अध्यात्म

7 December, Dutt Purnima: जानिए भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी रोचक जानकारियां, आज भी असरदार हैं बातें

  • Reported by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 5, 2022, 07:11 AM IST

7 December, Dutt Purnima: इस साल दत्तात्रेय जयंती 7 दिसंबर 2022 को मनाई जाएगी। भगवान दत्तात्रेय को एक समधर्मी देवता और महान गुरु कहा जाता है। इनके 24 गुरु थे और ये खुद भगवान परशुराम के गुरु थे। भगवान दत्तात्रेय को भगवान ब्रह्मा, विष्‍णु और शिव का अंश माना जाता है। मान्यता है मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा पर भगवान दत्तात्रेय का दर्शन-पूजन करने से मनुष्य की सभी मनोकामना पूरी होती है।

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भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी रोचक जानकारियां

KEY HIGHLIGHTS
  • भगवान दत्तात्रेय हैं भगवान ब्रह्मा, विष्‍णु और शिव के अंश
  • ज्ञान प्राप्‍त करने के लिए भगवान दत्तात्रेय ने बनाए थे 24 गुरु
  • भगवान दत्तात्रेय ने दिया था भगवान परशुराम को ज्ञान

7 December, Dutt Purnima: हिन्‍दू धर्म का मार्गशीर्ष मास हर साल दिसंबर माह में पड़ता है। इस मास की पूर्णिमा के दिन देश के कई हिस्‍सों में बड़े धूमधाम से भगवान दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। भगवान दत्तात्रेय को भगवान ब्रह्मा, विष्‍णु और शिव का अंश माना जाता है। इस साल दत्तात्रेय जयंती 7 दिसंबर 2022 को मनाई जाएगी। भगवान दत्तात्रेय को एक समधर्मी देवता कहा जाता है। मान्यता है मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा पर भगवान दत्तात्रेय के निमित्त व्रत करने और दर्शन-पूजन करने से मनुष्य की सभी मनोकामना पूरी होती है। आइए जानते हैं भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी कुछ रोचक और खास बातें।

माता अनुसूया के पुत्र

धार्मिक शास्‍त्रों के अनुसार, भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र थे। दत्तात्रेय में तीनों देवों के रूप एवं गुरु दोनों बसते हैं। इसी वजह से इन्हें श्री गुरुदेवदत्त और परब्रह्ममूर्ति सद्धुरु के नाम से भी जाना जाता है। मान्‍यता है कि, दत्तात्रेय के तीन सिर हैं। जिसे सत, रज, तम का प्रतीक माना जाता है। इनके छह हाथ हैं, जिसे नियम, समानता, यम नियंत्रण, दया और शक्ति का प्रतिनिधित्व कहा जाता है।

भगवान दत्तात्रेय थे भगवान परशुराम के गुरु

भगवान दत्तात्रेय भगवान परशुराम के गुरु कहे जाते हैं। इनमें वैष्णव, शैव, शाक्त, दशनामी, नाथ, तंत्र और इनसे जुड़े कई संप्रदाय का समावेश है। इनके तीन शिष्य थे, जिसमें से दो योद्धा जाति और एक असुर जाति से थे। दत्‍तात्रेय को शिव के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय ने विद्याएं प्रदान की थी। इन्‍हें भक्त प्रह्लाद को शिक्षा-दीक्षा देकर श्रेष्ठ राजा बनाने का भी श्रेय मिला था। वहीं नागार्जुन को रसायनविद्या का ज्ञान भी इन्‍होंने ही दिया था। दत्तात्रेय की पूजा आराधना से ही गुरु गोरखनाथ को प्राणायम, आसन, मुद्रा और समाधि-चतुरंग योग का ज्ञान मिला था।

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु

भगवान दत्तात्रेय का मानना था कि, जहां से भी शिक्षा मिले उसे प्राप्‍त कर लेना अच्‍छा होता है। इसलिए उन्‍होंने 24 गुरु सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, बालक, कुमारी, मीन, पिंगला, भृंगी, कपोत, कुररपक्षी, पतंग, भ्रमर, गज, मृग, मधुमक्खी, सर्प, शरकृत, मकड़ी, अजगर और सिंधु को गुरु मानकर उनसे कई गुणों को प्राप्‍त किया।

दत्तात्रेय जयंती पर क्या करें

दत्तात्रेय जयंती खासतौर पर महाराष्ट्र, गोवा व दक्षिण भारत के अन्‍य राज्‍यों में मनाई जाती है। शास्‍त्रों में दत्त जयंती मनाने की ऐसी कोई भी विधि नहीं बताई गई है। इस जयंती से सात दिन पहले तक आप गुरुचरित्र का पाठ कर सकते हैं, इन सात दिनों को गुरुचरित्र सप्ताह भी कहा जाता है। वहीं कुछ लोगों की मान्यता है इस दिन भगवान दत्त की पूजा और हवन करने से ज्ञान में बढ़ोतरी होती है।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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