अगर वैज्ञानिकों की मानें तो दुनियाभर में लगभग 34,000 से ज्यादा मछलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। पर क्या आपमें से कोई यह जानता है कि इनमें से कुछ मछलियां ऐसी होती हैं जो अपना लिंग बदल सकती हैं मतलब की जेंडर। यानी की कोई मेल है तो वह फीमेल बन सकता है और कोई फीमेल है तो वह मेल बन सकती है।
मछलियों के नर से मादा और मादा से नर बनने की इस प्रक्रिया को अनुक्रमिक उभयलिंगीपन कहा जाता है, और दुनिया भर में करीब 500 से अधिक मछली प्रजातियां इस क्षमता का प्रदर्शन करती हैं, जैसे कि क्लाउनफिश और कई प्रकार की रैस्से।
मछली का नर से मादा बनने के पीछे का कारण कभी-कभी पानी का तापमान, पोषण, या क्षेत्रीय परिस्थितियां भी हो सकती हैं। ये मछलियां लचीली (flexible) जीन संरचना की वजह से बदल सकती हैं।
मछलियों के इस बदलाव को अगर प्रकृति की अनूठी और अनुकूलन संरचना कहें तो कतई गलत नहीं होगा। क्योंकि ऐसा बदलाव बाकी जीवों में कम ही देखने को मिलता है।
यह मछलियों की जीन और हॉर्मोनल लचीलापन को दिखाता है। क्योंकि जरूरत पड़ने पर नर से मादा या मादा से नर में बदल सकती हैं।
जेंडर बदलने से समूह में संतुलन और प्रजनन संरचना बनी रहती है। यह प्रकृति की अनूठी अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।
यदि समूह में नर या मादा की कमी हो जाए, तो जेंडर बदलना प्रजाति के अस्तित्व को बचाने का बेहतरीन तरीका है।
Protandrous: पहले नर, बाद में मादा (उदाहरण के तौर पर : Clownfish)Protogynous: पहले मादा, बाद में नर (उदाहरण के तौर पर : Wrasse, Parrotfish)Bidirectional: जरूरत पड़ने पर बार-बार बदल सकती हैं (उदाहरण के तौर पर: Gobies)