Never Give These Things From Anyone: किसी को दान देने से आंतरिक प्रसन्नता मिलती है। कहा जाता है कि जरूरतमंदों को दान देने वाले व्यक्ति से भगवान भी प्रसन्न होते हैं। हम अपने दैनिक जीवन में एक-दूसरे से लेन-देन जरूर करते हैं। क्योंकि जीवन में किसी को भी किसी चीज की जरूरत पड़ सकती है। सबसे पहले हम अपने आस-पड़ोस और संबंधियों से ही मदद मांगते हैं। दान देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। बचपन से ही हमें लेन-देन का भाव सिखाया भी जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत समय पर दान देना आपके लिए मुसीबत बन सकता है। यहां तक कि इससे आप कंगाल भी हो सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन दान देते समय इस बात का जरूर ध्यान रखें कि किस समय किन चीजों का दान करना उचित है। क्योंकि कई बार गलत समय पर दिया गया दान अनजाने में बर्बादी का कारण बन जाता है। कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिन्हें भूलवश भी सूर्यास्त के बाद किसी को नहीं देना चाहिए। फिर चाहे वो व्यक्ति आपके पड़ोसी या करीबी ही क्यों ना हों। शास्त्रों में भी इन चीजों को सूर्यास्त के बाद दान करना शुभ नहीं माना गया है। जानते हैं किन चीजों को शाम या फिर सूर्यास्त के बाद दान नहीं करना चाहिए।
उधार लेन-देन
सूर्यास्त के बाद उधार लेने और देने दोनों से बचें। ऐसा कहा जाता है कि शाम के समय दूसरों से लिए गए उधार के रुपए से किया गया कार्य सफल नहीं होता है। वास्तु के अनुसार, सूर्यास्त के बाद उधार लिए गए पैसों से दूसरों की नेगेटिविटी भी आपके पास पहुंच जाती है।
दूध-दही का दान
सूर्यास्त के बाद भूलकर भी किसी को दूध या दही का दान न करें। दरअसल दूध का संबंध चंद्रमा और सूर्य से होता है। वहीं दही का संबंध शुक्र से होता है। कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद दूध और दही के दान से घर से बरकत चली जाती है और जीवन में सुख व वैभव की कमी आने लगती है।
लहसुन और प्याज का दान
सूर्यास्त के बाद अगर आपके पड़ोसी भी लहसुन या प्याज मांगे तो नहीं देना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार लहसुन और प्याज का संबंध केतु से होता है। केतु ऊपरी ताकत का स्वामी कहा जाता है। इस ग्रह के भीतर ही जादू-टोना आता है। सूर्यास्त के बाद इन चीजों का लेन-देन अशुभ होता है।
हल्दी का दान
सूर्यास्त के बाद किसी को भी हल्दी का दान न दें। ऐसा करने से कुंडली में बैठा गुरु कमजोर होता है और इससे घर की तरक्की में बाधा आती है। घर पर आर्थिक संकट भी छा जाता है।
(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

