Ambubachi Mela: असम की राजधानी गुवाहाटी में नीलांचल पहाड़ी पर स्थित मां कामाख्या का मंदिर भारत के शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इसी पवित्र धाम में हर वर्ष आयोजित होने वाला अंबुबाची मेला आस्था, तंत्र साधना और आध्यात्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम माना जाता है। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, तांत्रिक और पर्यटक कामाख्या धाम पहुंचते हैं। अंबुबाची मेले को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और रहस्यमयी परंपराएं प्रचलित हैं, जो इसे अन्य मेलों से अलग बनाती हैं। आइए जानते हैं कब से शुरू होगा अंबुबाची मेला (Ambubachi Mela Date 2026) और क्या है इस मेले से जुड़ा रहस्य...
कब शुरू होगा अंबुबाची मेला
अंबुबाची मेला 2026 का शुभारंभ 22 जून की रात से होने की संभावना है। इस अवसर पर मां कामाख्या मंदिर के कपाट 22 जून को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। 4 दिन तक चलने वाला ये मेला अपनी खास धार्मिक मान्यता के लिए अलग पहचान रखता है। इस मेले का समापन 26 जून को होगा, जिसके बाद पूरे विधि-विधान से कामाख्या मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।
अंबुबाची मेले से जुड़ा रहस्य
अंबुबाची मेले के अवसर पर कामाख्या मंदिर के कपाट 22 जून को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। मान्यता है कि इस दौरान देवी मां रजस्वला होती हैं, इसलिए तीन दिनों तक मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन नहीं होते हैं। इसके बाद 25 जून को विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और शुद्धिकरण प्रक्रिया के पश्चात मंदिर के द्वार पुनः खोले जाएंगे। वहीं मेले का समापन 26 जून की सुबह माना जा रहा है। इन तीन दिनों के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत, तांत्रिक और श्रद्धालु मंदिर परिसर के आसपास जप, तप, ध्यान और साधना में लीन रहते हैं।
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वितरित किया जाता है खास प्रसाद
मंदिर के कपाट खुलने के बाद भक्तों को मां कामाख्या का विशेष प्रसाद वितरित किया जाता है। इस प्रसाद में अंगोदक (पवित्र जल) और अंगवस्त्र (देवी से संबंधित पवित्र वस्त्र) शामिल होते हैं। श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता है कि इन पवित्र वस्तुओं को घर में रखने से सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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क्यों बदल जाता है ब्रह्मपुत्र नदी का रंग
अंबुबाची मेले से जुड़ी सबसे चर्चित और रहस्यमयी मान्यताओं में ब्रह्मपुत्र नदी के जल का रंग हल्का लाल दिखाई देना शामिल है। भक्तों का मानना है कि यह परिवर्तन मां कामाख्या के रजस्वला काल का प्रतीक है और देवी शक्ति की उपस्थिति का संकेत माना जाता है। इसी धार्मिक विश्वास के कारण अंबुबाची के ये दिन विशेष रूप से पवित्र, आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर और साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि इस मान्यता को श्रद्धा और आस्था से जोड़कर देखा जाता है, जिसके चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत पर्व में भाग लेने के लिए कामाख्या धाम पहुंचते हैं।
