लगातार पेड़ पर जोरदार टक्कर मारने के बाद भी नहीं होता बाल बांका, जानें ऐसी कौन सी शक्ति लेकर पैदा हुआ यह पक्षी

कठफोड़वा लगातार पेड़ पर जोरदार चोंच मारने के बावजूद घायल क्यों नहीं होता? जानें इस अनोखे पक्षी की ऐसी क्या खासियत है जो इसका बाल बांका भी नहीं होता।

Authored by: Pankaj YadavUpdated Sep 14 2026, 12:56 IST
​पेड़ पर हजारों बार जोरदार चोंच मारता है यह पक्षी01 / 07

​पेड़ पर हजारों बार जोरदार चोंच मारता है यह पक्षी

प्रकृति में कई ऐसे जीव-जंतु मौजूद हैं, जिनके शरीर की बनावट देखकर इंसान हैरान रह जाता है। इन्हीं में से एक है कठफोड़वा। यह पक्षी पेड़ों के तनों पर लगातार अपनी चोंच से जोरदार वार करता है। कभी खाना तलाशने के लिए तो कभी अपना घोंसला बनाने के लिए, कठफोड़वा एक ही पेड़ पर बार-बार चोंच मारता रहता है।

​क्यों नहीं होता घायल?Image Credit : IStock02 / 07

​क्यों नहीं होता घायल?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी जोरदार टक्कर के बाद भी इस पक्षी के सिर में चोट क्यों नहीं लगती? अगर कोई इंसान इतनी ताकत से अपना सिर पेड़ पर मारता रहे, तो गंभीर चोट लग सकती है तो फिर कठफोड़वा के साथ ऐसा क्यों नहीं होता? इसका जवाब उसकी खास शारीरिक बनावट में छिपा हुआ है।

बेहद मजबूत होती है कठफोड़वा की चोंचImage Credit : IStock03 / 07

बेहद मजबूत होती है कठफोड़वा की चोंच

कठफोड़वा की चोंच सामान्य पक्षियों की तुलना में काफी मजबूत होती है। इसकी चोंच पेड़ की कठोर लकड़ी में भी आसानी से छेद कर सकती है। यह चोंच सिर्फ मजबूत ही नहीं, बल्कि एक खास आकार की भी होती है, जो टक्कर के दौरान लगने वाले झटके को कुछ हद तक संभालने में मदद करती है।

क्यों ऐसा करता है यह पक्षी?Image Credit : IStock04 / 07

क्यों ऐसा करता है यह पक्षी?

कठफोड़वा अपनी चोंच का इस्तेमाल पेड़ की छाल के अंदर छिपे कीड़े-मकोड़े निकालने के लिए करता है। इसके अलावा यह पेड़ में अपना घर बनाने के लिए भी लगातार लकड़ी को तोड़ता रहता है।

खोपड़ी में कुदरती सुरक्षा व्यवस्थाImage Credit : IStock05 / 07

खोपड़ी में कुदरती सुरक्षा व्यवस्था

कठफोड़वा के सिर की बनावट भी बेहद खास होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसकी खोपड़ी और शरीर के अंदर मौजूद मांसपेशियां झटकों को सहने के लिए अनुकूलित हैं। जब कठफोड़वा पेड़ पर चोंच मारता है, तो टक्कर का असर सीधे दिमाग तक पहुंचने से पहले शरीर की कई संरचनाओं से होकर गुजरता है। इसकी गर्दन की मजबूत मांसपेशियां और खोपड़ी की विशेष बनावट झटके को कम करने में मदद करती हैं।

जीभ भी किसी कमाल से कम नहींImage Credit : IStock06 / 07

जीभ भी किसी कमाल से कम नहीं

कठफोड़वा की सिर्फ चोंच ही नहीं, बल्कि उसकी जीभ भी बेहद अनोखी होती है। इसकी जीभ काफी लंबी होती है और पेड़ की छाल के अंदर मौजूद कीड़ों को पकड़ने में मदद करती है। कुछ प्रजातियों में इसकी जीभ इतनी लंबी होती है कि वह सिर के पीछे तक घूमकर खोपड़ी के आसपास मौजूद विशेष संरचना में सुरक्षित रहती है। यह पूरी व्यवस्था कठफोड़वा को पेड़ के अंदर से भोजन निकालने में मदद करती है।

इंसान ऐसा क्यों नहीं कर सकता?Image Credit : IStock07 / 07

इंसान ऐसा क्यों नहीं कर सकता?

इंसान के सिर और दिमाग की बनावट कठफोड़वा जैसी नहीं होती। हमारा दिमाग खोपड़ी के अंदर मौजूद होता है और तेज टक्कर लगने पर उसके आसपास झटका पैदा हो सकता है। लगातार सिर पर चोट लगने से गंभीर नुकसान हो सकता है। इसके विपरीत कठफोड़वा का शरीर लाखों वर्षों के प्राकृतिक विकास के दौरान इस तरह ढला है कि वह पेड़ों पर चोंच मारने जैसी गतिविधि आसानी से कर सके।

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