Aaj ka Panchang 6 April 2025 (आज का पंचांग 6 अप्रैल 2025): चैत्र नवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का एक प्रमुख पर्व है, जो वसंत ऋतु में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाया जाता है। नवमी तिथि को नवरात्रि की अंतिम तिथि मानी जाती है, जिसे राम नवमी के रूप में भी व्यापक रूप से मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। इस दिन भक्त व्रत का समापन करते हैं, मां सिद्धिदात्री की विधिपूर्वक पूजा करते हैं तथा कन्या पूजन के माध्यम से माता के नौ रूपों को भक्ति भाव से श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। नवमी तिथि का पंचांग विशेष रूप से शुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी प्रदान करता है, जो पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन, व्रत पारण और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। पंचांग के अनुसार दिनचर्या निर्धारित करना सनातन धर्म में प्राचीन परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में यहां पढ़ें 6 अप्रैल 2025 का पंचांग।
आज का पंचांग 6 अप्रैल 2025 (Aaj ka Panchang 6 April 2025)
- संवत - पिङ्गला विक्रम संवत 2082
- माह - चैत्र
- तिथि - चैत्र माह, शुक्ल पक्ष, नवमी
- पर्व - राम नवमी
- दिवस - रविवार
- सूर्योदय - 06:09 ए.एम सूर्यास्त - 6:39 पी.एम
- नक्षत्र - पुनर्वसु
- चंद्र राशि - कर्क, स्वामी - चंद्रमा
- सूर्य राशि- मीन, स्वामी ग्रह-गुरु
- करण - बव
- योग- सुकर्मा
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत - 12:01 पी.एम से 12:50 पी.एम तक
- विजय मुहूर्त - 02:23 पी.एम से 03:26 पी.एम तक
- गोधुली मुहूर्त - 06:22 पी.एम से 07:22 पी.एम तक
- ब्रह्म मुहूर्त - 4:03 ए.एम से 05:09 ए.एम तक
- अमृत काल - 06:03 ए.एम से 07:44 ए.एम तक
- निशीथ काल मुहूर्त - रात 11:43 से 12:25 तक रात
- संध्या पूजन - 06:30 पी.एम से 07:05 पी.एम तक
राम नवमी पूजा मुहूर्त 2025 (Ram Navami Puja Muhurat 2025)
राम नवमी के दिन हवन पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस दिन रवि पुष्य योग पूरे दिन रहेगा और सर्वार्थ सिद्धि योग भी पूरे दिन रहेगा।
दिशा शूल - पश्चिम दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशा शूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त - राहुकाल - सायंकाल 04:30 बजे से 06:00 बजे तक
क्या करें - आज चैत्र राम नवमी है। भगवान श्री राम सम्पूर्ण ब्रह्म व विष्णु अवतार सगुण स्वरूप सच्चिदानन्द परम पिता परमेश्वर हैं। नवमी व्रत अवश्य रहें। भगवान श्री राम का जन्मोत्सव है। भगवान राम के अवतरण दिवस की विधिवत पूजा का बहुत महत्व है। माता दुर्गा जी की उपासना करें। ये व्रत, उपासना व शक्ति पूजा का पुण्य काल है। नित्यप्रतिदिन दुर्गासप्तशती का पाठ करें। माता जगदंबा को समर्पित ये महान उपवास शक्ति उपासना का पुनीत अवसर है। मन में हर पल माता दुर्गा के किसी भी नाम का जप करें। नियम पूर्वक व्रत व दान -पुण्य करना बहुत फलित होता है। शिव मंदिर परिसर में बेल, बरगद ,आम, पाकड़ व पीपल का पेड़ लगाएं। अपने घर के मंदिर में अखण्ड दीप जलाइए। दुर्गासप्तशती का नित्य पाठ करें। सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 09 पाठ अवश्य करें। माता दुर्गा के 32 व 108 नामों का जप करें। सप्तश्लोकी दुर्गा का नियमित 09 पाठ करें। ब्रह्म मुहूर्त में श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ बहुत फलदायी है। कलश स्थापना वाले घरों में नित्य दुर्गा सप्तशती का पाठ व अखण्ड दीपक जलाना श्रेयस्कर है। माता दुर्गा की भक्ति प्राप्त करने के लिए सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का पाठ अत्यंत आवश्यक है। इस समय मन का सात्विक होना बहुत आवश्यक है। मंदिर में कीर्तन व फलाहार कराएं। माता दुर्गा मंदिर में माता की प्रतिमा की एक परिक्रमा करें। नारियल व लौंग माता को बहुत प्रिय है। आज हवन करेंगे। 09 दिन व्रत रखने वाले आज नहीं बल्कि कल पारण करेंगे। नवमी हवन करने के बाद भंडारा करें। अन्न दान करें।
क्या न करें - किसी भी रिश्ते के साथ अमर्यादित व्यवहार न करें।
