फ्लैट किराए पर देने वालों के लिए बड़ी खबर, आया सुप्रीम कोर्ट का तगड़ा फैसला

Residential Flats: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि किसी रिहायशी फ्लैट को किराए पर देने भर से उसका खरीदार उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत “उपभोक्ता” की कैटेगरी से बाहर नहीं हो जाता। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की बेंच ने दिया। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय रियल एस्टेट में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता होने की पहचान केवल संपत्ति खरीदने के उद्देश्य और व्यवहार पर निर्भर करती है, न कि फ्लैट के किराए पर जाने से। यह फैसला यह भी दर्शाता है कि कानून में व्यावसायिक उद्देश्य का निर्धारण हमेशा मामले की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए।

Authored by: रामानुज सिंहUpdated Feb 6 2026, 13:51 IST
​अपील किसने दायर की थी​Image Credit : Istock01 / 06

​अपील किसने दायर की थी​

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक यह आदेश विनीत बहरी की अपील पर पारित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके फ्लैट को किराए पर देने को व्यावसायिक उद्देश्य मानते हुए उनकी शिकायत खारिज कर दी गई थी।

​उपभोक्ता की परिभाषा​Image Credit : Istock02 / 06

​उपभोक्ता की परिभाषा​

बैंच ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2(1)(डी) के तहत “उपभोक्ता” वह व्यक्ति है जो किसी वस्तु को मूल्य देकर खरीदता है या सेवाएं प्राप्त करता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति सामान या संपत्ति मुख्य रूप से व्यावसायिक उद्देश्य के लिए खरीदता है, तो वह इस परिभाषा से बाहर हो जाता है।

​किराए पर देने का मतलब नहीं​Image Credit : Istock03 / 06

​किराए पर देने का मतलब नहीं​

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी फ्लैट को किराए पर देने भर से यह नहीं माना जा सकता कि खरीदार ने इसे प्रमुख रूप से व्यावसायिक गतिविधि के लिए खरीदा है। इसका मतलब यह है कि फ्लैट का किराए पर होना अपने आप में उसे “व्यावसायिक उद्देश्य” वाला नहीं बनाता।

​व्यावसायिक उद्देश्य तय करना​Image Credit : Istock04 / 06

​व्यावसायिक उद्देश्य तय करना​

बैंच ने यह भी कहा कि किसी फ्लैट के व्यावसायिक उद्देश्य के लिए खरीदे जाने का निर्धारण हर मामले की परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए। यानी, यह निर्णय केवल संपत्ति के किराए पर जाने के आधार पर नहीं लिया जा सकता।

​बिल्डर की जिम्मेदारी​Image Credit : Istock05 / 06

​बिल्डर की जिम्मेदारी​

अगर बिल्डर या विक्रेता यह साबित करना चाहता है कि फ्लैट मुख्य रूप से व्यावसायिक उद्देश्य के लिए खरीदा गया था, तो यह उनका दायित्व है। कोर्ट ने कहा कि बिल्डर को यह साबित करना होगा कि खरीदार ने संपत्ति को निवेश या व्यापार के उद्देश्य से खरीदा था, न कि केवल रहने या सामान्य उपयोग के लिए।

​फैसला उपभोक्ताओं के लिए राहत​Image Credit : Istock06 / 06

​फैसला उपभोक्ताओं के लिए राहत​

इस फैसले से रियल एस्टेट खरीदारों को बड़ी राहत मिली है। अब अगर कोई व्यक्ति रिहायशी फ्लैट खरीदकर उसे किराए पर देता है, तो भी वह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर सकता है। इससे उपभोक्ताओं को अपने बिल्डर या डेवलपर के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार बना रहेगा।

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