भारत में कुछ शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को यह विशेष सुविधा प्रदान की गई है। इनमें भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शामिल हैं। इसके अलावा अपने-अपने राज्य में राज्यपाल और मुख्यमंत्री की गाड़ियों को भी टोल टैक्स नहीं देना होता।
न्यायपालिका से जुड़े भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को भी यह छूट प्राप्त है। साथ ही, लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के चेयरमैन की गाड़ियों को भी टोल प्लाजा पर बिना टैक्स दिए गुजरने की अनुमति होती है। (PTI Photo/Shahbaz Khan)
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इन विशेष पदों के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं। इन नियमों के तहत इन पदों से जुड़ी आधिकारिक गाड़ियों को देश के किसी भी टोल प्लाजा पर नहीं रोका जाता और उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाता। इसका उद्देश्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की यात्रा को सुगम और निर्बाध बनाना है। (PTI Photo/Shahbaz Khan)
इन विशेष पदों से जुड़े लोगों की गाड़ियों की पहचान करना आसान होता है। आमतौर पर उनके काफिले के साथ सुरक्षा वाहन चलते हैं, जिससे टोल कर्मचारियों को पहले ही संकेत मिल जाता है। इसके अलावा, इन गाड़ियों पर विशेष प्रकार के स्टिकर और पहचान चिह्न लगे होते हैं। टोल प्लाजा पर लगे कैमरे जैसे ही इन स्टिकर को पहचानते हैं, कर्मचारियों को तुरंत जानकारी मिल जाती है और गाड़ी को बिना रोके आगे जाने दिया जाता है। (PTI Photo/Shahbaz Khan)
इन संवैधानिक पदों के अलावा, कुछ अन्य अधिकारियों और सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को भी विशेष परिस्थितियों में टोल टैक्स से छूट दी जाती है। उदाहरण के लिए, ड्यूटी पर तैनात सेना और पुलिस के अधिकारी जब सरकारी कार्य पर होते हैं, तो उनकी गाड़ियों से टोल नहीं लिया जाता। सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारी जब निरीक्षण कार्य पर होते हैं, तब उन्हें भी यह सुविधा दी जाती है।
कुछ जरूरी सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को भी टोल टैक्स से मुक्त रखा गया है। इसमें एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और शव वाहन शामिल हैं, ताकि आपात स्थिति में समय की बचत हो सके। इसके अलावा, भारत आने वाले विदेशी राजकीय मेहमानों की आधिकारिक गाड़ियों को भी टोल टैक्स से छूट प्रदान की जाती है।
टोल टैक्स से छूट का यह नियम विशेष रूप से उन पदों और सेवाओं के लिए बनाया गया है, जिनकी जिम्मेदारियां देश और जनता से सीधे जुड़ी होती हैं। इससे उनकी यात्रा तेज, सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके। यह व्यवस्था प्रशासनिक कार्यों की सुचारू गति बनाए रखने में भी मदद करती है।