अगर केवल शुरुआत में होने वाले खर्च की बात करें तो जनरेटर की कीमत सोलर सिस्टम से कम होती है। उदाहरण के तौर पर 5 kVA जनरेटर की कीमत लगभग 40 हजार रुपये से 1 लाख रुपये तक हो सकती है।
वहीं 3 kW सोलर सिस्टम लगाने में करीब 1.5 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है, हालांकि इसकी कीमत बैटरी और सिस्टम की क्षमता के हिसाब से बदल सकती है।
जनरेटर चलाने के लिए लगातार डीजल या पेट्रोल की जरूरत होती है, जिससे हर महीने खर्च बढ़ता रहता है। इसके अलावा तेल की कीमत बढ़ने पर इसका खर्च भी बढ़ जाता है। दूसरी तरफ सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली बनाता है। एक बार सिस्टम लगाने के बाद बिजली बनाने का खर्च लगभग शून्य हो जाता है। यही वजह है कि लंबे समय में सोलर पैनल ज्यादा बचत वाला विकल्प बन सकता है।
जनरेटर में इंजन होने के कारण इसकी सर्विस और रखरखाव की जरूरत ज्यादा होती है। साथ ही जनरेटर चलते समय काफी शोर भी करता है और धुआं छोड़ता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। सोलर पैनल में चलने वाले हिस्से कम होते हैं, इसलिए इसका मेंटेनेंस काफी कम होता है। यह बिना शोर और प्रदूषण के बिजली उपलब्ध कराता है।
जनरेटर तेल रहने तक बिजली देता रहता है और लंबे समय तक बैकअप देने में सक्षम होता है, लेकिन सोलर सिस्टम बैटरी के साथ लगाने पर बिजली कटौती के दौरान भी घर के जरूरी उपकरण चलाए जा सकते हैं। अगर केवल इमरजेंसी बैकअप चाहिए तो जनरेटर एक विकल्प हो सकता है, लेकिन रोजाना इस्तेमाल और बिजली खर्च कम करने के लिए सोलर सिस्टम बेहतर माना जाता है।
लंबे समय यानी 5 से 10 साल के कुल खर्च को देखें तो जनरेटर सबसे महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें तेल और मेंटेनेंस का लगातार खर्च जुड़ा रहता है। वहीं सोलर सिस्टम की शुरुआती लागत ज्यादा होती है, लेकिन बाद में बिजली प्रोडक्शन का खर्च काफी कम हो जाता है।
कुल मिलाकर कहें तो अगर घर के लिए लंबे समय तक बिजली की जरूरत है तो सोलर पैनल के साथ इन्वर्टर और बैटरी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं केवल बिजली कटौती के समय बैकअप के लिए जनरेटर काम का साबित हो सकता है।