Ahoi Ashtami Par Taare Na Dikhein To Kya Karein : अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं और संतान की खुशहाली के लिए दिनभर व्रत रखती हैं। शाम को पूजा और व्रत कथा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने की परंपरा है।
हालांकि, कई बार मौसम खराब होने, आसमान में बादल छाए रहने, धुंध या प्रदूषण के कारण तारे दिखाई नहीं देते। ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि जब आसमान में तारे ही नजर नहीं आ रहे हों, तो अर्घ्य कैसे दें और व्रत का पारण किस तरह करें? क्या तारों के दर्शन किए बिना व्रत पूरा माना जाएगा?
इस साल अहोई अष्टमी का व्रत आज यानी 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जा रहा है। अगर आपके शहर में भी आसमान साफ नहीं है और तारे नजर नहीं आ रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अपने शहर के पंचांग में दिए गए तारा दर्शन के समय को आधार बनाकर अहोई माता का ध्यान करते हुए अर्घ्य दे सकती हैं। आइए जानते हैं तारे दिखाई न देने पर पूजा और व्रत का पारण कैसे करना चाहिए।
अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य कैसे दिया जाता है
अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। शाम के समय अहोई माता की पूजा और व्रत कथा पूरी करने के बाद तारों के दर्शन किए जाते हैं। इसके लिए पूजा के समय ही अर्घ्य की तैयारी कर लें।
- सबसे पहले एक साफ लोटे में शुद्ध जल भर लें।
- इसमें अपनी परंपरा के अनुसार थोड़ा कच्चा दूध मिला सकती हैं।
- जल में रोली, अक्षत और लाल फूल डालें।
- अर्घ्य देते समय हाथ में थोड़े से गेहूं या चावल के दाने और मिठाई रखें।
- अब उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण या पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़ी हों।
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार स्वच्छ पाटे या आसन के पास खड़े होकर तारों की ओर जल अर्पित करें।
- अर्घ्य देते समय ध्यान रखें कि जल पैरों पर न गिरे।
- इस दौरान अहोई माता का ध्यान करें और 'ॐ अहोई मात्रे नमः' मंत्र का जाप कर सकती हैं।
- अर्घ्य देने के बाद हाथ जोड़कर माता को प्रणाम करें और संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत तथा खुशहाल जीवन की प्रार्थना करें।
इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार संतान के हाथ से जल या प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोल सकती हैं।
अहोई अष्टमी पर तारे न दिखें तो क्या करें
अगर आसमान में बादल छाए हैं या प्रदूषण और धुंध की वजह से तारे नजर नहीं आ रहे हैं, तो सबसे पहले अपने शहर का पंचांग देखें। उसमें तारों के दर्शन का जो समय दिया गया है, उसे आधार बना सकती हैं। तारे नजर न आने पर ये तरीके अपना सकती हैं।
पंचांग के समय पर दें अर्घ्य: अपने शहर के पंचांग में बताए गए तारा दर्शन के समय पर पूजा की तैयारी करें। निर्धारित समय होने पर पूर्व या ईशान दिशा की ओर मुख करके खड़ी हों। अहोई माता और तारों का मन में ध्यान करें और आकाश की ओर जल अर्पित करें। इस दौरान संतान की मंगलकामना करें।
कुछ देर आसमान साफ होने का इंतजार करें: अगर बादल हल्के हैं और मौसम साफ होने की संभावना है, तो कुछ देर इंतजार कर सकती हैं। किसी खुले और सुरक्षित स्थान से आसमान देखें। हालांकि, तारे दिखाई न देने पर कई घंटों तक परेशान होकर इंतजार करना जरूरी नहीं है। स्थानीय पंचांग के समय और अपने घर की परंपरा के अनुसार अर्घ्य दे सकती हैं।
दूसरे शहर में तारों के दर्शन का विकल्प: अगर आपके शहर में बादल हैं, लेकिन परिवार के किसी सदस्य के शहर में आसमान साफ है, तो वीडियो कॉल के जरिए वहां के तारों के दर्शन करने का विकल्प अपना सकती हैं। कुछ परिवार इसे वैकल्पिक तरीका मानते हैं। यह आधुनिक सुविधा है, कोई अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं। इसे अपनाना है या नहीं, यह अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तय करें।
क्या बिना तारे देखे अहोई अष्टमी का व्रत पूरा माना जाएगा
अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है, लेकिन मौसम खराब होने या आसमान में बादल छाए रहने की वजह से तारे दिखाई न दें, तो इसे अपनी पूजा में कमी मानकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में अपने शहर के पंचांग में दिए गए तारा दर्शन के समय पर अहोई माता का स्मरण करें और आकाश की ओर जल अर्पित करें। संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। इसके बाद अपने परिवार में चली आ रही परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें। अहोई अष्टमी की पूजा में श्रद्धा, संकल्प और माता के प्रति भक्ति को भी महत्व दिया जाता है। मौसम की वजह से तारों का दिखाई न देना आपके नियंत्रण में नहीं है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इस स्थिति को लेकर अलग परंपराएं हो सकती हैं।
क्या चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोल सकते हैं अहोई अष्टमी का व्रत
अहोई अष्टमी पर सामान्य रूप से तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। हालांकि, कुछ परिवारों में चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य देने और फिर पारण करने का रिवाज भी है। ऐसे में अगर आपके परिवार में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है, तो अपने शहर के चंद्रोदय का समय देख लें। चंद्रमा के दर्शन होने पर जल अर्पित करें और अहोई माता से संतान की खुशहाली की प्रार्थना करें। इसके बाद व्रत खोलें। ध्यान रखें कि चंद्रमा को अर्घ्य देना हर परिवार के लिए तारों के अर्घ्य का अनिवार्य विकल्प नहीं है। इस मामले में अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।
अहोई अष्टमी पर पारण कैसे करें
अहोई माता की पूजा, व्रत कथा और तारों या चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पारण करें। इसके लिए सबसे पहले हाथ जोड़कर अहोई माता का आभार व्यक्त करें और संतान की खुशहाली की प्रार्थना करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार संतान के हाथ से जल ग्रहण करें या पूजा में चढ़ाया हुआ प्रसाद लें। कुछ परिवारों में मिठाई या भोजन से व्रत खोलने का रिवाज भी है। आप अपने घर में चली आ रही रीति के अनुसार भोजन ग्रहण कर सकती हैं।
