21 दिसंबर की दोपहर 2 बजे बन गया दुर्लभ संयोग, राहु की परेशानी से मिलेगी मुक्ति
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 21, 2026, 03:05 PM IST
Rahu dosh kaise shant kare: 21 दिसंबर की दोपहर 2 बजे एक दुर्लभ संयोग बन गया है। अभी गुप्त नवरात्रि चल रही हैं और इस दौरान शतभिषा नक्षत्र में चंद्रमा पहुंच गए हैं। इस दौरान चंद्रमा राहु के साथ कुंभ राशि में उपस्थित होंगे। शतभिषा नक्षत्र के स्वामी भी राहु हैं। इस कारण अगर इस समय पर पूजन किया जाए तो राहु से संबंधित परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है। ऐसे में अगर आपकी कुंडली में राहु अशुभ फल प्रदान कर रहा है या राहु की महादशा है तो आप गुप्त नवरात्रि पर पूजन कर सकते हैं।
गुप्त नवरात्रि पर राहु से मुक्ति के लिए पूजन
Rahu dosh kaise shant kare: 21 जनवरी 2026 को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर शतभिषा नक्षत्र लग जाएगा। यह नक्षत्र राहु का माना जाता है और खास बात यह है कि इस समय गुप्त नवरात्रि भी चल रही होगी। गुप्त नवरात्रि शक्ति साधना का विशेष समय होती है और इसी दिन मां त्रिपुर सुंदरी का पूजन भी किया जाएगा। जब राहु के नक्षत्र में शक्ति की उपासना का यह पवित्र काल आता है, तो इसे ज्योतिष और साधना दोनों ही दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
शतभिषा नक्षत्र का राहु से संबंध क्यों है खास?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। राहु भ्रम, मानसिक अस्थिरता, भय, अचानक आने वाली समस्याओं और नकारात्मक सोच से जुड़ा माना जाता है। जब यह नक्षत्र प्रभावी होता है, तो जिन लोगों की कुंडली में राहु कमजोर या अशुभ स्थिति में होता है, उन्हें मानसिक तनाव, निर्णय में कन्फ्यूजन और अनजानी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में राहु को शांत करने के उपाय अधिक प्रभावी माने जाते हैं।
गुप्त नवरात्रि में शक्ति साधना से मिलता है लाभ
गुप्त नवरात्रि को 10 महाविद्याओं की आराधना का समय माना जाता है। यह वह काल होता है जब साधना अंदरूनी स्तर पर की जाती है और देवी की ऊर्जा सूक्ष्म रूप से कार्य करती है। मां दुर्गा को नकारात्मक शक्तियों, भय और भ्रम का नाश करने वाली देवी माना गया है। यही कारण है कि गुप्त नवरात्रि में की गई साधना मानसिक और साइकोलॉजिकल समस्याओं पर गहरा प्रभाव डालती है, जो राहु से जुड़ी मानी जाती हैं।
21 जनवरी को है मां त्रिपुर सुंदरी का दिन
21 जनवरी को गुप्त नवरात्रि के दौरान मां त्रिपुर सुंदरी का पूजन किया जा रहा है। मां त्रिपुर सुंदरी को सौंदर्य, संतुलन और चेतना की देवी माना जाता है। राहु जहां भ्रम और असंतुलन देता है, वहीं मां त्रिपुर सुंदरी की उपासना जीवन में स्पष्टता और स्थिरता लाने का कार्य करती है। ऐसे में यदि इस दिन मां के पूजन के साथ राहु से मुक्ति की प्रार्थना की जाए, तो राहु के अशुभ प्रभाव को शांत करने का यह एक दुर्लभ और प्रभावशाली अवसर बन जाता है।
पूजन से कम होगा राहु का प्रभाव
शतभिषा नक्षत्र के दौरान गुप्त नवरात्रि में किया गया पूजन राहु की उग्र और भ्रमित करने वाली ऊर्जा को मां दुर्गा की शक्ति से संतुलित करता है। माना जाता है कि इस समय की गई साधना मानसिक तनाव, भय, अनिद्रा, गलत फैसलों और बार-बार आने वाली रुकावटों को कम करने में सहायक होती है। विशेष रूप से वे लोग जो राहु से जुड़ी समस्याओं जैसे अचानक नुकसान, रिश्तों में गलतफहमी या आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें इस संयोग का लाभ मिल सकता है।
शतभिषा नक्षत्र में गुप्त नवरात्रि के दौरान करें ये काम
इस विशेष दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह पाठ मन को स्थिर करता है और राहु के कारण बनने वाले मानसिक उतार-चढ़ाव को शांत करता है। इसके साथ ही राहु मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। इस दिन नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। यह पाठ राहु के नकारात्मक प्रभाव कर करता है। यदि संभव हो तो चंडी हवन भी किया जा सकता है, जिसे राहु शांति और मानसिक शुद्धि के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है।
करें दान-पुण्य
राहु के नक्षत्र में दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। शतभिषा नक्षत्र के दौरान सरसों का तेल, जौ या नीले रंग के वस्त्र का दान करने से राहु के दुष्प्रभाव कम होते हैं। यह दान राहु से जुड़ी रुकावटों और मानसिक परेशानियों को शांत करने में सहायक माना जाता है और जीवन में स्थिरता लाने का कार्य करता है।
बना है विशेष संयोग
शतभिषा नक्षत्र और गुप्त नवरात्रि के इस दुर्लभ संयोग में किया गया पूजन जीवन में स्पष्टता, मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है। खासकर वे लोग जो लंबे समय से अनजाने भय, कन्फ्यूजन या राहु से जुड़ी बाधाओं का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह समय बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। सही श्रद्धा और नियमों के साथ की गई साधना राहु के अशुभ प्रभाव को कम करके जीवन को संतुलित दिशा में ले जाने में सहायक बनती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।