Sixth Roza Of Ramadan : 19 फरवरी 2026 से रमजान 1447 हिजरी की शुरुआत हुई थी। उसी क्रम में आज 24 फरवरी 2026 को छठवां रोजा रखा जा रहा है। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है और इसे रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना कहा जाता है। इस पूरे महीने मुसलमान फज्र से मगरिब तक रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने अंदर सब्र, परहेजगारी और इंसानियत को मजबूत करने की कोशिश करते हैं।
रमजान की खास बात यह है कि इसी महीने पवित्र कुरआन की आयतें नाज़िल हुई थीं। इसलिए यह महीना इबादत, तिलावत और नेक कामों के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। छठवां रोजा पहले अशरे यानी रहमत के दिनों में आता है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।
छठवां रोजा क्यों खास होता है?
रमजान के शुरुआती दिनों में इंसान अपने शरीर और दिनचर्या को रोजे के अनुसार ढालता है। छठे रोजे तक पहुंचते-पहुंचते रोजेदार के अंदर सब्र और कंट्रोल की आदत मजबूत होने लगती है। यह दिन इस बात की याद दिलाता है कि रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि अपने गुस्से, बुरी बातों और गलत आदतों पर रोक लगाने का नाम है। पवित्र कुरान के 25वें पारे की सूरह शूरा की 43वीं आयात में जिक्र है कि- ‘व लमन सबरा वगफरा इन्ना ज़ालिका लमिन अज़मिल उमूर’. यानी जो सब्र और रहम करने वाला है वह बुलंद मर्तबे और गरिमा वाले हैं. इसका मतलब साफ है कि मुकम्मल ईमानदारी और अल्लाह की फरमाबर्दारी के साथ रखा गया रोजा ही रोजेदारों की असली पहचान है. जज्बा-ए-रहम पाकीजा दौतल और जज्बा-ए-सब्र रोजेदारों की रूहानी ताकत है.
धार्मिक शिक्षाओं में सब्र और माफी की बहुत अहमियत बताई गई है। कुरआन में भी सब्र करने वालों को ऊंचा दर्जा दिया गया है। छठवां रोजा इसी सब्र और फरमाबर्दारी की सीख देता है। जो इंसान सच्ची नीयत और ईमानदारी के साथ रोजा रखता है, वही असल मकसद को हासिल करता है।
यह रोजा इंसान को यह भी सिखाता है कि वह दूसरों के दुख को समझे। जब खुद भूख और प्यास महसूस होती है, तब गरीबों और जरूरतमंदों की तकलीफ का एहसास होता है। इसलिए इस दिन दान, मदद और नरमी का रवैया अपनाना बेहतर माना जाता है।
आज का सेहरी और इफ्तार का समय (24 फरवरी 2026)
आज सूर्योदय सुबह 06:51 ए एम पर और सूर्यास्त शाम 06:18 पी एम पर होगा।
इसी आधार पर आज का समय इस प्रकार रहेगा।
- सेहरी समाप्ति का समय: सुबह लगभग 05:13 ए एम
- फज्र की नमाज: सुबह लगभग 05:15 ए एम
- इफ्तार का समय (मगरिब): शाम 06:18 पी एम
सेहरी फज्र से पहले खत्म कर लेनी चाहिए। जैसे ही फज्र की अज़ान होती है, रोजा शुरू हो जाता है। फिर पूरे दिन खाने-पीने से परहेज किया जाता है और सूर्यास्त के साथ मगरिब की अज़ान पर रोजा खोला जाता है।
अगर कोई शिया फिक्ह के अनुसार समय देखता है तो इफ्तार आम तौर पर सूर्यास्त के कुछ मिनट बाद किया जाता है, लेकिन आम तौर पर मगरिब की अज़ान के साथ ही रोजा खोला जाता है।
छठे रोजे में क्या करें?
आज के दिन अपनी नीयत को मजबूत करें और नमाज की पाबंदी रखें। कुरआन की तिलावत करें और कोशिश करें कि उसका मतलब भी समझें। गुस्से से बचें और किसी से भी कटु शब्द न कहें। जरूरतमंदों की मदद करें, चाहे वह छोटी ही क्यों न हो।
छठवां रोजा यह याद दिलाता है कि असली ताकत भूख सहने में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार को बेहतर बनाने में है। अगर रोजा इंसान को सब्र, सच्चाई और दया सिखा दे, तो वही रोजा कामयाब माना जाता है। इस तरह 24 फरवरी 2026 को रखा जा रहा छठवां रोजा सिर्फ एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि खुद को बेहतर इंसान बनाने का एक मौका है।
