अध्यात्म

आज क्या है 5 फरवरी 2026 को, आज कौन सा व्रत है, आज कौन सा त्योहार है, जानें आज का वार और तिथि

Aaj Kya hai 05 February 2026 (Aaj Ganesh Chaturthi Hai Kya): आज अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, 5 फरवरी 2026 की तारीख है और आज गुरुवार है। हिंदी पंचांग के अनुसार आज फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि या चतुर्थी है। इस तिथि को भगवान गणेश का प्रिय माना जाता है। वहीं इस दिन विष्णु जी का व्रत भी रखा जाता है। यहां देखें कि आज कौन सा व्रत रखें, आज क्या है, आज कौन सा त्योहार है - आदि की विस्तृत जानकारी।

Aaj Kya hai 5 february 2026, bhagwan ganesh photo

आज क्या है 5 फरवरी 2026 को, कौन सा व्रत है

Aaj Kya hai 05 February 2026 (Aaj Ganesh Chaturthi Hai Kya): आज 5 फरवरी 2026 का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि यानी चतुर्थी है। यह दिन विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है और उनके लिए संकष्टी का व्रतरखा जाता है। आज 5 फरवरी 2026 को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत के साथ गुरुवार का विशेष दिन भी है। गुरुवार को भगवान विष्णु का दिन माना जाता है और इस दिन उनकी पूजा की जाती है। इस तरह आज दोनों का संयुक्त प्रभाव जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, बाधा निवारण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

आज क्या है 5 फरवरी 2026 को

आज 5 फरवरी 2026 को गुरुवार है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। चतुर्थी तिथि का आरंभ 5 फरवरी की रात 12:09 बजे से हो चुका है। इस तिथि का समापन 6 फरवरी 2026 की रात 12:22 बजे होगा। आज का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और संकष्टी व्रत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। चूंकि आज गुरुवार है, इसलिए भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की आराधना का भी विशेष महत्व रहता है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन व्रत, पूजा और मन की शांति के लिए शुभ माना जाता है।

आज कौन सा व्रत है 5 फरवरी 2026 को

5 फरवरी 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे संकटों से मुक्ति व मनोकामना पूर्ति के लिए रखा जाता है। इसके साथ ही आज गुरुवार होने के कारण कई श्रद्धालु गुरुवार व्रत भी रखते हैं, जो भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा पाने के लिए किया जाता है। इस तरह आज का दिन संकष्टी चतुर्थी व्रत और गुरुवार व्रत - दोनों के लिए धार्मिक रूप से खास माना जाता है।

आज द्विजप्रिय संकष्टी का व्रत कैसे करें 5 फरवरी 2026 को

5 फरवरी 2026 को संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत की शुरुआत सुबह से की जाती है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मन में संकल्प लें कि आप यह व्रत भगवान गणेश की कृपा और जीवन की बाधाओं से मुक्ति के लिए रख रहे हैं। दिन भर अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें। कुछ लोग निर्जल व्रत करते हैं, जबकि कई श्रद्धालु फल, दूध या साबूदाना जैसे सात्विक आहार ग्रहण करते हैं। व्रत के दौरान मन को शांत रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करें।

शाम के समय घर के पूजा स्थान को साफ कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। लाल या सफेद वस्त्र बिछाएं, फूल, दुर्वा, मोदक या लड्डू अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी के मंत्रों का जप करें या संकष्टी नाशन गणपति स्तोत्र का पाठ करें। रात को चंद्रमा के उदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है। 5 फरवरी 2026 को चंद्रमा का उदय लगभग रात 9:35 बजे माना जा रहा है। चंद्र दर्शन कर जल या दूध से अर्घ्य दें, फिर भगवान गणेश को स्मरण करते हुए व्रत खोलें।

आज गुरुवार का व्रत कैसे करें 5 फरवरी 2026

आज 5 फरवरी 2026 को गुरुवार है और यह दिन भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। गुरुवार का व्रत ज्ञान, सुख-समृद्धि, वैवाहिक शांति और जीवन में स्थिरता के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और भाग्य का साथ मिलने लगता है।

गुरुवार के व्रत की शुरुआत सुबह स्नान के बाद होती है। स्वच्छ और हल्के पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद मन में संकल्प लें कि आप यह व्रत भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा पाने के लिए कर रहे हैं। पूजा स्थान को साफ कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

पूजा के समय विष्णु जी को पीले फूल, चने की दाल, बेसन के लड्डू, हल्दी या पीले फल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप या विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है। कई लोग गुरु बृहस्पति देव का ध्यान कर उनका स्मरण भी करते हैं, जिससे बुद्धि और विवेक में वृद्धि मानी जाती है।

दिन भर सात्विक भोजन करें या अपनी श्रद्धा अनुसार व्रत रखें। कुछ भक्त केवल एक समय भोजन करते हैं, जबकि कुछ फलाहार लेते हैं। इस दिन झूठ, क्रोध और कटु वाणी से दूर रहना व्रत का अहम हिस्सा माना जाता है। जरूरतमंद को पीली दाल, वस्त्र या भोजन दान करना भी शुभ फल देता है।

शाम को दीपक, धूप लगाकर भगवान विष्णु का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें। इसके बाद सादे और सात्विक भोजन के साथ व्रत का समापन करें। विश्वास है कि नियमित रूप से किया गया गुरुवार का व्रत जीवन में स्थिरता, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है।

जानिए मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों का वार्षिक राशिफल। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

मेधा चावला
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

End of Article