Neelakurinji Flowers Munnar: केरल के मुन्नार में नीलकुरिंजी का खिलना अपने आप में एक खास नेचुरल इवेंट है। इस दुर्लभ फूल का सामूहिक खिलना 12 साल के अंतराल पर होता है और उस दौरान पहाड़ियों का रंग नीला-बैंगनी नजर आने लगता है। केरल टूरिज्म के मुताबिक 2026 में मट्टुपेट्टी-कन्निमाला इलाके में नीलकुरिंजी के एक खास समूह के खिलने का चक्र है।
केरल का मुन्नार नीलकुरिंजी के फूलों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। 12 साल के चक्र में होने वाले सामूहिक फूल खिलने के दौरान पहाड़ियों पर नीले और बैंगनी रंग की खूबसूरत परत दिखाई देती है। यही दुर्लभ नजारा मुन्नार को इस दौरान पर्यटकों के लिए खास बना देता है।
नीलकुरिंजी का वैज्ञानिक नाम Strobilanthes kunthiana है। यह पश्चिमी घाट के ऊंचाई वाले घास के मैदानों और शौला इलाकों में पाया जाने वाला पौधा है। इसकी खास पहचान इसके नीले-बैंगनी फूल हैं, जो बड़े पैमाने पर खिलने पर पूरी पहाड़ी का लुक बदल देते हैं।
नीलकुरिंजी का खास जीवनचक्र इसे दूसरे फूलों से अलग बनाता है। यह पौधा लगभग 12 साल में परिपक्व होकर एक साथ बड़ी संख्या में फूल देता है। इस तरह के सामूहिक और लंबे अंतराल वाले फूल खिलने को वनस्पति विज्ञान में प्लीटेसियल फ्लावरिंग कहा जाता है। फूल और बीज बनने के बाद पौधे का जीवनचक्र पूरा हो जाता है।
जब नीलकुरिंजी बड़ी संख्या में खिलता है तो मुन्नार की ढलानें दूर से नीली-बैंगनी दिखाई देती हैं। पहाड़ों पर फैले इन फूलों का नजारा इतना अलग होता है कि नेचर लवर्स और फोटोग्राफर्स लंबे समय से इस सीजन का इंतजार करते हैं।
मुन्नार के आसपास मट्टुपेट्टी, टॉप स्टेशन, राजमाला, कोविलूर और एराविकुलम नेशनल पार्क जैसे इलाके नीलकुरिंजी देखने के लिए खास माने जाते हैं। टॉप स्टेशन करीब 1700 मीटर की ऊंचाई पर है और यहां से पश्चिमी घाट के शानदार नजारे दिखाई देते हैं। एराविकुलम नेशनल पार्क में भी नीलकुरिंजी बड़ी संख्या में पाया जाता है।
नीलकुरिंजी को देखने जाने वाले पर्यटकों के लिए इसे तोड़ना या पौधों को नुकसान पहुंचाना मना है। केरल टूरिज्म के अनुसार नीलकुरिंजी ऊंचाई वाले संवेदनशील घास के मैदानों का हिस्सा है और इसके फूलों वाले इलाके में प्लास्टिक पर भी सख्ती है। खूबसूरत नजारे को कैमरे में कैद करें, लेकिन फूलों और पौधों को नुकसान न पहुंचाएं।
12 साल में आने वाला यह फूलों का नजारा आम पर्यटन अनुभव से बिल्कुल अलग है। एक ही समय में पहाड़ियों का बड़ा हिस्सा नीले-बैंगनी फूलों से भर जाता है। यही दुर्लभता इसे फोटोग्राफी, नेचर वॉक और पहाड़ी यात्रा पसंद करने वालों के लिए खास बनाती है। केरल टूरिज्म में भी नीलकुरिंजी के खिलने को मुन्नार के प्रमुख प्राकृतिक आकर्षणों में रखा गया है।
चाय के बागानों और धुंध से घिरी पहाड़ियों के लिए मशहूर मुन्नार, नीलकुरिंजी के फूल खिलने के दौरान बिल्कुल अलग रंग में नजर आता है। दूर तक फैले नीले-बैंगनी फूल और हरी पहाड़ियां इस जगह को फोटो गैलरी के लिए परफेक्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन बना देती हैं।