इस धरती पर करीब 4000 सांपों की प्रजातियां रहती हैं। इनमें से 600 प्रजातियां बेहद ही जहरीली और जानलेवा होती हैं। जैसे किंग कोबरा (King Cobra), रसेल वाइपर (Russel Viper), बिग फोर (The Big Four), स्केल्ड वाइपर (Scaled Viper) और कई तमाम प्रजातियां हैं जो बहुत ही खतरनाक मानी जाती हैं। मगर आज हम आपको एक ऐसे सांपों की प्रजाति के बारे में बताएंगे। जो खतरनाक सांपों की श्रेणी में सबसे अव्वल है। इस सांप का फेवरेट शिकार इंसान ही होते हैं। इंसानों के पसीने की गंध इस सांप को दूर-दूर से खींच ले आती है। यह सांप इतना जहरीला होता है कि इसके सामने किंग कोबरा को भी कम आंका जाता है।
हम जिस सांप की बात कर रहे हैं, उसका नाम कॉमन करैत (Common Krait). इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। कई एक्सपर्ट और स्नैक कैचर्स बताते हैं कि कॉमन करैत भारत के सबसे जहरीले सांपों में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दिन के मुकाबले रात में ज्यादा एक्टिव रहता है। जैसे ही अंधेरा होता है, यह अपने बिल से निकलकर भोजन की तलाश में निकल पड़ता है।
कॉमन करैत को लेकर बताया जाता है कि इसका नेचर दूसरे सांपों से थोड़ा अलग है। कई बार यह रात के समय घरों में भी घुस जाता है। कॉमन करैत को लेकर कई तरह की बातें प्रचलित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह इंसानों के शरीर से आने वाली पसीने की गंध से काफी आकर्षित होता है। यही वजह है कि कई बार यह सो रहे लोगों के बिस्तर तक भी पहुंच जाता है। अगर कोई व्यक्ति नींद में करवट बदलते समय गलती से इस सांप को छू ले या उसके ऊपर हाथ-पैर पड़ जाए, तो यह तुरंत काट सकता है। इसी कारण इसके काटने की कई घटनाएं रात के समय होती हैं।
कॉमन करैत को सबसे खतरनाक बनाने वाली बात यह है कि इसके दांत बहुत छोटे होते हैं। इसके काटने पर कई बार न तो ज्यादा दर्द होता है और न ही बड़ा घाव दिखाई देता है। कई लोग इसे किसी छोटे कीड़े का काटना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन धीरे-धीरे इसका जहर शरीर में फैलने लगता है। जब तक लोगों को इसका पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
कॉमन करैत का जहर बेहद शक्तिशाली होता है। जहां भारत समेत पूरी दुनिया में कोबरा का जहर बहुत खतरनाक माना जाता है, वहीं कॉमन करैत का जहर उससे भी ज्यादा असरदार हो सकता है। इसका जहर सीधे शरीर के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है। इसके असर से शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं। मरीज को बोलने, निगलने और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। अगर समय रहते इलाज नहीं मिले, तो इंसान की मौत हो सकती है।
बारिश के मौसम में बिलों में पानी भर जाने के कारण कई सांप बाहर निकल आते हैं। ऐसे समय में वे सुरक्षित जगह की तलाश में घरों, गोदामों, लकड़ी के ढेर, झाड़ियों और पुराने सामान के बीच छिप सकते हैं इसलिए बरसात के दिनों में लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। यदि आपको कोई सांप दिखाई देता है तो बिल्कुल सावधान हो जाएं और उसे मारने की कोशिश ना करें। तुरंत किसी स्नेक कैचर को बुलाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में कुछ सावधानियां अपनाकर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जैसे रात में फर्श पर सोने से बचें, सोने से पहले बिस्तर, चादर और तकिए को अच्छी तरह चेक कर लें। साथ ही घर के आसपास झाड़ियां, कबाड़ और लकड़ियों का ढेर न लगने दें। रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें और बच्चों को अंधेरे में नंगे पैर बाहर न जाने दें।
अगर किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो घबराने की बजाय तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल ले जाएं। झाड़-फूंक, तांत्रिक इलाज या घरेलू नुस्खों पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है। सही समय पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) और डॉक्टर की देखरेख में इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।