अध्यात्म

काल सर्प दोष दूर करने का महाउपाय,पाताल लोक से है सीधा कनेक्शन

काल सर्प दोष ज्योतिष शास्त्र में एक दोष माना जाता है और जब ये दूर हो जाता है तो जातक के लिए वह काफी कल्याणकारी साबित होता है। नाग कूप जिसका पाताल लोक से सीधा कनेक्शन है उसके जरिए काल सर्प के दोष का शमन किया जा सकता है।

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काल सर्प दोष दूर करने का महाउपाय,

वाराणसी: “गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌…” रावण की रचना ‘शिव तांडव’ में भोलेनाथ के अद्वितीय रूप का वर्णन है। बाबा अपने गले में सर्पों का हार पहने हैं... जहां-जहां भोलेनाथ, वहां-वहां उनके परम भक्त नाग देव। ऐसे में भला शिव की निराली नगरी काशी की बात कैसे न की जाए। जहां एक तरफ संकरी गलियों में सहजता से चलते सांड मिल जाएंगे, तो वहीं दूसरी ओर धर्मनगरी में स्थित है नाग कूप, जिसका द्वार सीधा नागलोक में खुलता है।

बाबा विश्वनाथ के त्रिशूल पर बसी काशी के जैतपुरा क्षेत्र में स्थित नाग कूप को लेकर धार्मिक मान्यता है कि प्राचीन कूप का द्वार सीधे नागलोक में खुलता है। आश्चर्य की बात है कि तमाम कोशिशों के बावजूद आज तक यह पता नहीं चल सका कि इसकी गहराई कितनी है।

नाग कूप में कई रहस्य विद्यमान

काशी के ज्योतिषाचार्य, यज्ञाचार्य एवं वैदिक कर्मकांडी पं. रत्नेश त्रिपाठी ने नाग कूप के महत्व, धार्मिक मान्यता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शेषावतार नागवंश के महर्षि पतंजलि ने कई साल तक इसी जगह तप-ध्यान किया था। उन्होंने यहीं पर व्याकरणाचार्य पाणिनी के भाष्य की रचना की थी। नागकूप के बारे में धार्मिक कथा भी प्रचलित है, जिसके अनुसार काशी के इस प्राचीन नागकूप का इतिहास हजारों साल पुराना है। आम कूप की तरह दिखने वाले इस नाग कूप में कई रहस्य हैं। यहां पर बाबा कारकोटेश्वर के रूप में विराजमान हैं। इस कूप के अंदर कुल सात कुएं और उनके नीचे सीढ़ियां हैं, जो नागलोक तक ले जाती हैं। स्कंद पुराण में वर्णित है कि काशी का नागकूप वह स्थल है, जो पाताल लोक, नागलोक का मार्ग है।

कूप के अंदर एक शिवलिंग भी है, जिसका दर्शन दुर्लभ

उन्होंने आगे बताया कि कूप के अंदर एक शिवलिंग भी है, जिसका दर्शन दुर्लभ है। साल में एक बार नाग पंचमी के अवसर पर कूप की सफाई होती है, तभी बाबा के दर्शन हो पाते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है और लोग दर्शन-पूजन के लिए मंदिर में जुटते हैं। श्रद्धालु कूप में धान का लावा, दूध भी चढ़ाते हैं और शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

नाग कूप दिलाता है काल सर्प दोष से मुक्ति

पं. रत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि जिनकी कुंडली में काल सर्प दोष है, यदि वे इस कूप का दर्शन करते हैं और नियम के साथ पूजा-पाठ करते हैं तो कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। राहू-केतु समेत अन्य ग्रह भी शांत होते हैं। कूप का जल बेहद पवित्र और वास्तु के लिए भी बेहद लाभदायी माना जाता है। कूप के जल का घर में छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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