेनाथ की मूर्ति उत्तर दिशा में स्थापित करें। साथ ही भगवान शिव की क्रोध मुद्रा वाली प्रतिमा स्थापित नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे विनाश का प्रतीक माना जाता है।
महाशिवरात्रि के व्रत में क्या खाएं
महाशिवरात्रि के व्रत में व्रती अनार या संतरे का जूस पी सकते हैं, फल खा सकते हैं। इस दिन बेर भी खाए जा सकते हैं। जूस पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और एनर्जी भी बनी रहती है।
शिवरात्रि पर ना पहनें ऐसे कपड़े
महाशिवरात्रि के मौके पर नए कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके अलावा साफ धुले हुए कपड़े भी पहन सकते हैं। मान्यता है कि जो लोग व्रत रखते हैं उन्हें काले कपड़े या डार्क रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
महाशिवरात्रि के मौके पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए गरीबों को भोजन करवाएं। ऐसा करने से भक्तों के घर अन्न की कमी नहीं होती। साथ ही इससे पूर्वज प्रसन्न होंगे और उनकी आत्मा को शांति मिलेगी।
महाशिवरात्रि पर बन रहा है यह संयोग
महाशिवरात्रि का त्योहार आज यानी 01 मार्च, मंगलवार को मनाया जा रहा है। इस दिन पंचग्रही योग बनेगा जो बेहद विशेष माना गया है। पंच ग्रही योग के समय मंगल, शनि, बुध, शुक्र और चंद्रमा रहेंगे। पंचांग के अनुसार, इस दिन लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति होगी। वहीं राहु वृषभ राशि और केतु दसवें भाव में वृश्चिक राशि में मौजूद रहेंगे। यह संयोग बहुत शुभ माना जा रहा है।
जल्द विवाह के लिए उपाय
जिन लोगों का विवाह नहीं हो पा रहा है वो महाशिवरात्रि के मौके पर खास उपाय कर सकते हैं। शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।
शिवलिंग पर ना चढ़ाएं ये चीजें
शिवभक्त शिवरात्रि के दिन इन बातों का खास ख्याल रखें और भूलकर भी भगवान शिव को ये चीजें अर्पित ना करें:-
-तुलसी के पत्ते
-टूटे हुए बेलपत्र
-टूटे हुए चावल
-केतकी के फूल
महाशिवरात्रि 2022 व्रत का पारण कब होगा
महाशिवरात्रि व्रत का पारण 02 मार्च 2022, बुधवार को सुबह 6:45 बजे होगा। सुबह स्नान करके भोलेनाथ की पूजा कर उनको भोग लगाएं। इसके बाद दान आदि कर भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।
शिव चालीसा पढ़ते समय ध्यान रखें
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की वंदना व शिव चालीसा का जाप भक्त कभी भी कर सकते हैं लेकिन ये शुद्ध तन और मन से करना चाहिए। साथ ही शिव चालीसा को पढ़ने में त्रुटि न करें। इससे इस जाप का पूर्ण फल नहीं मिलता है।
शिवजी को ऐसे चढ़ाएं बेलपत्र
कहा जाता है कि शिवलिंग पर हमेशा उल्टा बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। बेल पत्र का चिकना भाग अंदर की तरफ यानी शिवलिंग की तरफ होना चाहिए।
भाग्योदय के लिए उपाय
महाशिवरात्रि के मौके पर जागरण करना अत्यंत लाभदायक माना गया है। इस दिन शिवमंत्रों का जाप करने से सोया हुआ भाग्य भी जग जाता है। ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और घर में सुख शांति रहती है। इस दिन शिवभक्त रात्रि जागरण कर भगवान शंकर की पूजा और जाप करते हैं।
परिवार की सुख समृद्धि के लिए उपाय
महाशिवरात्रि पर शिव और पार्वती की पूजा करना अनिवार्य बताया गया है। इस दिन सवा लाख बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से परिवार में सुख व समृद्धि बढ़ती है। ऐसा माना जाता है कि इससे भय से मुक्ति मिलने के साथ-साथ भोलेनाथ का आशीर्वाद भी मिलता है।
धन वृद्धि के लिए करें ये उपाय
महाशिवरात्रि पर अगर आप विधिवत पूजा या जप करें तो भगवान शिव की कृपा धन पर भी होती है। घर की सुख शांति के लिए सवा किलो जौ की पोटली लीजिए फिर उसे शिवलिंग पर अर्पित करके तिजोरी में रख दीजिए। यह उपाय धन वृद्धि के लिए बहुत लाभदायक माना गया है।
इस दिशा में स्थापित करें भोलेनाथ की मूर्ति
भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत पर है, जो कि उत्तर दिशा में है। इसलिए ध्यान रखें कि भोलेनाथ की मूर्ति उत्तर दिशा में स्थापित करें। साथ ही भगवान शिव की क्रोध मुद्रा वाली प्रतिमा स्थापित नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसे विनाश का प्रतीक माना जाता है।
महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी ना करें ये कार्य
1. महाशिवरात्रि के दिन उपवास रख रहे हैं तो देर तक ना सोएं।
2. महाशिवरात्रि के दिन भूल कर भी शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा ना करें।
3. महाशिवरात्रि के दिन भक्तों को कभी भी मांस, तंबाकू या शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से भोलेनाथ नाराज हो सकते है।
4. महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की पूजा करते समय शिवलिंग या मूर्ति पर कुमकुम, हल्दी या नारियल का पानी ना चढ़ाएं। महाशिवरात्रि के व्रत में इन नियमों को अपनाने से भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं।
महाशिवरात्रि पर चारों पहर की पूजा का समय
- महाशिवरात्रि के पहले प्रहर की पूजा- 1 मार्च, 2022 शाम 6 बजकर 21 मिनट से रात 9 बजकर 27 मिनट तक
- दूसरे प्रहर की पूजा- रात्रि 9 बजकर 27 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक
- तीसरे प्रहर की पूजा- रात 12 बजकर 33 मिनट से सुबह 3 बजकर 39 मिनट तक
- चौथे प्रहर की पूजा- 2 मार्च सुबह 3 बजकर 39 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक
- पारण का समय- 2 मार्च 6 बजकर 45 मिनट के बाद
महाशिवरात्रि के दिन करें ये कार्य
महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने के लिए कई चीजों का ध्यान रखना चाहिए। जानें इस दिन क्या कार्य अवश्य करने चाहिए।
1. यदि आप महाशिवरात्रि का व्रत कर रहे हैं तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें।
2. महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत के अनुष्ठान के लिए साफ कपड़े धारण करें।
3. पूजा मुहूर्त में ही पूजा करें।
4. रुद्राभिषेक शुद्ध मन और भक्ति पूर्वक करें।
5. महाशिवरात्रि के दिन उपवास के नियम का पालन करें।
6. भोलेनाथ से लंबी आयु की इच्छा प्राप्त करने के लिए शिवलिंग पर दुर्वा घास अवश्य चढ़ाएं।
शिवलिंग पर जल अर्पित करने के नियम
महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यह जरूर ध्यान रखें कि उन्हें कौन से फूल पसंद हैं। यहां जानें-
1. हिंदू शास्त्र के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते वक्त हमेशा अपना मुंह उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए।
2. शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए सबसे सही पात्र तांबे होता है। लेकिन तांबे के पात्र में भोलेनाथ को दूध कभी में नहीं चढ़ाना चाहिए। तांबे में दूध विष के समान बन जाता है।
3. शिवलिंग पर तेज धार में भूलकर भी जल ना चढ़ाएं, पतली धार से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
4. शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय खड़े नहीं रहना चाहिए, बैठकर जल अर्पित करें
5. शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नहीं अर्पित करना चाहिए।
6. जल में कुछ ना मिलाएं
महाशिवरात्रि व्रत विधि
महाशिवरात्रि 01 मार्च, 2022 को मनाई जा रहा है और अगर आप इस दिन व्रत रख रहे हैं तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद भगवान शिव के सामने जाकर व्रत करने का संकल्प लें। व्रत का संकल्प लेने के बाद इस दिन विधि अनुसार भगवान शिव व शिव परिवार की पूजा करें। इस दिन विधि अनुसार शिवलिंग की पूजा भी करें। मान्यताओं के अनुसार, शिवरात्रि पर चार पहर की पूजा करनी चाहिए और रात में जागरण रखना चाहिए। महाशिवरात्रि के दिन शिव मंदिर के दर्शन करना भी लाभदायक माना गया है। अगले दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें और पारण समय पर व्रत का पारण करें।
महाशिवरात्रि पर पढ़ें ये आरती
महाशिवरात्रि को भोलेनाथ की पूजा का सर्वश्रेष्ठ दिन माना गया है। इस पूजन के अंत में शिवजी की आरती जरूर पढ़ें। यहां पढ़ें ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा आरती के लिरिक्स हिंदी में
महाशिवरात्रि के दिन घर में बनाएं खूबसूरत रंगोली
महाशिवरात्रि पर करें ये उपाय
महाशिवरात्रि के दिन आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं। ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है। यह उपाय करने से धन प्राप्ति भी होती है।
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर बन रहा है यह संयोग
महाशिवरात्रि का त्यौहार इस वर्ष 1 मार्च मंगलवार के दिन पड़ रहा है। इस दिन पंचग्रही योग बनेगा जो बेहद विशेष माना गया है। पंच ग्रही योग के समय मंगल, शनि, बुध, शुक्र और चंद्रमा रहेंगे। पंचांग के अनुसार, इस दिन लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति होगी। वहीं राहु वृषभ राशि और केतु दसवें भाव में वृश्चिक राशि में मौजूद रहेंगे। यह संयोग बहुत शुभ माना जा रहा है।
महाशिवरात्रि पर कब करें शिव मंदिर के दर्शन?
मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिव मंदिर के दर्शन करने से लाभ होता है। इस दिन शिव मंदिर के दर्शन संध्याकाल को स्नान करने के बाद ही करना चाहिए।
महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप
1. महा मृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
2. रूद्र गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
महाशिवरात्रि पर करें उनके 108 नामों का जाप
महाशिवरात्रि के दिन शिव जी के 108 नामों का जाप करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जो भक्त शिव जी के 108 नामों का जाप करता है उस पर भगवान प्रसन्न होते हैं।
2022 में कब है महाशिवरात्रि तिथि?
वर्ष 2022 में महाशिवरात्रि तिथि 01 मार्च के दिन पड़ रही है। चतुर्दशी तिथि मंगलवार को 03:16 से प्रारंभ हो जाएगी और बुधवार को तकरीबन 10:00 बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है।
क्या महाशिवरात्रि पर आवश्यक है मंदिर जाना?
महाशिवरात्रि तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है। इस दिन लोग अपने घर पर पूजा करने के साथ मंदिर के दर्शन भी करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिव मंदिर का दर्शन करना लाभदायक होता है। लेकिन अगर आप मंदिर नहीं जा सकते हैं तो घर में रहकर ही पूजा कर लें।
महाशिवरात्रि पूजा सामग्री
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के लिए सुपारी, अक्षत, पान, चंदन, रोली, मौली, दूध लौंग, इलाइची, घी, दही, शहद, कमलगट्टा, धतूरा, बेल पत्र आदि जरूर रखें।
शिव जी को क्यों नहीं तुलसी की जाती है अर्पित?
शिव पुराण के अनुसार, जालंधर नाम का एक असूल था जिसको एक वरदान मिला था। कहा जाता है कि असुर की पत्नी की पवित्रता की वजह से कोई भी उसे पराजित नहीं कर सकता था। लेकिन इस असुर का वध भगवान शिव ने किया था। असुर का वध करने के लिए उसकी पत्नी तुलसी की पवित्रता को भंग करना आवश्यक था। और यह कार्य भगवान विष्णु ने किया था। जब असुर जालंधर का वध हुआ तब तुलसी भगवान शिव से नाराज हो गई। और उसने भगवान शिव का बहिष्कार किया। जिस वजह से शिव पूजा के दौरान कभी भी तुलसी का उपयोग नहीं किया जाता है।
महाशिवरात्रि पर प्रहर के अनुसार शिवलिंग स्नान विधि
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा करना आवश्यक माना गया है। इस दिन प्रहर के अनुसार शिवलिंग स्नान किया जाता है। रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घृत और चौथे प्रहर में मधु से स्नान करवाया जाता है।
शिव जी को कैसे अर्पित करें बेलपत्र?
महाशिवरात्रि के दौरान, शिव पूजन में बेलपत्र अर्पित किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र हमेशा शिवलिंग पर उल्टा रखकर अर्पित करना चाहिए। बेलपत्र का चिकना भाग अंदर की तरफ शिवलिंग पर रखना चाहिए।
महाशिवरात्रि पूजा में क्यों किया जाता है इन चीजों का उपयोग?
महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा के दौरान शिवलिंग पर कमल, शंख पुष्प और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।
महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप
ॐ अघोराय नम:।।
ॐ तत्पुरूषाय नम:।।
ॐ ईशानाय नम:।।
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय
क्या है महाशिवरात्रि पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि शिव और पार्वती के विवाह की रात्रि मानी गई है। महाशिवरात्रि के दिन लोग जागरण रखते हैं और शिव-पार्वती की पूजा-आराधना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जागरण रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
महाशिवरात्रि पर क्या है मान्यता?
महाशिवरात्रि के दिन देवों के देव महादेव की पूजा की जाती है। यह माना जाता है कि इस दिन महादेव का व्रत रखने से और विधि अनुसार उनकी पूजा करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान शिव के लिंग स्वरूप की पूजा अवश्य की जाती है।
महाशिवरात्रि पर शिवजी को चढ़ाएं ये फूल
महाशिवरात्रि पर अगर यहां बताएं गए फूलों से भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करें, तो भक्चों के ऊपर त्रिलोकी नाथ की कृपा बरसती है। तो आइए जाने भोलेनाथ के पसंदीदा फूलों के नाम-
-धतूरे का फूल।
-बेलपत्र या मारेदु पत्ता, जिसके बिना अधूरी मानी जाती है।
-पारिजात यानी हरसिंगार का फूल भोलेनाथ को प्रिय माना जाता है।
-भोलेनाथ को गुलाब का फूल बहुत प्रिय है।
इसके अलावा यहां जानें भगवान शिव को पसंद हैं कौन से फूल।
महाशिवरात्रि का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार फाल्गुन मास के चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मान्यता है कि इस दिन विधिवत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और विवाह में आने वाली सभी विघ्न बाधाएं दूर होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत कर भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। यदि आपके विवाह में बार बार अड़चन आ रही है तो महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक कर विधिवत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और भोलेनाथ का आशीर्वाद सदैव अपने भक्तों पर बना रहता है।
महाशिवरात्रि पर ना करें ये काम
महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की पूजा करते समय शिवलिंग या मूर्ति पर कुमकुम, हल्दी या नारियल का पानी ना चढ़ाएं। इसके अलावा मांस, तंबाकू या शराब का सेवन भी न करें।
इस दिशा में स्थापित करें भोलेनाथ की मूर्ति
भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत पर है, जो कि उत्तर दिशा में है। इसलिए ध्यान रखें कि भोलेनाथ की मूर्ति उत्तर दिशा में स्थापित करें। साथ ही भगवान शिव की क्रोध मुद्रा वाली प्रतिमा स्थापित नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे विनाश का प्रतीक माना जाता है। जानें भोलेनाथ की मूर्ति स्थापित करने के वास्तु नियम
महाशिवरात्रि पारण समय
महाशिवरात्रि व्रत का पारण 2 मार्च 2022, बुधवार को सुबह 6:45 बजे होगा। सुबह स्नान करके भोलेनाथ की पूजा कर उनको भोग लगाएं। इसके बाद दान आदि कर भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।
इस तरह करें भगवान शिव की आराधना-
महा शिवरात्रि के दिन सर्वप्रथम नित्य क्रियाओं से निव्रत होकर किसी भी शिवालय में जाकर आप पूजा अर्चना कर सकते हैं। शिव जी को किसी भी तांबे के पात्र में जल भर कर उसमे थोड़ी शक्कर, गुलाब के फूल की पत्तियां डाल कर स्नान कराएं। उसके बाद घी, दूध, शहद, गंगाजल, शक्कर डाल कर उनका पंचामृत अभिषेक कराएं। उसके उपरांत भगवान शिव को रोली, मौली, अक्षत, यानी पुष्प (कनेर गुलाब) पान, सुपारी ,लौंग, इलायची, चंदन, कमलगटटा, धतूरा, बेलपत्र, आदि अर्पित करें। शिवपुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता। मंत्र इस प्रकार हैं-
ॐ हौं जूं सः
महा मृतुन्जय मंत्र...
ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टि-वर्धनम उर्वारुकमिव बन्धनं मृत्योर्मुक्षीय मामृतात
महाशिवरात्रि पर स्वप्न में दिखी 5 चीजें, तो बरसेगी भोलेनाथ की कृपा
देश में महाशिवरात्रि बहुत ही हर्ष, उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन त्रिलोकीनाथ और माता पार्वती की पूजा आराधना की जाती है। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन माता पार्वती और शिव शंकर का विवाह हुआ था। इसलिए इस पूजा को हमारे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार इस पूजा को करने से भोलेनाथ के साथ-साथ माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है। यदि शिवरात्रि के दिन रात में यह 5 प्रकार के स्वप्न दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। धर्म के अनुसार इस स्वप्न को देखने का मतलब शिव शंकर का की कृपा दृष्टि बहुत जल्दी प्राप्ति होने माना जाता है। तो आइए जाने वह कौन कौन से स्वप्न है, जिन्हें हम देखने के बाद भगवान शंकर का आशीर्वाद जल्दी प्राप्त कर सकते हैं। जानें कौन सी हैं वो पांच चीजें-
1. नदी का स्वप्न
2. त्रिशूल का स्वप्न
3. डमरू का स्वप्न
4. नाग का स्वप्न
5. तीसरी आंख का स्वप्न
महाशिवरात्रि पर करें इन महाशक्तिशाली शिव-मंत्रों का जाप
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के पर्व पर शिव मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि शिव मंत्रों का जाप करने से सारी मुश्किलें दूर हो जाती हैं और आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। ऐसा माना जाता है कि उनके मंत्रों का जाप करने से वह प्रसन्न होते हैं। इसलिए इस दिन व्रत,उपवास के साथ शिव पूजन और साथ में उनके मंत्रों के जाप की भी प्रधानता है। यहां जानें कि महाशिवरात्रि पर किन मंत्रों का जाप किया जाना चाहिए।
महाशिवरात्रि पर चारों पहर की पूजा के मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर प्रथम पहर की पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है। 2022 में इसका समय शाम 6:21 से शुरू होकर रात में 09:27 तक का है। दूसरे पहर की पूजा का शुभ मुहूर्त रात 9 बजकर 27 मिनट से है जिस दौरान भोलेनाथ का दही से अभिषेक किया जाता है। तीसरे पहर की पूजा मध्यरात्रि में की जाती है और इस समय रुद्राष्टक का पाठ शुभ माना जाता है। चौथे पहर की पूजा अगले दिन भोर में की जाती है। चौथे पहर की पूजा अगले दिन भोर में होती है। इस दौरान शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें।
महाशिवरात्रि पर करें इस मंत्र का जाप
शिवपुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता। मंत्र इस प्रकार हैं-
ॐ हौं जूं सः
महा मृतुन्जय मंत्र...
ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टि-वर्धनम उर्वारुकमिव बन्धनं मृत्योर्मुक्षीय मामृतात
महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के अवसर पर स्नान कर निवृत हो जाएं फिर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और विधिवत पूजा के लिए एक कलश में दूध या जल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। साथ ही शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूर, बेर, फूल आदि सभी सामग्री भगवान शिव को अर्पित करें। इस दिन मंदिर में भगवान शिव के समक्ष बैठकर शिवपुराण, महामृत्युंजय मंत्र, शिव मंत्र और शिव जी के आरती का पाठ करना चाहिए। इस दिन रात्रि में जागरण भी किया जाता है। ऐसा करने से भगवान शिव की भक्तों पर सदैव कृपा बनी रहती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कब है शिवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार 2022 में महाशिवरात्रि (Maha shivratri 2022 Date) का व्रत 1 मार्च 2022, दिन मंगलवार को है। 01 मार्च को चतुर्दशी तिथि सुबह 03 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 2 मार्च, बुधवार को सुबह 1 के करीब होगा।
- महाशिवरात्रि 2022 व्रत तिथि: 1 मार्च 2022, मंगलवार
- फाल्गुन मास 2022 की चतुर्दशी तिथि प्रारंभ : 1 मार्च 2022, 3:16 AM से
- फाल्गुन मास 2022 की चतुर्दशी तिथि समापन: 2 मार्च 2022, बुधवार को 1 AM तक

