एयर कंडीशनर कमरे की गर्म हवा को बाहर निकालकर उसे ठंडा और सूखा बनाकर वापस कमरे में भेजता है। यही कारण है कि AC दिन या रात किसी भी समय प्रभावी तरीके से कमरे को ठंडा कर सकता है।
वहीं कूलर बाहर की हवा को पानी की मदद से ठंडा करके कमरे के अंदर पहुंचाता है। ऐसे में अगर बाहर का वातावरण पहले से बहुत ज्यादा गर्म हो, तो कूलर उतनी अच्छी ठंडक नहीं दे पाता। इसलिए कूलर का असर काफी हद तक बाहरी तापमान पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कूलर चलाने का सबसे अच्छा समय सुबह 5 से 6 बजे के बीच होता है। इस समय बाहर का तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है, जिससे कूलर हवा को ज्यादा बेहतर तरीके से ठंडा कर पाता है।
अगर कूलर को सुबह से लेकर करीब 9 या 10 बजे तक लगातार चलाया जाए, तो घर की दीवारें, फर्श और छत पहले ही ठंडी हो जाती हैं। इसका फायदा यह होता है कि दिन में तेज धूप और गर्मी के बावजूद घर का तापमान काफी हद तक संतुलित बना रहता है।
सुबह के समय कूलर चलाने से घर की दीवारें और छत ठंडक को अपने भीतर स्टोर कर लेती हैं। बाद में जब बाहर तापमान बढ़ता है, तो गर्मी का असर सीधे घर के अंदर नहीं पहुंच पाता। यही वजह है कि घर लंबे समय तक ठंडा महसूस होता है और AC की जरूरत भी कम पड़ती है।
कई लोग ऐसे में केवल 1-2 घंटे AC चलाकर बाकी समय कूलर से ही आरामदायक माहौल बनाए रख सकते हैं, जिससे बिजली बिल में भी बचत होती है।
हालांकि कई लोग शाम या रात में कूलर चलाना पसंद करते हैं, लेकिन उत्तर भारत जैसे इलाकों में यह तरीका उतना प्रभावी नहीं माना जाता। यहां गर्मियों में तापमान 45 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है, जिससे दिनभर दीवारें और छत काफी गर्म हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में शाम को कूलर चलाने पर घर जल्दी ठंडा नहीं हो पाता। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तेज गर्मी वाले क्षेत्रों में सुबह के समय कूलर चलाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।