Vastu Shastra For Sindoor: वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना जरूरी होता है। क्योंकि वास्तु का सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। वास्तु शास्त्र में घर की छोटी से बड़ी चीजों के बारे में विस्तार से बताया गया है। यदि आप इन्हें अनदेखा करते हैं तो बाद में इससे आपको बड़ा नुकसान हो सकता है। वास्तु में घर की दिशा, बनावट, साज- सजावट और रहन-सहन से लेकर कई नियमों के बारे में बताया गया है। साथ ही वास्तु में महिलाओं के श्रृंगार के बारे में भी बताया गया है। सुहागिन महिलाओं का सबसे जरूरी और अहम श्रृंगार सिंदूर माना जाता है, जिसे हर सुहागिन महिला लगाती है।
वास्तु ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म में भी सिंदूर लगाने की परंपरा का विशेष महत्व होता है। लेकिन सिंदूर लगाने के कुछ नियम होते हैं जिसका पालन करना जरूरी होता है। यदि आप नियमों का पालन नहीं करतीं या इसे अनदेखा करती हैं तो बाद में यह बड़े नुकसान का कारण बन सकती है और जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सिंदूर को लेकर इन बातों का रखें ध्यान
- सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए सिंदूर से मांग भरती है। मांग भरने से पति पर आने वाला संकट भी टल जाता है।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार सुहागिन महिलाओं को मांग के बीचों-बीच सिंदूर लगाना चाहिए।
- किसी दूसरी महिला के सिंदूर से भूलकर भी अपनी मांग न भरें। इससे पति को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही अपना सिंदूर भी किसी अन्य सुहागिन महिला को मांग भरने के लिए नहीं देना चाहिए। ऐसा करना अशुभ होता है।
- शादीशुदा महिलाओं को सिंदूर हमेशा अपने या पति के पैसों से ही खरीदें। कभी भी किसी अन्य व्यक्ति के पैसों से सिंदूर नहीं खरीदें।
नहाने के तुंरत बाद न लगाएं सिंदूर
शादीशुदा महिलाएं नहाने के बाद साज श्रृंगार करती हैं। काजल, चूड़ी, बिंदी और सिंदूर लगाती हैं। जोकि हर सुहागिन महिलाओं को करना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि गीले बालों में सिंदूर नहीं लगाए। वास्तु के अनुसार गीले बालों में सिंदूर लगाने से बचना चाहिए। ऐसा करने से घर की सुख-शांति चली जाती है और मन में कई तरह के बुरे विचार आते हैं। इसलिए अगर आपने बाल धुले हैं तो पहले उसे सुखा लें या पानी को अच्छे से पोंछ ले। इसके बाद ही सिंदूर से मांग भरे।
(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

