अगर आपने कभी पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल किया हो तो आपने देखा होगा कि वहां टॉयलेट में लगे दरवाजे ऊपर की तरफ थोड़े छोटे होते हैं। क्या आपको पता है कि ऐसा क्यों होता है, अगर नहीं तो आज जान लें।
बता दें कि ऐसा जानबूझकर किया जाता है और इसके पीछे कई अहम कारण हैं। पहला कारण यह कि इन दरवाजों को इसलिए छोटा बनाया जाता है ताकि यदि कोई अंदर बंद हो गया हो और वह किसी मुसीबत में हो तो उसे तुरंत बाहर निकाला जा सके।
नीचे से दरवाजा थोड़ा खुला होने की वजह से बाहर से अंदर आराम से देखा जा सकता है और अगर कोई परेशानी में हो तो समय रहते मदद तुरंत ही मिल सकती है।
दूसरा कारण यह है कि सार्वजनिक शौचालयों में बदबू और गंदगी बहुत होती है। दरवाजे के नीचे का हिस्सा खुला होने से हवा का आवागमन लगातार रहता है। जिससे बदबू कम होती है।
इन दरवाजों के नीचे से खुला रहने का एक और कारण है और वह ये है कि किसी विकट स्थिति में पुलिस या सफाई कर्मचारी आसानी से देख सकते हैं कि अंदर क्या स्थिति है और कहीं कोई गलत काम तो नहीं कर रहा।
अगर पब्लिक टॉयलेट के दरवाजे ऊपर तक बंद रहते, तो नमी, गैस, कीटाणु और बदबू टॉयलेट के अंदर ही बंद रहती। नीचे से खुला रहने पर ये चीजें बाहर निकल जाती हैं और सफाई भी बहुत अच्छे से हो जाती है।
बता दें कि पब्लिक टॉयलेट्स में इस तरह के डिजाइन पुरुष और महिला दोनों के लिए होते हैं। जिसे साफ-सफाई के साथ-साथ सुरक्षा और सुविधा के लिए भी बनाया जाता है। सार्वजनिक शौचालयों में छोटे दरवाजे होने का नियम सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनाया जाता है।