अध्यात्म

इन 5 लोगों के घर भोजन करना है पाप, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह?

Avoid Eating at These People’s Homes: अन्न को भगवान का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि कभी भी अन्न का अनादर नहीं करना चाहिए, लेकिन कुछ ऐसे लोग होते हैं, जिनके घर में भोजन करना पाप माना गया है। इन लोगों के घर में अगर आप भोजन करते हैं तो उनके कर्मों में आप भी भागीदार बन जाते हैं। आइए जानते हैं कि वे कौन से लोग हैं, जिनके घर भोजन नहीं करना चाहिए।

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इन लोगों के घर न करें भोजन

Avoid Eating at These People’s Homes: हिंदू धर्म में अन्न को ब्रह्म कहा गया है। गरुड़ पुराण, मनुस्मृति, पराशर संहिता, धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु और पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में भोजन करने के कुछ नियम बताए गए हैं। इन ग्रंथों में साफ तौर पर बताया गया है कि कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं, जिनके घर का आपको अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन व्यक्तियों का अन्न खाने से आपके पुण्य नष्ट होते हैं और पाप लगता है। इनका भोजन करने से मन, बुद्धि और आत्मा तीनों दूषित हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि किन लोगों के घर भोजन करना वर्जित माना गया है।

गलत काम करने वाला व्यक्ति

“चांडालान्नं न भुंजीत तथा च श्वपचस्य च”

जो आदमी गलत आचरण करता है या जिसने अपने लाभ के लिए किसी की जान ले ली हो। उस व्यक्ति का स्पर्श और भोजन दोनों अशुद्ध माने गए। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि ऐसे चांडाल व्यक्ति का अन्न खाने से व्यक्ति को नरक की यातना भोगनी पड़ती है और अगले जन्म में नीच योनियों में जाना पड़ता है। पराशर संहिता में भी कहा गया है कि ऐसे अन्न से शरीर और आत्मा दोनों अपवित्र हो जाते हैं।

भ्रष्टाचारी व्यक्ति

अगर कोई व्यक्ति भ्रष्टाचारी है। गौहत्या या पशु वध करने वाला है। मदिरा पान करने वाला है। वेद बेचने वाला और देवता या ब्राह्मण को अपमानित करने वाला हो। इनके घर का अन्न खाने से खाने वाला स्वयं पतित हो जाता है और उसे चांद्रायण व्रत या गोदान जैसे भारी प्रायश्चित करने पड़ते हैं। पराशर संहिता के अनुसार कि पतित का अन्न खाने से सात जन्मों तक पाप लगता है।

चरित्रहीन व्यक्ति

'परदाररतो यश्च तथा चैवोपपातकी।

तयोर्न भोजनं कार्यं य इच्छेत् आत्मनो हितम्॥'

धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, जो भी स्त्री या पुरुष अपने पति या पत्नी के अलावा किसी और से फिजिकल रिलेशन रखता हो। मतलब चरित्रहीन हो। उसके यहां भोजन नहीं करना चाहिए। पद्म पुराण में कहा गया है कि व्यभिचारी का अन्न विष के समान होता है, जो मन को काम-वासना से भर देता है और बुद्धि को नष्ट कर देता है। ऐसे अन्न से साधना और पुण्य दोनों नष्ट हो जाते हैं।

अधर्म करने वाला

मनुस्मृति (अध्याय 4, श्लोक 253) और याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार जो व्यक्ति अधर्म करता हो, मतलब दूसरों को दुख देता हो। उसका अन्न किसी को भी ग्रहण नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसे अन्न से व्यक्ति का तेज कम होता है और आयु घटती है।

क्रोधी, निंदक और कृतघ्न व्यक्ति

'क्रोधी निंदको दांभिकः तथैव च कृतघ्नकः।

एतेषामन्नमश्नीयात् विष्ठायां मज्जति द्विजः॥'

गरुड़ पुराण (अध्याय 117) और पद्म पुराण में स्पष्ट श्लोक है कि जो व्यक्ति हमेशा क्रोध करता हो, दूसरों की निंदा करता हो, दिखावा करता हो या उपकार भूल जाता हो, उसका अन्न विष के बराबर है। ऐसे व्यक्ति के घर का भोजन करने से व्यक्ति का मन भी वैसा ही हो जाता है और उसके पुण्य नष्ट हो जाते हैं।

गलती से खा लिया तो प्रायश्चित के लिए करें ये काम

गरुड़ पुराण के अनुसार अगर आपने गलती से इन लोगों के घर भोजन कर लिया है तो आपको 3 दिन का उपवास करना चाहिए। इसके साथ ही गाय को दान करना चाहिए। वहीं, पराशर संहिता के अनुसार 12 ब्राह्मणों को भोजन कराना और स्वर्ण दान का उपाय भी अपना सकते हैं।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारी author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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