अध्यात्म

Aaj Ka Panchang : सावन 2026 की शिवरात्रि आज, पंचांग से जानिए आज पूजा-पाठ किस समय करें

Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 11 August 2026 : 11 अगस्त दिन मंगलवार को सावन की शिवरात्रि है। आइए पंचांग से जानते हैं कि इस दिन पूजा-पाठ का शुभ मुहूर्त क्या है।

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11 अगस्त का पंचांग

Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 11 August 2026 : 11 अगस्त 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो 12 अगस्त की रात 01:52 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। आज सुबह 10:09 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, इसके बाद पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा। आज सिद्धि योग और कई शुभ-अशुभ योगों का संयोग बन रहा है। खास बात यह है कि आज सावन की शिवरात्रि है। भगवान शिव की पूजा और रात्रि जागरण के लिए आज का दिन विशेष माना जाता है। आइए जानते हैं आज का पूरा पंचांग, शुभ-अशुभ समय और ग्रहों की स्थिति क्या रहने वाली है।

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय (Sunrise and Moonrise)

आज सूर्य का उदय सुबह 05:48 बजे और सूर्यास्त शाम 07:04 बजे होगा। चंद्रमा का उदय 12 अगस्त की सुबह 05:07 बजे होगा, जबकि चन्द्रास्त शाम 06:08 बजे होगा।

तिथि, नक्षत्र और योग (Tithi, Nakshatra and Yog)

आज कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 12 अगस्त की रात 01:52 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 10:09 बजे तक रहेगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग की बात करें तो सिद्धि योग शाम 06:51 बजे तक रहेगा। इसके बाद व्यतीपात योग प्रारंभ होगा।

करण (Karan)

विष्टि करण दोपहर 03:22 बजे तक रहेगा। इसके बाद शकुनि करण प्रारंभ होगा, जो 12 अगस्त की रात 01:52 बजे तक रहेगा। इसके बाद चतुष्पाद करण प्रारंभ होगा।

वार एवं पक्ष (Day and Paksha)

आज मंगलवार है और कृष्ण पक्ष चल रहा है।

चन्द्र मास, सम्वत (Lunar Month and Samvat)

आज विक्रम संवत 2083 सिद्धार्थी, शक संवत 1948 पराभव और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। चन्द्र मास श्रावण (पूर्णिमांत) और आषाढ़ (अमान्त) है। प्रविष्टे/गते 27 है।

राशि तथा ग्रह स्थिति (Rashi and Planetary Positions)

आज चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। सुबह 10:09 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र और इसके बाद पुष्य नक्षत्र में रहेंगे। सूर्य कर्क राशि में स्थित हैं और अश्लेषा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। सूर्य का पुष्य नक्षत्र में गोचर दोपहर 03:35 बजे तक रहेगा।

ऋतु तथा अयन (Season and Ayana)

द्रिक ऋतु के अनुसार वर्षा ऋतु तथा वैदिक ऋतु के अनुसार ग्रीष्म ऋतु चल रही है। द्रिक और वैदिक दोनों मान्यताओं के अनुसार दक्षिणायण का प्रभाव बना हुआ है। दिनमान 13 घंटे 16 मिनट 17 सेकंड और रात्रिमान 10 घंटे 44 मिनट 15 सेकंड रहेगा। मध्याह्न 12:26 बजे होगा।

11 अगस्त के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:22 बजे से 05:05 बजे तक

प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:44 बजे से 05:48 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:39 बजे से 03:32 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 बजे से 07:26 बजे तक

सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:04 बजे से 08:09 बजे तक

अमृत काल: सुबह 07:59 बजे से 09:25 बजे तक

निशिता मुहूर्त: 12 अगस्त की रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक और 02:10 बजे से 03:37 बजे तक

11 अगस्त के अशुभ मुहूर्त (Inauspicious Timings)

राहुकाल: दोपहर 03:45 बजे से 05:25 बजे तक

यमगण्ड: सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

गुलिक काल: दोपहर 12:26 बजे से 02:06 बजे तक

आडल योग: सुबह 10:09 बजे से 12 अगस्त की सुबह 05:49 बजे तक

विडाल योग: सुबह 05:48 बजे से 10:09 बजे तक

दुर्मुहूर्त: सुबह 08:27 बजे से 09:20 बजे तक

वर्ज्य: शाम 05:26 बजे से 06:53 बजे तक और रात 11:22 बजे से 12:05 बजे तक

भद्रा: सुबह 05:48 बजे से दोपहर 03:22 बजे तक

आनन्दादि एवं तमिल योग (Anandadi and Tamil Yog)

आनन्दादि योग में स्थिर योग सुबह 10:09 बजे तक रहेगा। इसके बाद वर्धमान योग प्रारंभ होगा। तमिल योग में अमृत योग सुबह 10:09 बजे तक रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग प्रारंभ होगा। जीवनम सुबह 10:09 बजे तक अर्ध जीवन और नेत्रम नेत्रहीन है।

निवास और शूल (Nivas and Shool)

आज दिशा शूल उत्तर दिशा में रहेगा।

चन्द्र वास: उत्तर दिशा में रहेगा।

राहु वास: पश्चिम दिशा में रहेगा।

अग्निवास: 12 अगस्त की रात 01:52 बजे तक आकाश में रहेगा।

भद्रावास: दोपहर 03:22 बजे तक मृत्यु लोक में रहेगा।

शिववास: 12 अगस्त की रात 01:52 बजे तक श्मशान में रहेगा। इसके बाद गौरी के साथ रहेगा।

कुम्भ चक्र: कण्ठ में रहेगा।

सावन की शिवरात्रि का विशेष उपाय

आज सावन की शिवरात्रि होने के कारण भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। शिवरात्रि की रात्रि में निशिता काल के दौरान भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प आदि भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी दिए गए पंचांग पर आधारित है और सामान्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दी गई है। क्षेत्र और पंचांग भेद के अनुसार समय में अंतर संभव है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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