अगर AC को सही तरीके से फिट नहीं किया गया हो या दीवार पर मजबूत सपोर्ट न दिया गया हो, तो मशीन पर दबाव बढ़ सकता है। इससे AC के पार्ट्स खराब होने या फटने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा अनुभवी तकनीशियन से ही इंस्टॉलेशन करवाना चाहिए।
AC में गैस का सही स्तर बहुत जरूरी होता है। गैस कम होने पर कूलिंग कॉइल जम सकती है, जबकि ज्यादा गैस होने से मशीन में असामान्य प्रेशर बनता है। ऐसी स्थिति में पाइप या कॉइल फटने का खतरा रहता है।
लो वोल्टेज या हाई वोल्टेज दोनों ही AC के लिए नुकसानदायक हैं। वोल्टेज में उतार-चढ़ाव होने पर कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे मशीन खराब हो सकती है। एक्सपर्ट्स स्टेबलाइजर लगाने की सलाह देते हैं।
अगर लंबे समय तक AC की सफाई और सर्विसिंग न कराई जाए, तो फिल्टर और कॉइल में धूल जमा हो जाती है। इससे मशीन ओवरहीट होने लगती है और ब्लास्ट का खतरा बढ़ जाता है। नियमित सर्विसिंग AC की लाइफ बढ़ाने में मदद करती है।
समय के साथ AC के पाइप, कॉइल और दूसरे पार्ट्स कमजोर हो जाते हैं। अगर इनमें दरार या लीकेज हो जाए, तो मशीन अचानक खराब हो सकती है। इसलिए पुराने AC की समय-समय पर जांच जरूरी है।
AC की आउटडोर यूनिट अगर लगातार तेज धूप या ज्यादा गर्मी में रहती है, तो वह जल्दी ओवरहीट हो सकती है। इससे मशीन पर दबाव बढ़ता है और नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। यूनिट को छांव वाली जगह पर लगाना बेहतर माना जाता है।
कई लोग बिजली बचाने के लिए AC को बार-बार ऑन और ऑफ करते रहते हैं। इससे कंप्रेसर पर असर पड़ता है और मशीन जल्दी खराब हो सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक AC को एक स्थिर तापमान पर चलाना ज्यादा सुरक्षित होता है।
जानकारों का कहना है कि हर 3 से 6 महीने में AC की सर्विसिंग जरूर करानी चाहिए। साथ ही सही वोल्टेज, अच्छी क्वालिटी के पार्ट्स और नियमित सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। 24 से 26 डिग्री तापमान पर AC चलाने से मशीन पर कम दबाव पड़ता है और बिजली की बचत भी होती है।