जंगल पर राज करने वाले शेर अक्सर झुंड में ही रहते हैं। इनके झुंड को प्राइड कहा जाता है। एक झुंड में आमतौर पर 10-40 शेर हो सकते हैं, लेकिन कई बार शेरों को उनके झुंड से उनके समूह के अन्य सदस्य उन्हें निकाल देते हैं।
ऐसे में आज हम जानेंगे कि किसी शेर को उसके झुंड से निकाले जाने के बाद उसकी हालत क्या होती है। वह कैसे जंगल की दुनिया में अपना शेष जीवन व्यतीत करता है। सबसे पहले हम जानते हैं कि शेर को कब और क्यों झुंड से निकाला जाता है।
झुंड से निकाले गए शेर को "नोमैड" (घुमक्कड़) कहा जाता है। आमतौर पर नर शेरों को उनके किशोरावस्था (2-3 साल की उम्र) में उनके झुंड से निकाल दिया जाता है, खासकर जब वे यौन परिपक्वता तक पहुंचते हैं। यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से होती है ताकि झुंड में नई पीढ़ी के लिए जगह बने और इनब्रीडिंग से बचा जा सके।
कई बार जब कोई शेर बूढ़ा हो जाता है तो दूसरा युवा नर शेर उसे चुनौती देकर उसे हराने के बाद उसके झुंड से अलग कर देता है और उसकी जगह वह खुद ले लेता है, जिसे आप वर्चस्व की लड़ाई कह सकते हैं। कई बार शेरों को क्षेत्रीय विवादों के कारण भी निकाल दिया जाता है।
प्राइड से निकाले जाने के बाद शेरों के लिए उनका जीवन काफी कठिन हो जाता है क्योंकि उन्हें अलग रहने और अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। शेर अपने जीवन में इसी समय सबसे ज्यादा कमजोर पड़ता है।
जब एक शेर को उसके झुंड (प्राइड) से निकाल दिया जाता है, तो वह अकेला हो जाता है। उसके लिए शिकार करना, अपने क्षेत्र की रक्षा करना और अन्य खूंखार जानवरों से अपनी जान बचाना—यह सब कुछ बहुत ही मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में वह या तो दूसरे शेरों द्वारा मार दिया जाता है या फिर लकड़बग्घे जैसे खूंखार जानवर मिलकर उसका शिकार कर लेते हैं। जब शेर झुंड में होता है तो उसे दूसरे जानवरों से शिकार होने का कोई डर नहीं होता।
साथ ही झुंड में रहने वाले शेर अक्सर बड़े जानवरों का शिकार करते हैं और रोज अपनी दावत उड़ाते हैं, लेकिन एक अकेला शेर झुंड से अलग होने के बाद छोटे-मोटे जानवरों का ही शिकार कर पाता है या फिर वह मरे हुए जानवरों को खाकर अपना काम चलाता है।
जब शेर अकेला हो जाता है तो उसके जीवन का सिर्फ एक ही मकसद रह जाता है: वह या तो अपना एक नया क्षेत्र स्थापित करता है या फिर वह किसी झुंड पर कब्जा करता है। इसके लिए वह मौजूदा नर शेरों से लड़तेा है। अगर वह जीत जातेा है, तो वह उस झुंड केा नया नेता बन जातेा है और जो शेर हार जाता है, उसे उसके झुंड से बाहर कर दिया जाता है या फिर उसे मार दिया जाता है।
कई बार, झुंड से निकाले गए नर शेर अपने भाइयों या अन्य नोमैड शेरों के साथ मिलकर अपना एक अलग झुंड तैयार कर लेते हैं, जिससे वे शिकार करने और अन्य शेरों से मुकाबला करने में अधिक सक्षम हो जाते हैं।