रमजान का महीना मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और आत्मसंयम का पाक वक्त माना जाता है। इस पूरे महीने रोजेदार सुबह सहरी करके रोजा शुरू करते हैं और पूरे दिन बिना कुछ खाए-पीए अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद मगरिब की नमाज के बाद रोजा खोला जाता है, जिसे इफ्तार कहा जाता है।
आज 10 मार्च 2026 को रमजान का 20वां रोजा रखा जा रहा है। ऐसे में रोजेदारों के लिए इफ्तार का सही समय जानना बेहद जरूरी होता है, ताकि वे सही वक्त पर रोजा खोल सकें। दरअसल इफ्तार का समय सूर्यास्त के साथ जुड़ा होता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में इसमें कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। आगे जानें अपने शहर के अनुसार इफ्तारी का सही-सही समय...
| शहर | आज का इफ्तार समय (अनुमानित) |
| दिल्ली | शाम 6:28 बजे के बाद |
| नोएडा | शाम 6:27 बजे के बाद |
| चंडीगढ़ | शाम 6:29 बजे के बाद |
| लखनऊ | शाम 6:13 बजे के बाद |
| कानपुर | शाम 6:16 बजे के बाद |
| जयपुर | शाम 6:34 बजे के बाद |
| भोपाल | शाम 6:35 बजे के बाद |
| पटना | शाम 5:55 बजे के बाद |
| कोलकाता | शाम 5:45 बजे के बाद |
| हैदराबाद | शाम 6:26 बजे के बाद |
| चेन्नई | शाम 6:20 बजे के बाद |
| बेंगलुरु | शाम 6:31 बजे के बाद |
| मुंबई | शाम 6:47–6:48 बजे के बाद |
| अहमदाबाद | शाम 6:48 बजे के बाद |
आपको ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग इलाकों के अनुसार समय में 1-2 मिनट का अंतर हो सकता है, इसलिए लोग एहतियात के तौर पर सूर्यास्त के कुछ मिनट बाद इफ्तार करते हैं।
इफ्तार की दुआ क्या है
इफ्तार के समय आमतौर पर यह दुआ पढ़ी जाती है- “अल्लाहुम्मा लका सुम्तु वा अला रिज्किका अफ्तर्तु।” इस दुआ का अर्थ है ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा और तेरी ही दी हुई रोजी से इफ्तार कर रहा हूं। इस दुआ को पढ़ने के बाद रोजा पूरा माना जाता है और फिर इफ्तार किया जाता है।
रमजान में इफ्तार का महत्व
रमजान में इफ्तार का समय आध्यात्मिक रूप से बेहद खास माना जाता है। रोजेदार पूरे दिन रोजा रखने के बाद जब इफ्तार करते हैं, तो उस समय की गई दुआ को काफी अहम माना जाता है। इस्लामी मान्यता के अनुसार इफ्तार के वक्त की गई दुआ के कबूल होने की उम्मीद सबसे ज्यादा होती है। इसी वजह से मुसलमान इस समय अपने परिवार, समाज और पूरी दुनिया की भलाई के लिए दुआ करते हैं और अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं।
