पीएम किसान की 22वीं किस्त से पहले कई राज्यों के किसानों के नाम काटे जा रहे हैं या फिर उनकी किस्त रोकी जा रही है। हाल ही में यूपी में करीब 19 लाख किसानों की किस्त रोकी गई है। इसके अलावा राजस्थान में भी कई लाख किसानों की पीएम किसान किस्त पर रोक लगाई गई है। अब सवाल यह है कि आखिर यह नाम क्यों काटे जा रहे हैं। सरकार ने खुद इसके तीन कारण बताए हैं। आइए जानते हैं...
सरकार के संबंधित विभाग ने कुछ ऐसे मामलों की पहचान की है जो पीएम-किसान योजना की गाइडलाइन में तय किए गए अपात्रता मानकों के दायरे में आ सकते हैं। इन मामलों को फिलहाल सत्यापन के लिए चिन्हित किया गया है।
विभाग के अनुसार वे किसान जिन्होंने 01-02-2019 के बाद जमीन का स्वामित्व प्राप्त किया है। उनकी किस्त रोकी जा सकती है। इसके अलावा ऐसे मामले जहां एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्य योजना का लाभ ले रहे हैं, जैसे पति-पत्नी दोनों, या परिवार का वयस्क और नाबालिग सदस्य।
ऐसे चिन्हित मामलों में योजना की किस्त को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। यह रोक तब तक रहेगी जब तक भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) पूरा नहीं हो जाता।
किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी पात्रता की स्थिति की जांच स्वयं करें। इसके लिए वे पीएम-किसान की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर उपलब्ध Know Your Status (KYS) सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, किसान Kisan eMitra चैटबॉट के माध्यम से भी अपनी जानकारी और पात्रता से जुड़ी स्थिति जान सकते हैं।
देश के करीब 9 करोड़ किसानों को पीएम किसान की 22वीं किस्त का इंतजार है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई तय तारीख नहीं बताई गई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि होली से पहले यानी इसी हफ्ते सरकार पीएम किसान की 22वीं किस्त को लेकर घोषणा कर सकती है।
हाल ही में बिहार सरकार की ओर से घोषणा की गई है कि बिहार के किसानों को अब पीएम किसान योजना के तहत साल में कुल 9,000 रुपये मिलेंगे यानी हर किस्त में 2,000 रुपये की जगह 3,000 रुपये आएंगे।
पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी को अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में आपके लिए जरूरी है कि आप 22वीं किस्त के आने से पहले फार्मर आईडी बनवा लें। फार्मर आईडी बनवाने के लिए देश के कई इलाकों में बकायदा कैंप लगाए जा रहे हैं।