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Abhaya Mudra: क्या है अभय मुद्रा जिससे राहुल गांधी ने BJP पर बोला हमला, जानिए कैसे हुई इसकी उत्पत्ति, क्या है इसका महत्व और फायदे

Abhay Mudra: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सदन में भाषण देते हुए अभयमुद्रा का जिक्र किया। अभय मुद्रा का जिक्र कर राहुल गांधी ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि इस्लाम में भी अभय मुद्रा है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है यह अभय मुद्रा और क्या हैं इसके फायदे।

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अभय मुद्रा का महत्व, लाभ और उत्पत्ति

Abhay Mudra Meaning in Hindi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अभय मुद्रा का जिक्र कर बीजेपी पर तीखा हमला किया। राहुल के बयान पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। पीएम मोदी से गृहमंत्री अमित शाह तक ने आपत्ति जताई। राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए अभय मुद्रा की चर्चा की। भगवान शिव से गुरु नानक तक, कई उदाहरण देते हुए राहुल ने कहा कि सारे धर्मों में अभय रहने की बात की जाती है। राहुल ने कहा कि अभय मुद्रा का अर्थ होता है- डरो मत डराओ मत। आइए जानते हैं कि अभय मुद्रा क्या है और इसके क्या फायदे हैं।

क्या होती है अभय मुद्रा

यह सबसे प्राचीन मुद्राओं में से एक है। अभय मुद्रा, हिंदू और बौद्ध धर्म में एक महत्वपूर्ण हस्त मुद्रा है, जो सुरक्षा, शांति और भय निवारण का प्रतीक है। और आसानी से समझें तो भयरहित होने की मुद्रा है। यह भारत के सभी धर्मों की मूर्तियों में देखने को मिलती है। इस मुद्रा में दाहिना हाथ कंधे की ऊंचाई पर उठाया जाता है, हथेली बाहर की ओर होती है और उंगलियां सीधी होती हैं।

Abhaya-Mudra

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अभय मुद्रा का महत्व

सबसे प्राचीन मानी जाने वाली इस अभय मुद्रा का बहुत अधिक महत्व बहुत है। हिंदू धर्म में इस मुद्रा को सुरक्षा और शांति का प्रतीक माना गया है। माना जाता है कि इस मुद्रा का अभ्यास न सिर्फ बाहरी बल्कि आंतरिक सुरक्षा भी प्रदान करता है। अभय मुद्रा भावनात्मक स्थिरता को बढ़ा कर नकारात्मक भावनाओं को प्रबंधित करने में मदद करती है। यह मुद्रा हमारे जीवन में निडरता और आंतरिक शक्ति को विकसित करने का भी काम करती है।

अभय मुद्रा के लाभ

योग के अनुसार अभय मुद्रा करने से मन में निडरता, सुरक्षा और आंतरिक शक्ति का भाव मजबूत होता है। तमाम योगाचार्य बताते हैं कि इस मुद्रा का नियमित अभ्यास हमारे मन और शरीर को संतुलित रखता है और भय को दूर करता है। योग और ध्यान अभ्यास के दौरान अभय मुद्रा का उपयोग जीवन ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करने और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

अभयमुद्रा की उत्पत्ति

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह मुद्रा बौद्ध धर्म में सबसे पहले देखी गई थी। बताया जाता है कि भगवान बुद्ध ने अपने भतीजे और शिष्य देवदत्त के छोड़े हुए उग्र हाथी को शांत करने के लिए इस मुद्रा का उपयोग किया था। सिर्फ बौद्ध धर्म ही नहीं इस मुद्रा का सभी धर्मों में महत्व। हमारे प्राचीन मंदिरों में भगवान शिव भी अक्सर अभय मुद्रा में ही दिखते हैं, जो उनके दिव्य सुरक्षा और निडरता का प्रतीक है। यह मुद्रा भगवान शिव की भी एक प्रमुख मुद्रा है, जिसे रुद्र मुद्रा कहा जाता है।

इसी अभय मुद्रा को दिखाने के लिए राहुल गांधी ने भगवान शिव, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, गुरु नानक, इस्लाम, यीशू आदि का उदाहरण दिया. उन्होंने इन देवताओं के चित्र भी सदन में दिखाए।

Suneet Singh
सुनीत सिंह author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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