अध्यात्म

आज से कितने दिन बाद होली है, होली में कितने दिन बचे हैं, जानें 2026 में होली- होलिका दहन और होलाष्टक की तारीख

Aaj Se Holi Kitne Din Baad Hai: देशभर में होली की तैयारियां चल रही हैं लेकिन असल में ये कितने दिन बाद है, इसे लेकर थोड़ी कंफ्यूजन है। आज से होली कितने दिन के बाद है और इसे आने में कितने दिन बचे हुए हैं, ये आप यहां से जान सकते हैं।

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आज से कितने दिन बाद होली है (pc: canva)

Aaj Se Holi Kitne Din Baad Hai: होली का त्योहार हर किसी को खुश कर देता है। महीनों पहले से इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। साल 2026 में होली कब और किस दिन है, इसकी डेट को लेकर हर कोई उलझन में है। वहीं, आज से कितने दिन बाद होती है इसकी गणना करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में हम आपका काम आसान कर देते हैं। यहां होली, होलिका दहन और होलाष्टक.. तीनों की पूरी जानकारी दी गई है।

2026 में होली कब है?

साल 2026 में होली, रंगोत्सव और धुलैण्डी का त्योहार 4 मार्च के दिन मनाया जा रहा है।

आज से कितने दिन बाद होली है?

आज 20 फरवरी है, यानी आज से लगभग 12 दिन बाद होली है।

होलिका दहन कब होगा?

हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन किया जाता है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा।

होलिका दहन 2026 पर भद्रा समय

होलिका दहन पर भद्रा का 3 मार्च को समय 01:25am से 04:30am तक रहेगा। भद्रा के समय होलिका पूजा और होलिका दहन नहीं किया जाता है।

होली से कितने दिन पहले होलाष्टक शुरू होता है?

होलाष्टक होली से 8 दिन पहले शुरू होता है। वहीं, इसका समापन होलिका दहन के दिन यानी 3 मार्च 2026 को होगा।

होलाष्टक कब है 2026 में?

इस साल होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होगा। होलाष्टक के दौरान उग्र ग्रहों और नकारात्मक ऊर्जा के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई, नए व्यवसाय की शुरुआत, वाहन या संपत्ति की खरीदारी, यज्ञ-हवन और 16 संस्कार जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।

होलाष्टक अशुभ क्यों है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद को भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए आठ दिन तक कठिन यातनाएं थीं। आठवें दिन हिरण्यकश्यप की होलिका भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठी और वरदान होने के बावजूद जल गई। वहीं होलाष्टक में शुभ काम न करने की एक अन्य मान्यता कामदेव से जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि देवताओं के कहने पर शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव ने आठ दिनों तक प्रयास किया था। इस पर क्रोधित होकर भगवान शिव ने जब कामदेव को भस्म किया तो उस दिन फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि थी। इसके अलावा, इस दौरान मौसम में आ रहे बदलाव की वजह से ग्रहों की उग्रता, नकारात्मक ऊर्जा और अशांति की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य जैसे शादी, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, व्यवसाय या नए वाहन की खरीद आदि टाल दिए जाते हैं।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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