अध्यात्म

10वें मुहर्रम यौम-ए-आशूरा की नमाज का क्या है तरीका, जानें नियत, रकात कैसे पढ़ें और क्या है मुहर्रम की दुआ

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  • Updated Jun 25, 2026, 06:21 PM IST

10 Muharram Ashura Namaz: इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की शुरुआत 16 जून से हो चुकी है। इस महीने के 10 दिन बाद यौम-ए-आशूरा होता है। यह दिन शहादत का माना जाता है।

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10 Muharram Ashura Namaz यौम-ए-आशूरा नमाज का तरीका

10 Muharram Ashura Namaz : इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम बेहद पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस महीने की 10वीं तारीख को यौम-ए-आशूरा कहा जाता है। यह दिन मुसलमानों के लिए इबादत, दुआ और धार्मिक महत्व का दिन होता है। कई लोग इस दिन रोजा रखते हैं, नमाज पढ़ते हैं और अल्लाह से रहमत, बरकत और गुनाहों की माफी की दुआ करते हैं। साल 2026 में यौम-ए-आशूरा 26 जून को है।

आशूरा के दिन पढ़ी जाने वाली नमाज नफ्ल नमाज मानी जाती है। यानी यह अल्लाह की रजा और सवाब हासिल करने के लिए अदा की जाने वाली स्वैच्छिक इबादत है। इस दिन लोग इबादत में समय बिताते हैं और हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए दुआ करते हैं।

यौम-ए-आशूरा की नमाज की नियत कैसे करें

आशूरा की नमाज नफ्ल नमाज के रूप में अदा की जाती है। दो रकात नमाज की नियत इस तरह की जा सकती है।

'नियत की मैंने 2 रकात नमाज आशूरा की नफ्ल वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।'

अगर चार रकात पढ़नी हो तो नियत इस तरह करें।

'नियत की मैंने 4 रकात नमाज आशूरा की नफ्ल वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।'

आशूरा की नमाज में कितनी रकात पढ़ी जाती है

आशूरा की नफ्ल नमाज को 2, 4, 6, 8 या 12 रकात तक पढ़ने की परंपरा मिलती है। हर दो रकात के बाद सलाम फेरना जरूरी माना जाता है। हर रकात में सूरह फातिहा के बाद सूरह इखलास (कुल्हुवल्लाहु अहद) पढ़ी जाती है।

10 मुहर्रम आशूरा की नमाज पढ़ने का तरीका

पहली रकात

सबसे पहले नमाज की नियत करें। इसके बाद सना 'सुब्हानक अल्लाहुम्मा...' पढ़ें। इसके बाद 'अऊजुबिल्लाहि मिनश शैतानिर्रजीम' पढ़ें, फिर 'बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम' पढ़ें। इसके बाद सूरह फातिहा पढ़ें और फिर 3 बार सूरह इखलास पढ़ें।

इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाएं और कम से कम 3 बार 'सुब्हान रब्बियल अजीम' पढ़ें। इसके बाद फिर 'समिअल्लाहु लिमन हमिदह' कहते हुए खड़े हों और 'रब्बना लकल हम्द' पढ़ें। इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए सजदे में जाएं और 3 बार 'सुब्हान रब्बियल अला' पढ़ें, फिर बैठकर दूसरा सजदा करें और उसी तरह तस्बीह पढ़ें। इसके बाद दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।

दूसरी रकात

दूसरी रकात में भी सूरह फातिहा के बाद 3 बार सूरह इखलास पढ़ें। इसके बाद रुकू और सजदे पूरे करें। फिर बैठकर अत्तहियात, दुरूद शरीफ और दुआए मसूरा पढ़ें। इसके बाद दोनों तरफ सलाम फेरकर नमाज पूरी करें। हर दो रकात के बाद पढ़ी जाने वाली तस्बीह, हर दो रकात के बाद यह तस्बीह पढ़ना शुभ माना जाता है।

'सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि व ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर।'

इसे 70 बार पढ़ने की मान्यता है। 9 मुहर्रम की रात की विशेष नमाज आशूरा से एक रात पहले यानी 9 मुहर्रम की रात भी इबादत का विशेष महत्व माना जाता है। इस रात 4 रकात नफ्ल नमाज पढ़ने की परंपरा है।

हर रकात में:

  • सूरह फातिहा के बाद 1 बार आयतुल कुर्सी
  • 3 बार सूरह इखलास पढ़ी जाती है।

नमाज के बाद 100 बार सूरह इखलास पढ़ने की मान्यता है। यह नमाज मगरिब के बाद से लेकर ईशा तक या ईशा के बाद भी पढ़ी जा सकती है।

आशूरा की नमाज का समय

10 मुहर्रम के दिन आशूरा की नफ्ल नमाज सूर्योदय के बाद से लेकर असर की नमाज से पहले तक पढ़ी जा सकती है। हालांकि नमाज पढ़ने से पहले और बाद में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नमाज पढ़ने से बचा जाता है। रात में पढ़ी जाने वाली नफ्ल नमाज 9 मुहर्रम की रात से शुरू मानी जाती है।

आशूरा के दिन पढ़ी जाने वाली दुआ

आशूरा के दिन अल्लाह से रहमत, माफी और बरकत की दुआ की जाती है। इस दिन लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अल्लाह से अपनी परेशानियों को दूर करने की दुआ करते हैं। आशूरा की दुआ की शुरुआत इस तरह की जाती है।

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

या क़ाबि ल तौबति आदम यौम आशूराअ

या फारिजा करबी जिन्नूनी यौम आशूराअ

या जामी अ शमली याक़ूब यौम आशूराअ

या सामी अ दाअवती मूसा व् हारून यौम आशूराअ

या मुगि स इब्राहिम मिनन्नारी यौम आशूराअ

या राफ़ीअ इदरीस इलस्समाई यौम आशूराअ

या मुजी ब दावती सालिहिन फिन्नाकती यौम आशूराअ

या नासि र सय्येदेना मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यौम आशूराअ

या रहमान नददुनिया वल आखिरती व् रहिमहुमा सल्ली अला सय्येदेना मुहम्मदिंव व् अला आली सय्येदेना मुहम्मदिंव व सल्ली अला जमीईल अम्बियाई वल मुरसलीन वक़ज़ी हाजातीना फिददुनिया वल आखिरती व अतिल उम रना फी ताअतीक व मुहब्बतिक व रेदाक व अहयेना हयातन तैय्यबतओं वतवफ़्फ़ना अललईमानी वल इस्लामी बिरहमतिक या अरहमर्राहिमीन। अल्लाहुम्मा बीइज़्ज़िल हसनी व् अखीही व उम्मीही व् अबिहि व जद्दीही व् बनिहि फर्रीज अन्ना मानहनू फ़ीहि ।

सुब्हानल्लाही मिलअलमिज़ानी व् मुन्तहलइल्मी व् मबलग़ र्रेरदा व ज़िन तल अर्शी लामल जाअ वला मन जाअ मिनल्लाही इल्ला इलैहि । सुब्हानल्लाही अददश शफई वल वितरि व अदद कलीमातिल्लाहित्तामती कुल्लीहा नसअलुकस्सलामत बिरहमतिक या अरहमर्राहिमीन । व हुवा हसबुन व नेमल वकील । नेमल मौला व नैमन्नसिर । वलाहौला वला कुव्वत इल्ला बिल्लाहिल अलियिल अज़ीम । व सल्लल्लाहु तआला अला सय्येदेना मुहम्मदिंव व्अला आलिहि वसहबिहि वअलल मुअमिनीना वल मुअमिनाती वल मुस्लिमीन वल मुस्लिमाति अदद ज़ररातील वुजुदी व् अदद मालुमातील्लाही वलहम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन । आमीन । सुम्मा आमीन ।

इस दुआ में अल्लाह की रहमत, माफी और मदद की मांग की जाती है।

यौम-ए-आशूरा के दिन इबादत क्यों है जरूरी

यौम-ए-आशूरा का दिन मुसलमानों के लिए याद, इबादत और दुआ का दिन माना जाता है। इस दिन नमाज पढ़ना, रोजा रखना, कुरआन की तिलावत करना और जरूरतमंदों की मदद करना पुण्य का कार्य माना जाता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, आशूरा के दिन सच्चे मन से की गई इबादत और दुआ से अल्लाह की रहमत प्राप्त होती है।

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