भारत के इस गांव में नाम लेकर नहीं सीटी बजाकर एक-दूसरे को बुलाते हैं लोग, जानिए क्या है रहस्य

Whistling Village in India: भारत में 6 लाख से ज्यादा गांव हैं। हर गांव की अपनी कोई न कोई विशेषता होगी। इसी क्रम में हम आपको आज भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां के लोग एक-दूसरे को नाम से नहीं बल्कि सीटी बजाकर बुलाते हैं।

Authored by: आदित्य साहूUpdated Nov 18 2025, 14:46 IST
भारत का सबसे अनोखा गांवImage Credit : IStock01 / 07

भारत का सबसे अनोखा गांव

आपको यह सुनकर ही अजीब लग रहा होगा कि कैसे लोग एक-दूसरे को सीटी बजाकर बुलाते होंगे। बता दें कि यह बात 100 परसेंट सच है और इस गांव के लोग एक-दूसरे को सीटी बजाकर ही बुलाते हैं।

कहां स्थित है यह गांवImage Credit : IStock02 / 07

कहां स्थित है यह गांव

भारत का यह सबसे अनोखा गांव मेघालय राज्य में स्थित है। मेघालय राज्य का कोंगथोंग गांव दुनियाभर में व्हिसलिंग विलेज के नाम से जाना जाता है।

पहाड़ियों में छिपा छोटा और दिलचस्प गांवImage Credit : IStock03 / 07

पहाड़ियों में छिपा छोटा और दिलचस्प गांव

कोगंथोंग गांव मेघालय की पहाड़ियों में छिपा एक छोटा और बेहद दिलचस्प गांव है।अब आपके दिमाग में सवाल आ रहा होगा कि इसे व्हिसलिंग विलेज के नाम से क्यों जाना जाता है।

मां अपने बच्चे के लिए बनाती है धुनImage Credit : IStock04 / 07

मां अपने बच्चे के लिए बनाती है धुन

पीढ़ियों से जब इस गांव में कोई बच्चा पैदा होता है, तो उसकी मां बच्चे के लिए कोई धुन बनाती है। मां की बनाई यही धुन उस बच्चे की पहचान बन जाती है। भले ही आपको यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन यही हकीकत है।

हर इंसान के लिए बनी है एक अलग धुनImage Credit : IStock05 / 07

हर इंसान के लिए बनी है एक अलग धुन

इस गांव की आबादी 700 से ज्यादा लोगों की है। इसका मतलब यह हुआ कि गांव में 700 से ज्यादा अलग-अलग धुनें सुनी जा सकती हैं। इस गांव के लोग बेहद शर्मीले होते हैं, और बाहर के लोगों के साथ जल्दी घुल-मिल नहीं पाते।

सुनाई देती हैं तरह-तरह की सीटियांImage Credit : IStock06 / 07

सुनाई देती हैं तरह-तरह की सीटियां

इस गांव के पास से गुजरते समय आपको हूट और सीटी की तरह-तरह की आवाजें सुनाई देंगी। हालांकि, यह परंपरा कब और कहां से आई, इसे लेकर कोई कुछ नहीं जानता है।

जिंगरवाई लॉबेईImage Credit : IStock07 / 07

जिंगरवाई लॉबेई

यहां के लोगों के नाम की धुन को जिंगरवाई लॉबेई कहा जाता है। यहां के लोग धुन या लोरी सुनकर ही बता देते हैं कि किस घर से आवाज आ रही है। बता दें कि लोरी की धुन आमतौर पर पक्षियों और प्रकृति से इंस्पायर है।

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