प्रदोष व्रत का पारण और महाशिवरात्रि व्रत एक साथ कैसे करें, जानिए 15 फरवरी को प्रदोष व्रत का पारण कब और कैसे करें?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 15, 2026, 06:39 AM IST
Shani Pradosh Vrat Paran Time 2026: 14 फरवरी के दिन प्रदोष व्रत रखा गया है। इस व्रत का पारण अगले दिन 15 फरवरी को किया जाएगा। इस बार खास बात ये है कि इस दिन महाशिवरात्रि का पर्व भी है। इस कारण लोग महाशिवरात्रि पर्व पर भी व्रत रखते हैं। ऐसे में प्रदोष व्रत का पारण और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। आइए जानते हैं कि इस दिन प्रदोष व्रत का पारण कैसे करें?
प्रदोष व्रत पारण समय और विधि
Shani Pradosh Vrat Paran Time 2026: 14 फरवरी 2026, शनिवार को शनि प्रदोष व्रत रखा गया है और अब 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। ऐसे विशेष संयोग में अनेक लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि यदि वे महाशिवरात्रि का व्रत भी कर रहे हैं तो प्रदोष व्रत का पारण कब और कैसे करें। क्या दोनों व्रत एक साथ रखे जा सकते हैं? क्या पहले व्रत का पारण आवश्यक है? इन सभी प्रश्नों का समाधान शास्त्रीय परंपराओं और व्रत नियमों के आधार पर समझना जरूरी है, ताकि दोनों व्रतों का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
धार्मिक दृष्टि से प्रत्येक व्रत एक संकल्प होता है। जब हम व्रत का संकल्प लेते हैं, तो उसका विधिपूर्वक समापन यानी पारण करना भी उतना ही आवश्यक होता है। इस कारण यदि अगले दिन महाशिवरात्रि जैसा बड़ा पर्व हो, तब भी प्रदोष व्रत का पारण सही समय पर करना चाहिए।
प्रदोष व्रत का पारण समय (Pradosh Vrat Paran Time)
15 फरवरी को शाम 5 बजे तक त्रयोदशी तिथि है, इसलिए प्रदोष व्रत का पारण त्रयोदशी तिथि समाप्त होने के बाद ही किया जाएगा। शास्त्रीय मान्यता है कि प्रदोष व्रत का पारण त्रयोदशी के बाद, अगली तिथि चतुर्दशी लगने पर किया जाता है। इस स्थिति में पारण का उपयुक्त समय 15 फरवरी को शाम 5 बजे के बाद रहेगा। विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद या संध्या काल में पारण करना श्रेष्ठ माना जाएगा। यदि महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 5 बजे के बाद प्रारंभ हो रही है, तो उसी समय से पारण किया जा सकता है। अर्थात 15 फरवरी 2026 को लगभग शाम 5:15 बजे से 7:30 बजे के बीच प्रदोष व्रत का पारण करना उपयुक्त रहेगा।
महाशिवरात्रि का व्रत और प्रदोष व्रत का पारण एक साथ कैसे करें?
महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि में रखा जाता है और इसका विशेष महत्व रात्रि जागरण और चार प्रहर की शिव पूजा में है। यदि आप 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत भी रखने वाले हैं, तो पहले प्रदोष व्रत का पारण करें और उसके बाद महाशिवरात्रि का संकल्प लें।
शाम 5 बजे के बाद स्नान कर लें या कम से कम हाथ-मुंह धोकर शुद्ध हो जाएं। भगवान शिव के सामने दीपक जलाएं, जल अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें। भगवान से प्रार्थना करें कि आपका प्रदोष व्रत पूर्ण हुआ है और आप उसका पारण कर रहे हैं। इसके बाद जल ग्रहण करें और हल्का सात्विक आहार लें, जैसे फल, दूध या थोड़ा सा प्रसाद ले सकते हैं। इस दौरान आपको अन्न नहीं लेना है, क्योंकि आप महाशिवरात्रि का भी व्रत रख रहे हैं। केवल जल या फल से भी पारण किया जा सकता है। पारण के तुरंत बाद महाशिवरात्रि का व्रत संकल्प लें और रात्रि में चार प्रहर की शिव पूजा करें।
प्रदोष व्रत का पारण क्यों आवश्यक है?
व्रत केवल भोजन त्याग नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म से लिया गया एक धार्मिक संकल्प है। जब संकल्प लिया जाता है, तो उसका विधिपूर्वक समापन करना अनिवार्य माना गया है। पारण उसी समापन की प्रक्रिया है। यदि पारण नहीं किया जाए, तो व्रत अधूरा माना जाता है और उसका पूर्ण पुण्य फल प्राप्त नहीं होता है।
पारण करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और अगले व्रत के लिए नई शुद्धता के साथ संकल्प लिया जा सकता है। विशेष रूप से जब अगले दिन महाशिवरात्रि जैसा महत्वपूर्ण पर्व हो, तब पहले व्रत को पूर्ण करना आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
